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पूर्व रेल मंत्री और टीएमसी के कद्दावर नेता मुकुल राय ने अपने छोटे से कार्यकाल में किराए वापस को लेकर बड़ा फैसला किया था, जो आज भी यादगार है. किराए को लेकर उनसे पहले के रेल मंत्री की कुर्सी चली गयी गयी थी.फिर भी उन्होंने यह फैसला लिया था.
यूपीए दो की सरकार में बने थे रेल मंत्री.
Mukul Roy Major Railway Decisions: पूर्व रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के नेता रहे मुकुल रॉय ने केवल छह माह के कार्यकाल में किराए को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है, जो यादगार बना गया. किराए को लेकर उनसे पहले के रेल मंत्री की कुर्सी चली गयी गयी थी. वे टीएमसी के कद्दावर नेता था और ममता बनर्जी के करीबी थे. इसलिए रेल मंत्री को हटाने के बाद कुर्सी सौंपी गयी थी. उन्होंने इस छोटे से कार्यकाल में बढ़ा हुआ किराया वापस लिया था.
मुकुल रॉय यूपीए-दो सरकार में रेल मंत्री बने थे. वे 20 मार्च 2012 से 21 सितंबर 2012 तक ही इस पदा पर रहे. उनका कार्यकाल केवल 6 महीने का था, लेकिन इस छोटे से कार्यकाल में उन्होंने कुछ खास कदम उठाए, जिनके लिए लोग उनको आज भी याद करते हैं.
यूपीए दो के कार्यकालय में रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने रेल बजट में किराया बढ़ाया था, इसके बाद विवाद शुरू हो गया और यह एक बड़ा मुद्दा बनने लगा. इसी वजह से त्रिवेदी को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. चूंकि रेल मंत्री का पद टीएमसी के पास था. इसलिए पार्टी ने मुकुल रॉय को रेल मंत्री बनाया था. उन्होंने पदभार ग्रहण करने के बाद तुरंत एसी फर्स्ट और सेकेंड क्लास को छोड़कर बाकी सभी क्लास (थर्ड एसी, स्लीपर, जनरल आदि) का किराया वृद्धि वापस ले लिया. यह फैसला आम यात्रियों के पक्ष में था और काफी चर्चा में रहा और सहारान गया.
इतना ही नहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए विशेष तोहफा दिया था. उन्होंने डीयू ज्ञान उदय एक्सप्रेस ट्रेन चलाई थी. दिल्ली यूनिवर्सिटी के 1000 छात्रों के लिए चलाई गयी इस स्पेशल ट्रेन से उन्हें अहमदाबाद, मुंबई, गोवा, बेंगलुरू जैसे कई जगहों पर घुमाया गया. इस तरह यह छात्रों के लिए शैक्षिक यात्रा का अनोखा प्रयास था.
इसके अलावा उनके कार्यकाल में बंगाल में कई नई रेल परियोजनाएं, लाइनों का विस्तार, और स्टेशनों के डेवपलमेंट की शुरुआत हुई.कई रेल प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए गए, जो राज्य में रेल नेटवर्क मजबूत करने में मददगार साबित हुए.


