gaya teacher ramjit kumar musical campaign to increase school attendance

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Gaya Teacher Ramjit Story: सरकारी विद्यालय के शिक्षक रामजीत कुमार बच्चों को स्कूल आने के लिए अनूठा प्रयास कर रहे हैं. रामजीत अपने गले में हारमोनियम टांग कर स्कूल के कुछ बच्चे और शिक्षकों को लेकर जंगल में स्थित गांव में जाकर हारमोनियम बजाते हैं. बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करते हैं. उनकी मुहिम की रंग लाई. उनके प्रयास के लिए उनको सम्मानित भी किया जा चुका है.

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गया: बिहार के गया जिले का दनुआ-भलुआ बीहड़ जंगल जो कभी नक्सलियों की मौजूदगी के लिए जाना जाता था. आज एक शिक्षक के अनूठे प्रयास की वजह से चर्चा में है. यहां के प्राथमिक सह प्लस-टू विद्यालय पिपरही के शिक्षक रामजीत कुमार ने बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए संगीत को अपना हथियार बनाया है. इसका असर भी दिखा है. अब वे अपने अनोखे प्रयास के लिए चर्चा में आए हैं. आइए जानते हैं इनके सफर को.

गले में हारमोनियम और शिक्षा का अलख
रामजीत कुमार हर सुबह अपने गले में हारमोनियम टांगकर स्कूल के कुछ बच्चों और शिक्षकों के साथ निकल पड़ते हैं. वे जंगल के दुर्गम रास्तों से होते हुए पिपरही और आसपास के गांवों की गलियों में जाते हैं. वहां हारमोनियम बजाते हैं. गीतों के जरिए बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करते हैं. शिक्षक का यह म्यूजिकल मार्च इतना प्रभावी है कि जो बच्चे पहले स्कूल के नाम से कतराते थे, अब वे खुशी-खुशी क्लास में बैठ रहे हैं.

फिल्म से मिला आईडिया, IAS ने किया सम्मानित
लोकल 18 से बात करते हुए रामजीत ने बताया कि उन्हें यह प्रेरणा एक फिल्म देखकर मिली. सरकार के स्कूल बचाओ-नामांकन बढ़ाओ अभियान को उन्होंने इस अनूठे तरीके से लागू किया. उनके इस प्रयास का लोहा शिक्षा विभाग ने भी माना है. गया के अतरी प्रखंड में इस अभियान की सफल शुरुआत के बाद तत्कालीन मुख्य सचिव एस.सिद्धार्थ ने उन्हें सम्मानित भी किया था.

50% से 80% तक पहुंची उपस्थिति
पिपरही स्कूल में करीब 600 बच्चों का नामांकन है, लेकिन जंगली इलाका होने के कारण पहले उपस्थिति 50% से भी कम रहती थी. पिछले एक साल से रामजीत की मुहिम के कारण अब 80% तक बच्चे रोजाना स्कूल आ रहे हैं. इस स्कूल के बच्चे न केवल अंग्रेजी बोलने में माहिर हो रहे हैं, बल्कि जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में भी परचम लहरा रहे हैं. हाल ही में यहां के एक छात्र ने जिले में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है.

सड़क की बदहाली है चुनौती
सफलता की इस कहानी के बीच एक बड़ी बाधा रास्ता है. ग्रामीणों और शिक्षकों का कहना है कि जीटी रोड से स्कूल तक पहुंचने वाली 9 किलोमीटर की सड़क कच्ची है. बरसात के दिनों में यहां आना-जाना दूभर हो जाता है. ग्रामीणों ने सरकार से जल्द पक्की सड़क बनाने की मांग की है ताकि बच्चों का भविष्य और सुगम हो सके.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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