Ghazipur News: साल 1957 का सितार और सुरों की कहानी, गाजीपुर पीजी कॉलेज की अनमोल धरोहर और गौरव!

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Ghazipur News: गाजीपुर पीजी कॉलेज सिर्फ़ डिग्री देने का केंद्र नहीं, बल्कि संगीत और संस्कृति की एक जीवित विरासत है. 1957 में स्थापित इस कॉलेज के संगीत विभाग में मौजूद सितार आज भी पुराने ज़माने की शान और सुरों की मिठास को कायम रखे हुए हैं. छात्र इन सितारों से सिर्फ़ संगीत ही नहीं, बल्कि इतिहास और परंपरा से भी जुड़ते हैं, और बाहर से आने वाले लोग इस अनमोल खजाने को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं.

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गाजीपुर. क्या आप जानते हैं कि गाजीपुर पीजी कॉलेज सिर्फ डिग्री बांटने वाली जगह नहीं है? इसकी क्लासेस के अंदर एक ऐसा खजाना छिपा है, जो आपको सीधे 1957 के दौर में ले जाएगा. जब इस कॉलेज की नींव रखी गई थी, तब संगीत विभाग में एक ‘सितार’ लाया गया था. ताज्जुब की बात यह है कि जनरेशन बदल गई, पीढ़ियां गुजर गई, लेकिन वह सितार आज भी पूरी शान के साथ संगीत विभाग की शोभा बढ़ा रहा है. संगीत विभाग की प्राध्यापिका मीना सिंह बताती हैं कि यह कॉलेज के लिए गर्व की बात है. आज के समय में चीजें जल्दी बदल जाती हैं, लेकिन हमारे कॉलेज में सितार को उसी सम्मान के साथ संभालकर रखा गया है, वे कहती हैं. मीना सिंह के मुताबिक, कॉलेज में इस समय 7–8 सितार मौजूद हैं. इनमें से कुछ करीब 20 साल पुराने हैं, जबकि कई सितार ऐसे हैं जो कॉलेज की स्थापना के दौर के हैं. यह सितार लकड़ी से बना है और इसमें कद्दू का टोंबा लगा हुआ है, जो इसकी आवाज़ को खास बनाता है.

नाज़ुक होता है सितार, इसलिए खास देखभाल जरूरी

मीना सिंह बताती हैं कि सितार दिखने में मजबूत लगता है, लेकिन असल में बहुत नाज़ुक होता है. खासतौर पर कद्दू का टोंबा अगर कहीं टकरा जाए, तो तुरंत टूट सकता है, वे कहती हैं. गर्मी के मौसम में सितार को कपड़े से ढककर रखा जाता है, ताकि तेज़ तापमान से नुकसान न हो. इसे इधर-उधर रखने या लापरवाही से छूने से भी बचाया जाता है. आज के समय में अगर एक सामान्य सितार खरीदा जाए, तो उसकी कीमत करीब 15 हजार रुपये तक होती है. कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र जब इन सितारों से संगीत सीखते हैं, तो उन्हें सिर्फ़ सुर-ताल ही नहीं, बल्कि इतिहास से जुड़ने का मौका भी मिलता है. बाहर से आने वाले लोग भी जब संगीत विभाग देखते हैं, तो इस विरासत को देखकर प्रभावित हुए बिना नहीं रहते. पीजी कॉलेज गाजीपुर की यही खासियत है, यहां शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि संगीत और संस्कृति के जरिए भी छात्रों को उनकी जड़ों से जोड़ती है.

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Monali Paul

Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें



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