Gorakhpur Vishnu Temple History | Gorakhpur History | गोरखपुर के विष्णु मंदिर का इतिहास

Date:


Last Updated:

Asuran Vishnu mandir Gorakhpur: गोरखपुर के असुरन क्षेत्र में स्थित विष्णु मंदिर न केवल भक्तों की आस्था का केंद्र है, बल्कि इतिहास प्रेमियों के लिए भी किसी खजाने से कम नहीं है. पाल राजवंश के कालखंड से जुड़ी भगवान विष्णु की दुर्लभ प्रतिमा इस मंदिर की मुख्य पहचान है. आखिर क्या है इस 8वीं से 12वीं शताब्दी की प्रतिमा की विशेषता और कैसे यह मंदिर एक ही छत के नीचे श्रद्धालुओं को चारों धाम के दर्शन का अनुभव करा रहा है. जानिए इस मंदिर के गौरवशाली इतिहास और इसकी जुड़ी मान्यताएं.

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के असुरन क्षेत्र में स्थित ‘विष्णु मंदिर’ आस्था और इतिहास का एक अद्भुत संगम है. यह मंदिर अपनी धार्मिक महत्ता के साथ-साथ अपने ऐतिहासिक वैभव के लिए भी दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. यहां स्थापित भगवान विष्णु की प्रतिमा को पाल राजवंश के काल से जोड़कर देखा जाता है, जो इसे शहर के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्थलों में से एक बनाता है.

इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर में विराजमान भगवान विष्णु की मूर्ति पाल काल (8वीं से 12वीं शताब्दी) की परंपरा को दर्शाती है. उस समय काले पत्थर की मूर्तियां बनाई जाती थीं, जिनकी शिल्प शैली और संरचना बेहद विशिष्ट और कलात्मक होती थी. असुरन स्थित इस मंदिर की मूर्ति उसी प्राचीन कला का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करती है.

गोरखपुर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की प्रोफेसर प्रज्ञा के अनुसार, पाल काल की प्रतिमाओं की मुख्य पहचान उनका गहरा काला रंग और विशेष नक्काशी होती है. असुरन मंदिर की प्रतिमा का स्वरूप और इसकी बनावट स्पष्ट रूप से उसी गौरवशाली कालखंड की ओर संकेत करती है, जो शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र है.

अद्भुत बनावट और चारों धाम के दर्शन
असुरन का यह विष्णु मंदिर अपनी भव्यता और विस्तृत परिसर के लिए जाना जाता है. इस मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि यहां भगवान विष्णु के मुख्य स्वरूप के साथ-साथ चारों धाम के देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं. इससे श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर पूरे भारत की आध्यात्मिक यात्रा और व्यापक धार्मिक अनुभव प्राप्त होता है.

बृहस्पतिवार को उमड़ती है भारी भीड़
मंदिर परिसर में नियमित रूप से यज्ञ, हवन और विशेष पूजा-पाठ का आयोजन होता है. यहां एक साथ कई पुजारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान की आराधना में लीन नजर आते हैं. वैसे तो यहां प्रतिदिन भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन बृहस्पतिवार (गुरुवार) के दिन यहां विशेष भीड़ उमड़ती है. भगवान विष्णु का दिन होने के कारण दूर-दराज के इलाकों से लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां मत्था टेकने पहुंचते हैं.

सांस्कृतिक धरोहर के रूप में पहचान
असुरन का यह मंदिर अब गोरखपुर की सांस्कृतिक पहचान का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है. पाल काल से जुड़ी ऐतिहासिक प्रतिमा, मंदिर की भव्य वास्तुकला और निरंतर चलने वाले धार्मिक अनुष्ठान इसे शहर के अन्य मंदिरों से अलग बनाते हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं करते, बल्कि इतिहास की एक जीवंत झलक भी महसूस करते हैं, जो उन्हें हमारी प्राचीन जड़ों से जोड़ती है.

About the Author

Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related