India’s First Underwater Road-Rail Tunnel Coming Soon | चीन-बांग्लादेश की धरी रह जाएगी सारी चाल, नदी के नीचे दौड़ेगी ट्रेन और कार, अंडर वॉटर टनल की आ गई डिटेल

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चीन-बांग्लादेश की धरी रह जाएगी सारी चाल, नदी के नीचे दौड़ेगी ट्रेन और कार

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यह भारत में पहली अंडरवाटर रोड और रेल टनल होगी और दुनिया भर में अपनी तरह की दूसरी टनल होगी. इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल लागत 18,662.02 करोड़ रुपये होगी. इस परियोजना का सबसे अहम हिस्सा 15.79 किलोमीटर लंबा रोड और रेल टनल है, जो ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनेगा.

भारत में पहली बार पानी के नीचे सड़क टनल बनाने की मंजूरी मिल गई है. केंद्र सरकार ने असम में गोहपुर से नुमालीगढ़ के बीच चार लेन के ग्रीनफील्ड कॉरिडोर परियोजना को हरी झंडी दे दी है. इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश का पहला रोड-कम-रेल टनल बनाया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की बैठक में इस परियोजना को मंजूरी दी गई. इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल लागत 18,662.02 करोड़ रुपये होगी.

इस परियोजना का सबसे अहम हिस्सा 15.79 किलोमीटर लंबा रोड और रेल टनल है, जो ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनेगा. यह भारत का पहला अंडरवॉटर रोड और रेल टनल होगा और दुनिया में अपनी तरह का दूसरा प्रोजेक्ट बताया जा रहा है.

फिलहाल गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच सड़क संपर्क काफी लंबा और समय लेने वाला है. अभी लोगों को सिलघाट के पास कालीआभोमोरा ब्रिज से होकर करीब 240 किलोमीटर का सफर करना पड़ता है, जिसमें लगभग छह घंटे लगते हैं. नया कॉरिडोर बनने के बाद दूरी और समय दोनों में बड़ी कमी आएगी.

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पूरे प्रोजेक्ट की लंबाई 33.77 किलोमीटर होगी और इसे EPC मॉडल पर तैयार किया जाएगा. इसमें 11,982.36 करोड़ रुपये सिविल कंस्ट्रक्शन पर और करीब 716.65 करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण पर खर्च होंगे. यह पूरी तरह एक्सेस-कंट्रोल्ड चार लेन हाईवे होगा.

टनल को ट्विन-ट्यूब टीबीएम तकनीक से बनाया जाएगा. एक ट्यूब में सड़क और दूसरी में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर होगा. इसके अलावा 1.26 किलोमीटर रोड कट-एंड-कवर सेक्शन और 4 किलोमीटर रेल कट-एंड-कवर सेक्शन भी बनाया जाएगा..

यह कॉरिडोर नेशनल हाईवे-15 और नेशनल हाईवे-715 को जोड़ेगा. साथ ही नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे की दो अहम रेल लाइनों को भी आपस में जोड़ेगा. गोहपुर की ओर यह रंगिया–मुकोंगसेलेक रेल सेक्शन से जुड़ेगा, जबकि नुमालीगढ़ की ओर यह फुरकाटिंग–मरियानी लूप लाइन से कनेक्ट होगा.

हवाई और जल परिवहन को भी इस परियोजना से जोड़ा जाएगा. यह कॉरिडोर डोनी पोलो एयरपोर्ट (ईटानगर) और तेजपुर एयरपोर्ट से जुड़ेगा, साथ ही बिश्वनाथ घाट और तेजपुर के इनलैंड वॉटरवे टर्मिनलों से भी कनेक्ट होगा.

परियोजना के जरिए असम और आसपास के राज्यों के 11 आर्थिक केंद्र, 3 सामाजिक केंद्र, 2 पर्यटन स्थल और 8 लॉजिस्टिक हब आपस में जुड़ेंगे. इससे नुमालीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया, जोरहाट, शिवसागर, नगांव जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलेगा.

इसके साथ ही काजीरंगा नेशनल पार्क और देओपहार जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी. यह कॉरिडोर तेजपुर, गोहपुर और नुमालीगढ़ जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ने के साथ-साथ डिब्रूगढ़ और ईटानगर की कनेक्टिविटी भी बेहतर करेगा.

सरकार के मुताबिक, इस परियोजना के निर्माण के दौरान करीब 80 लाख मानव-दिवस का रोजगार पैदा होगा. यह कॉरिडोर असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और पूरे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में माल ढुलाई को आसान बनाएगा और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करेगा.



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