Karthik Swamy Murugan Temple here bones worshipped not idols 200 years old history of Karthik Swamy mandir | भारत में यहां प्रतिमा नहीं, अस्थियों की होती है पूजा, यहां दफ्न है 200 साल पुराने इस मंदिर का इतिहास

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भारत में यहां प्रतिमा नहीं, अस्थियों की होती है पूजा, 200 साल पुराना है इतिहास

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Karthik Swamy Murugan Temple: भारत में पेड़, शिला, पहाड़, नदी हर किसी की पूजा होती है, यहां की हवा में भी ईश्वर का मौजूदगी बहती है. लेकिन क्या आपको पता है इस देव भूमि में अस्थियों की पूजा-अर्चना भी की जाती है. जी हां, यह बिल्कुल सच है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में…

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Karthik Swamy Murugan Temple: भारत के हर मंदिर में स्वयंभू प्रतिमा या फिर स्थापित प्रतिमा की पूजा की जाती है. कुछ प्राचीन मंदिरों में पेड़ के नीचे मौजूद शिलाओं का भी पूजन होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड की देव भूमि पर एक ऐसा मंदिर मौजूद है, जहां किसी प्रतिमा को नहीं, बल्कि अस्थियों को पूजा जाता है? यह बात हैरान कर सकती है लेकिन यह पूरी तरह सच है. उत्तराखंड को देव भूमि का दर्जा प्राप्त है और यहां अस्थियों की पूजा की जाती है. हम बात कर रहे हैं प्रसिद्ध कार्तिक स्वामी मंदिर की, जो त्याग, प्रेम और समर्पण का प्रतीक हैं. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…

लंबी यात्रा करके पहुंचते हैं मंदिर
कार्तिक स्वामी मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में रुद्रप्रयाग-पोखरी मार्ग पर कनकचौरी गांव के पास स्थित है. कनकचौरी गांव से लगभग 3 किलोमीटर की आसान पैदल यात्रा आपको कार्तिक स्वामी मंदिर की मनमोहक सुंदरता तक ले जाती है. पहाड़ की चोटी पर होने की वजह से भक्तों को ट्रेकिंग के जरिए लंबी यात्रा करके मंदिर तक पहुंचना होता है. यात्रा के दौरान पहाड़ से उत्तराखंड किसी स्वर्ग की तरह लगता है. वैसे तो मंदिर में सावन और शिवरात्रि के समय अनुष्ठान और पूजा का आयोजन होता है, लेकिन दुर्गम रास्तों की वजह से मंदिर में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या घटती-बढ़ती रहती है.

कार्तिक स्वामी मंदिर को लेकर पौराणिक कथा
कार्तिक स्वामी मंदिर को लेकर कई पौराणिक किंवदंतियां मौजूद हैं. माना जाता है कि दक्षिण की धरती पर राज करने वाले कार्तिकेय भगवान गणेश के साथ हुई प्रतिस्पर्धा से आहत होकर कार्तिकेय पहाड़ियों पर चले आए और अपने पिता भगवान शिव और मां पार्वती को प्रेम, त्याग और समर्पण का सबूत देते हुए अपना शरीर त्याग दिया था. यही कारण है कि मंदिर में किसी की प्रतिमा नहीं है, बल्कि प्राकृतिक रूप से बनी शिला है, जिसे भगवान कार्तिकेय की अस्थियों के रूप में पूजा जाता है.

200 साल पुराना मंदिर का इतिहास
कार्तिक स्वामी मंदिर का इतिहास 200 साल पुराना बताया जाता है. मंदिर भले ही छोटा है, लेकिन भक्तों की आस्था दुर्गम रास्तों को भी आसान बना देती है. मंदिर की सबसे खास बात है शाम की आरती. शाम की आरती के समय मंदिर में एक साथ बहुत सारी घंटियां बजाई जाती हैं, और घंटियों की ध्वनि से पूरा पहाड़ शिव के रंग में रंग जाता है. हालांकि बर्फबारी के मौसम में थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है और मंदिर साल भर खुला रहता है.

About the Author

Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें





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