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कासगंज: क्या कोई पिता इतना मजबूर हो सकता है कि वह अपने ही कलेजे के टुकड़ों को मौत की नींद सुला दे? उत्तर प्रदेश के कासगंज से सामने आई यह रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी महज एक क्राइम बुलेटिन नहीं, बल्कि समाज और सिस्टम की संवेदनहीनता पर एक बड़ा सवालिया निशान है. एक छोटा सा कमरा, सिर पर कर्जे का बोझ, बीमार बच्चे की चीखें और खाली पड़े बर्तन शायद यही वो वजहें थीं जिसने श्यामवीर को कातिल और फिर खुदकुशी का शिकार बना दिया. हम बात कर रहे है बीती शनिवार की रात यूपी के कासगंज में हुई एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या के बारे में जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया. आइए जानते है आखिर इस घटना की वजह क्या रही जो एक पिता ने इस वारदात को अंजाम दिया.

तीन दिन तक बंद रहा घर, ऐसे हुआ खुलासा
घटना का खुलासा तब हुआ जब शनिवार की शाम एक युवक शादी का निमंत्रण देने श्यामवीर के घर पहुंचा. उसने कई बार कुंडी खटखटाई, आवाजें दीं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. पड़ोसियों ने बताया कि पिछले तीन दिनों से घर में कोई हलचल नहीं देखी गई थी. अनहोनी की आशंका हुई तो पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस पहुंची तो दरवाजा अंदर से बंद था. जिसके बाद छेनी और हथौड़े से लोहे का दरवाजा काटा गया. जैसे ही पुलिस अंदर दाखिल हुई, वहां का मंजर देखकर सबके हाथ-पांव कांप गए.

घर के अंदर मिला पूरा परिवार मृत
कमरे के अंदर श्यामवीर (50) का शव पंखे से झूल रहा था. पास ही बेड पर उसकी दो बेटियां प्राची (12), आकांक्षा (10) और बेटा गिरीश मृत पड़े थे. बच्चों के मुंह से झाग निकल रहा था, जो जहर की ओर इशारा कर रहा था. फर्श पर पत्नी रामश्री (48) का रक्तरंजित शव पड़ा था, जिसका गला रेता गया था. प्रारंभिक जांच के अनुसार, श्यामवीर ने पहले बच्चों को जहर दिया, फिर पत्नी की हत्या की और अंत में खुद फंदे पर झूल गया.

तंगहाली और खाली चूल्हा, मौत की वजह बनी गरीबी?
जांच में जो तथ्य सामने आए, वो झकझोर कर रख देने वाले हैं. पुलिस और स्थानीय लोगों के मुताबिक, श्यामवीर आर्थिक तंगी से बुरी तरह जूझ रहा था. उसके घर की तलाशी के दौरान पता चला कि पिछले कई दिनों से घर में चूल्हा तक नहीं जला था. रसोई में बर्तन तक नहीं थे.

श्यामवीर वेल्डिंग का काम करता था, लेकिन भाइयों से अलग होने के बाद उसकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गई. उसका छोटा बेटा गिरीश न्यूरो की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था. इलाज के महंगे खर्च ने श्यामवीर की कमर तोड़ दी थी. चाचा गया प्रसाद ने बताया कि श्यामवीर ने हाल ही में पड़ोसी से महज़ 1000 रुपये उधार लिए थे. उसने कई लोगों से मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन कहीं से उम्मीद की किरण नजर नहीं आई. अपनों की बेरुखी और तंगहाली ने उसे इस खौफनाक कदम की ओर धकेल दिया.

परिवार में दूरी भी बनी वजह?
श्यामवीर के पिता नेम सिंह के पास 12 बीघा जमीन थी, जिसे उन्होंने चारों बेटों में बांट दिया था. बावजूद इसके, परिवार में संवादहीनता थी. पिता ने भी माना कि पिछले चार महीनों से उनकी श्यामवीर से बात नहीं हुई थी. वहीं, ससुराल पक्ष का सीधा आरोप है कि श्यामवीर के पिता और भाइयों ने उसकी कभी मदद नहीं की, जिससे वह मानसिक रूप से टूट चुका था.

गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
रविवार की सुबह कासगंज में गमगीन माहौल के बीच पूरे परिवार का अंतिम संस्कार हुआ. पति श्यामवीर और पत्नी रामश्री को एक ही चिता पर मुखाग्नि दी गई. वहीं, मासूम बच्चों प्राची, आकांक्षा और गिरीश को परंपरा अनुसार दफनाया गया.
DIG प्रभाकर चौधरी और SP अंकिता शर्मा ने मौके का मुआयना किया. DIG ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला आर्थिक तंगी के कारण सामूहिक आत्महत्या का लग रहा है. शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही समय और कारणों की पुष्टि हो सकेगी.



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