Kundalini Awakening Symptoms: कभी अचानक शरीर में अजीब सी झनझनाहट हुई है? या ध्यान के दौरान लगा हो कि आप जमीन पर नहीं, हवा में तैर रहे हैं? पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर “कुंडलिनी जागरण” को लेकर चर्चाएं तेज़ हैं. कोई इसे आध्यात्मिक क्रांति कहता है, तो कोई इसे गहरे मनोवैज्ञानिक बदलाव की प्रक्रिया. लेकिन आखिर कुंडलिनी जागरण के लक्षण क्या हैं, और क्या ये अनुभव सचमुच इतने रहस्यमय होते हैं जितना बताया जाता है? भारत की प्राचीन योग परंपरा में कुंडलिनी को रीढ़ की हड्डी के मूल में स्थित सुप्त ऊर्जा माना गया है. जब यह ऊर्जा जागृत होती है, तो साधक के भीतर शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्तर पर तीव्र परिवर्तन देखे जा सकते हैं. कई लोग इसे जीवन बदल देने वाला अनुभव बताते हैं, तो कुछ इसे संभालना मुश्किल मानते हैं.
कुंडलिनी जागरण क्या है?
योग ग्रंथों में कुंडलिनी को सर्पाकार शक्ति कहा गया है, जो मूलाधार चक्र में कुंडली मारकर बैठी रहती है. ध्यान, प्राणायाम, मंत्र जप या गहन आध्यात्मिक साधना के माध्यम से इसे जागृत करने की बात कही जाती है. हालांकि आधुनिक मनोविज्ञान इस अनुभव को चेतना की परिवर्तित अवस्था (altered state of consciousness) के रूप में भी देखता है. यही कारण है कि इसके लक्षणों को समझना और संतुलित दृष्टि रखना बेहद ज़रूरी है.
शरीर में दिखने वाले लक्षण
रीढ़ में ऊर्जा का संचार
कई साधक बताते हैं कि उन्हें रीढ़ की हड्डी में कुछ रेंगता हुआ महसूस होता है. जैसे कोई हल्की विद्युत धारा ऊपर की ओर बढ़ रही हो. कुछ लोग इसे “बिजली के झटकों” जैसा अनुभव भी बताते हैं. शरीर में अचानक झनझनाहट, कंपन या चींटियों के काटने जैसी अनुभूति होना भी सामान्य रूप से बताया जाता है. यह अनुभव कभी ध्यान के दौरान, तो कभी सोते समय भी हो सकता है.
हल्कापन और तैरने का एहसास
कुछ लोगों को लगता है कि उनका शरीर बेहद हल्का हो गया है. जैसे वे जमीन से ऊपर उठ रहे हों. कई बार यह अनुभूति इतनी तीव्र होती है कि व्यक्ति चौंककर आंखें खोल लेता है. आंखों में लालिमा, पुतलियों का फैलना और चेहरे पर असामान्य चमक भी कई लोग नोटिस करते हैं.
भावनात्मक और मानसिक परिवर्तन
कामुकता और क्रोध में वृद्धि
ऊर्जा के अचानक उभार से व्यक्ति में अति कामुकता या क्रोध की भावना बढ़ सकती है. आध्यात्मिक परंपराएं इसे ऊर्जा के असंतुलित प्रवाह से जोड़ती हैं. यदि साधना संतुलित न हो, तो ये भावनाएं व्यक्ति को उलझन में डाल सकती हैं.
लोगों के भाव पढ़ने की क्षमता
कुछ साधक दावा करते हैं कि उन्हें दूसरों के छिपे हुए भाव साफ दिखाई देने लगते हैं. जैसे सामने वाला क्या सोच रहा है, इसका सहज अंदाज़ा होने लगे. इससे कई बार रिश्तों को लेकर मोहभंग की स्थिति भी बनती है. वैराग्य की भावना धीरे-धीरे बढ़ सकती है. व्यक्ति भीड़ में होते हुए भी भीतर से अलग-थलग महसूस कर सकता है.
क्या यह आध्यात्मिक जागरण है या मानसिक दबाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि हर असामान्य शारीरिक या मानसिक अनुभव को कुंडलिनी जागरण मान लेना ठीक नहीं. कई बार अत्यधिक ध्यान, नींद की कमी या भावनात्मक तनाव भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकते हैं.
दिल्ली के एक योग प्रशिक्षक बताते हैं कि बिना मार्गदर्शन के गहरी साधना करने से व्यक्ति भ्रमित हो सकता है. इसलिए संतुलन, संयम और अनुभवी गुरु का मार्गदर्शन अहम माना जाता है.
सावधानी क्यों ज़रूरी है?
कुंडलिनी जागरण को रोमांचक अनुभव की तरह पेश किया जाता है, लेकिन हर व्यक्ति का शरीर और मन अलग होता है. कुछ लोग इसे सहज रूप से संभाल लेते हैं, तो कुछ को मानसिक अस्थिरता तक महसूस हो सकती है. इसलिए यदि ध्यान या साधना के दौरान अत्यधिक बेचैनी, डर या असामान्य व्यवहार दिखे, तो आध्यात्मिक सलाह के साथ-साथ चिकित्सा परामर्श भी लेना चाहिए.
कुंडलिनी जागरण को समझने के लिए उत्साह ठीक है, लेकिन अंधविश्वास नहीं. आखिरकार, आत्मिक यात्रा भी उतनी ही संतुलित होनी चाहिए जितनी जीवन की बाकी राहें.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


