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Malla Raji Reddy Surrender: करीब पांच दशक तक नक्सल आंदोलन का अहम चेहरा रहे मल्ला राजी रेड्डी ने 50 माओवादी कैडरों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. सुरक्षा एजेंसियां इसे लाल आतंक के खिलाफ बड़ी सफलता मान रही हैं. लगातार ऑपरेशन और दबाव के बीच हुआ यह सरेंडर नक्सली संगठन की कमजोर होती पकड़ का संकेत माना जा रहा है. मल्ला राजी रेड्डी ने अपने 50 साथियों के साथ सरेंडर किया है.
तेलंगाना में माओवादी टॉप लीडर मल्ला राजी रेड्डी का सरेंडर. (फाइल फोटो)
TOI की रिपोर्ट के अनुसार यह सरेंडर तेलंगाना पुलिस के सामने हुआ और इसे संगठन के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है. लगातार दबाव, जंगलों में घेराबंदी और सीमावर्ती इलाकों में तेज ऑपरेशन ने हालात बदल दिए थे. सूत्रों के मुताबिक कई माओवादी नेता सुरक्षित ठिकाने तलाश रहे थे. ऐसे में यह आत्मसमर्पण संकेत दे रहा है कि नक्सली आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है और आने वाले समय में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
- बताया जा रहा है कि CPI (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य रहा रेड्डी लंबे समय से संगठन की रणनीतिक गतिविधियों से जुड़ा था. उसके साथ केंद्रीय कमेटी के नेता देवीजी ने भी हथियार डाल दिया. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह घटना संगठन के अंदर बढ़ती कमजोरी और नेतृत्व संकट का संकेत है. कई इलाकों में कैडर पहले ही टूट चुके हैं और अब शीर्ष नेतृत्व का झुकना बड़ा संदेश माना जा रहा है.
- सूत्रों के अनुसार रेड्डी पहले छत्तीसगढ़ के नेशनल पार्क इलाके में सक्रिय था. लेकिन लगातार ऑपरेशन के बाद वे तेलंगाना की ओर शिफ्ट हो गया. यहां सुरक्षा बलों की रणनीतिक घेराबंदी ने उन्हें विकल्पहीन बना दिया. संयुक्त अभियान में CRPF, CoBRA और डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड की अहम भूमिका रही. अधिकारियों का दावा है कि हाल के महीनों में नक्सलियों की गतिविधियां काफी कमजोर हुई हैं.
- सुरक्षा एजेंसियों ने लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाए.
- सीमावर्ती जंगलों में मूवमेंट पर कड़ी निगरानी रखी गई.
- सप्लाई और कम्युनिकेशन नेटवर्क को तोड़ा गया.
- स्थानीय स्तर पर आत्मसमर्पण नीति को मजबूत किया गया.
- वरिष्ठ नेतृत्व को अलग-थलग करने की रणनीति सफल रही.
सरेंडर के बाद क्या बदलेगा नक्सल समीकरण?
अधिकारियों का मानना है कि यह आत्मसमर्पण सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क के कमजोर पड़ने का संकेत है. जल्द ही औपचारिक घोषणा ए रेवंत रेड्डी या डीजीपी शिवधर रेड्डी की मौजूदगी में हैदराबाद में हो सकती है. सुरक्षा एजेंसियां अब बची हुई इकाइयों पर फोकस कर रही हैं.
मल्ला राजी रेड्डी का सरेंडर इतना बड़ा क्यों माना जा रहा है?
क्योंकि वह संगठन के शीर्ष नेतृत्व में शामिल था और कई दशकों से रणनीतिक फैसले लेता रहा है. उसका आत्मसमर्पण कैडर के मनोबल को सीधे प्रभावित करेगा. इससे निचले स्तर के माओवादी भी हथियार छोड़ने के लिए प्रेरित हो सकते हैं. सुरक्षा एजेंसियों को संगठन की अंदरूनी जानकारी मिलने की भी संभावना है.
क्या इससे नक्सल आंदोलन खत्म होने की ओर है?
पूरी तरह खत्म कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह निर्णायक चरण जरूर है. नेतृत्व कमजोर होने से संगठन की कमांड संरचना टूटती है. भर्ती, फंडिंग और ऑपरेशन क्षमता प्रभावित होती है. अगर इसी तरह सरेंडर जारी रहे तो आने वाले वर्षों में नक्सल गतिविधियां काफी सीमित हो सकती हैं.
आगे सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति क्या होगी?
अब फोकस बचे हुए सक्रिय जोनों पर रहेगा. इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन बढ़ेंगे. आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति को और मजबूत किया जाएगा. साथ ही स्थानीय विकास योजनाओं के जरिए नए भर्ती नेटवर्क को रोकने की कोशिश होगी.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें


