microplastic| microplastic effect on human| microplastic effect on brain| दिल्ली यमुना जल में माइक्रोप्लास्टिक के खतरे और स्वास्थ्य पर असर

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Microplastic effects on Humans: हाल ही में दिल्ली के यमुना जल और ग्राउंड वॉटर को लेकर आई टेरी की रिपोर्ट ने हलचल मचा दी है. इसमें बताया गया कि दिल्ली में यमुना के पानी, भूजल और बाढ़ क्षेत्र की मिट्टी में 13 तरह के माइक्रोप्लास्टिक के कण भारी मात्रा में मिले हैं. ऐसे में दिल्ली में पानी पी रहे लोग सिर्फ पानी नहीं बल्कि साथ में प्लास्टिक भी पी रहे हैं. हालांकि सबसे बड़ा सवाल ये है कि यह माइक्रोप्लास्टिक होती क्या है और यह शरीर में कैसे पहुंचती है. यह शरीर में पहुंचकर क्या-क्या नुकसान पहुंचाती है? इन सवालों के जवाब आइए आर्टिमिस अस्पताल में इंटर्नल मेडिसिन की यूनिट हेड डॉक्टर सीमा धीर से जानते हैं…

डॉ. सीमा धीर बताती हैं, ‘पानी की बोतल से लेकर पैकेज्ड फूड के अलावा रोजाना इस्तेमाल में आने वाली ऐसी सैकड़ों चीजें हैं जो प्लास्टिक से बनी होती हैं. समय के साथ-साथ यही प्लास्टिक छोटे-छोटे कणों में टूटकर माइक्रो प्लास्टिक बन जाते हैं और हमारे शरीर के अंदर पहुंच कर भारी नुकसान पहुंचाते हैं. माइक्रोप्लास्टिक के कण इतने छोटे होते हैं कि हमें दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन हवा, पानी और भोजन के माध्यम से हमारे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं जो की सेहत के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है.’

माइक्रोप्लास्टिक क्या होती है?
माइक्रोप्लास्टिक 5 मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक के कण होते हैं जो पानी में मिले रहते हैं और दिखाई भी नहीं देते. ये बहुत छोटे रेशे संभवत: घरों से निकलने वाला कपड़े धोने के पानी, घरों के कचरे, फैक्ट्रियों के गंदे पानी, पैकेजिंग सामग्री जैसे कई स्रोतों से और कपड़ा उद्योग से निकलने वाले कचरे में मौजूद होते हैं.

यह शरीर में कैसे पहुंचती है?
माइक्रोप्लास्टिक पानी के माध्यम से हमारे शरीर के अंदर पहुंचती है. चूंकि इसके बारीक रेशे पानी में घुले रहते हैं तो जब हम पानी पीते हैं तो ये कण भी हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं. इतना ही नहीं ये कण अपने साथ जहरीले रसायनों को भी चिपका कर शरीर के अंदर ले जाते हैं और भारी नुकसान पहुंचाते हैं.

माइक्रोप्लास्टिक के क्या नुकसान होते हैं?
डॉ. सीमा कहती हैं कि माइक्रोप्लास्टिक के शरीर में पहुंचने से बेहद गंभीर बीमारियां सामने आ सकती हैं. सबसे पहले माइक्रोप्लास्टिक शरीर में सूजन पैदा कर सकते हैं. जब यह कण शरीर में पहुंचते हैं,तो इम्यूनिटी इन्हें बाहरी तत्व समझकर प्रतिक्रिया देता है.जिससे टिश्यू को नुकसान हो सकता है. लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन कई पुरानी बीमारियों का कारण बन सकती है.

क्या इनफर्टिलिटी भी हो रही है?
माइक्रो प्लास्टिक में कुछ रसायन मौजूद होते हैं, जैसे बीपीए. यह कैमिकल हार्मोनल प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इससे थायराइड की समस्या, प्रजनन क्षमता में कमी और बच्चों के विकास पर बहुत ही खराब असर पड़ता है.

क्या हार्ट और कैंसर की बीमारी का भी खतरा?
माइक्रो प्लास्टिक जैसे विषैले तत्व हानिकारक सूक्ष्म जीवों को अपने साथ शरीर में ले जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है. हृदय रोग के बढ़ते जोखिम से भी इसका संबंध बताया गया है. कुछ स्टडीज कैंसर के लिए भी माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी को खतरा मानती हैं. हालांकि यह तो निश्चित है कि माइक्रो प्लास्टिक दिल और रक्त वाहिकाओं में रुकावट के खतरे को बढ़ा सकते हैं.

यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार लोगों से प्लास्टिक का इस्तेमाल कम से कम करने की सलाह देते हैं. उनकी सलाह है कि प्लास्टिक के बर्तनों में गर्म चीजों का उपभोग न करें.न ही पुराने प्लास्टिक के सामान को लंबे समय तक घर में रखें. प्लास्टिक भले ही टूटती हुई दिखाई नहीं देती, लेकिन उसमें से छोटे-छोटे कण झड़ते और पिघलते रहते हैं, जो हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं और फिर बेहद गंभीर परिणाम सामने आते हैं.



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