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Millets Benefits in Hindi : बढ़ती बीमारियों से परेशान मानव सभ्यता पारंपरिक खानपान की ओर लौट रही है. मोटा अनाज (मिलेट्स) लोगों की पंसद बन चुका है. कभी गांवों की थाली तक सीमित रहने वाले ज्वार, बाजरा और रागी शहरों के किचन और रेस्टोरेंट मेन्यू तक पहुंच चुके हैं. हालांकि कई लोग इसे ज्यादा खाने से घबराते हैं. लोकल 18 ने इस बारे में चित्रकूट के चिकित्सक डॉ. शेखर वैशय से बात की. डॉ. शेखर बताते हैं कि मिलेट्स खाने को कोई मौसम या समय नहीं है. मोटा अनाज सालभर खाया जा सकता है. ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो जैसे अनाज शरीर के लिए रामबाण हैं.
चित्रकूट. बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ती बीमारियों के बीच लोग फिर से पारंपरिक खानपान की ओर लौट रहे हैं. खासकर मोटा अनाज यानी मिलेट्स को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ी है. कभी गांवों की थाली तक सीमित रहने वाला ज्वार, बाजरा और रागी अब शहरों के किचन और रेस्टोरेंट मेन्यू तक पहुंच चुका है, लेकिन अब भी कई लोगों के मन में सवाल यही होता है कि इसका सेवन कब-कब करना चाहिए. क्योंकि कई लोग इसका सेवन इसलिए भी नहीं करते कि कहीं ज्यादा खाना हानिकारक न हो जाए.
इन रोगों में लाभदायक
मानिकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. शेखर वैशय ने लोकल 18 को बताया कि मिलेट्स का सेवन किसी खास मौसम या समय तक सीमित नहीं है. मोटा अनाज सालभर खाया जा सकता है. इसका कोई सीजन नहीं होता है. ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो जैसे अनाज शरीर के लिए बेहद फायदेमंद हैं. ये पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी मददगार साबित होते हैं. चित्रकूट के भी अब जिलाधिकारी की पहल से बाद किसानों को मोटे अनाज के प्रति जागरूक कर इसकी खेती करवाई जा रही है.
मोटापे से छुट्टी
डॉ. शेखर के मुताबिक, मिलेट्स में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती है. यही कारण है कि वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी यह एक बेहतर विकल्प माना जाता है. इनमें आयरन, कैल्शियम और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं. इस लिए अधिकतर सभी लोगों को मोटे अनाज का सेवन करते रहना चाहिए. इससे बीमारी का खतरा कम रहता है. लोग खुद को स्वास्थ्य महसूस करते हैं.
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