Non Marital Births Data: दुनिया तेजी से बदल रही है और उसके साथ बदल रही है रिश्तों की परिभाषा भी. कभी ऐसा समय था जब शादी को ही परिवार की नींव माना जाता था और बच्चे का जन्म सिर्फ विवाह के बाद ही स्वीकार्य समझा जाता था. लेकिन अब कई देशों में यह सोच बदल चुकी है. आज के दौर में लिव इन रिलेशन, पार्टनरशिप और बिना शादी साथ रहने को समाज के बड़े हिस्से ने स्वीकार करना शुरू कर दिया है. इसी बदलाव को दिखाता है यह अंतरराष्ट्रीय डेटा, जिसमें उन देशों की सूची सामने आई है जहां सबसे ज्यादा बच्चे शादी के बाहर पैदा हो रहे हैं.
यह आंकड़े केवल नंबर नहीं हैं, बल्कि यह समाज की बदलती सोच, परिवार के नए मॉडल और रिश्तों की नई दिशा की कहानी कहते हैं. कई जगह इसे सामाजिक आजादी माना जा रहा है, तो कहीं इसे पारंपरिक मूल्यों से दूर जाने का संकेत समझा जा रहा है.
इस रिपोर्ट के अनुसार कुछ देशों में तो आधे से भी ज्यादा बच्चे बिना शादी के जन्म ले रहे हैं. यह ट्रेंड बताता है कि परिवार की पारंपरिक संरचना के साथ साथ नए मॉडल भी तेजी से जगह बना रहे हैं. आइए जानते हैं इस सर्वे में कौन से देश सबसे ऊपर हैं और इसके पीछे की बड़ी वजह क्या मानी जा रही है.
लैटिन अमेरिका में सबसे ज्यादा प्रतिशत
सर्वे के मुताबिक कोलंबिया इस सूची में पहले स्थान पर है, जहां करीब 87 प्रतिशत बच्चे शादी के बाहर जन्म ले रहे हैं. इसके बाद चिली का स्थान है, जहां यह आंकड़ा लगभग 78 प्रतिशत है. कोस्टा रिका भी इस सूची में ऊपर है, जहां करीब 74 प्रतिशत बच्चे बिना शादी के पैदा हो रहे हैं.
मैक्सिको में यह आंकड़ा लगभग 73 प्रतिशत है. इन आंकड़ों से साफ है कि लैटिन अमेरिका के कई देशों में पारंपरिक विवाह से अलग परिवार मॉडल को समाज में व्यापक स्वीकृति मिल चुकी है. वहां बच्चों का जन्म केवल शादी से नहीं जोड़ा जाता, बल्कि रिश्ते की स्थिरता और जिम्मेदारी को ज्यादा अहम माना जाता है.
यूरोप के विकसित देशों में भी यही ट्रेंड
यूरोप के देशों की बात करें तो आइसलैंड में करीब 69 प्रतिशत बच्चे शादी के बाहर जन्म लेते हैं. नॉर्वे में यह आंकड़ा 61 प्रतिशत से ज्यादा है. बुल्गारिया, पुर्तगाल, फ्रांस और स्वीडन जैसे देशों में भी 57 से 60 प्रतिशत के बीच बच्चे बिना शादी के पैदा हो रहे हैं. इन देशों में लिव इन रिलेशन और सिविल पार्टनरशिप को कानूनी और सामाजिक मान्यता मिल चुकी है. वहां बच्चों के अधिकार शादी की स्थिति पर निर्भर नहीं होते, इसलिए ऐसे जन्म को सामान्य माना जाता है.
क्यों बदल रही है सोच
इस ट्रेंड को समझने के लिए सामाजिक पृष्ठभूमि पर नजर डालना जरूरी है. कई विकसित देशों में शादी अब सामाजिक दबाव का विषय नहीं रही. लोग पहले अपनी पढ़ाई, करियर और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता देते हैं. कई जोड़े लंबे समय तक साथ रहते हैं, बच्चे भी होते हैं, लेकिन वे शादी को जरूरी कदम नहीं मानते. वहां कानून भी ऐसे परिवारों को सुरक्षा देता है. यही वजह है कि बिना शादी बच्चे होना अब वहां असामान्य नहीं माना जाता.
सामाजिक स्वीकृति या पारंपरिक ढांचे में बदलाव
कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह आंकड़े सामाजिक खुलापन और समानता को दर्शाते हैं. वहीं कुछ लोग इसे पारिवारिक ढांचे में बड़े बदलाव का संकेत मानते हैं. कई देशों में सिंगल पैरेंट या साथ रहकर परिवार बनाने का चलन आम हो चुका है. वहां यह ज्यादा मायने रखता है कि बच्चे की परवरिश कैसी हो रही है, न कि माता पिता शादीशुदा हैं या नहीं.
भारत जैसे देशों में क्या स्थिति
भारत जैसे देशों में अब भी शादी को परिवार की बुनियाद माना जाता है. हालांकि शहरी इलाकों में सोच धीरे धीरे बदल रही है, लेकिन समाज का बड़ा हिस्सा अभी भी पारंपरिक विवाह व्यवस्था को ही प्राथमिकता देता है. ऐसे में यह आंकड़े भारत के लिए एक अलग तरह की सामाजिक चर्चा की ओर इशारा करते हैं.
बदलती दुनिया में परिवार का नया रूप
यह सर्वे एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है कि क्या आने वाले समय में परिवार की परिभाषा पूरी तरह बदल जाएगी. आज रिश्तों के कई रूप सामने आ रहे हैं. कहीं इसे आधुनिकता कहा जा रहा है, तो कहीं इसे परंपराओं से दूरी. लेकिन एक बात साफ है कि दुनिया में परिवार और रिश्तों का ढांचा तेजी से बदल रहा है और यह बदलाव आने वाले समय में और भी स्पष्ट नजर आ सकता है.


