People called it risky But Vaishali 10th passout shivam multimillion nursery business now providing employment

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Vaishali Shivam Success Story: वैशाली के शिवम ने 10वीं तक पढ़ाई के बाद नर्सरी व्यवसाय शुरूकरने की सोची. पर लोगों ने इसे जोखिम भरा सफर कहा. लेकिन लोगों की बातों को दरकिनार कर शिवम ने अपनी मेहतन, सोच और लगन से इसे लाखों का कारोबार में बदल दिया है. उनकी मेहनत और सोच ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा बनी है.

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प्रभात कुमार/वैशाली: कम पढ़ाई को अक्सर सफलता की राह में बाधा माना जाता है, लेकिन वैशाली जिले के युवा उद्यमी शिवम् ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. महज 10वीं तक पढ़ाई करने वाले शिवम ने खेती से जुड़े अपने अनुभव और मेहनत के दम पर नर्सरी व्यवसाय शुरू कर आज लाखों रुपये की सालाना कमाई कर रहे हैं. उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों और डिग्री के अभाव में अपने सपनों को छोड़ देते हैं. आइए जानते हैं उनकी सफल कहानी.

लोगों ने कहा जोखिम वाला सफर

शिवम एक साधारण किसान परिवार से आते हैं. पढ़ाई में आगे नहीं बढ़ पाने के कारण उन्होंने कम उम्र में ही कुछ अलग करने की ठान ली. गांव में खेती का माहौल देखकर उन्हें पौध उत्पादन यानी नर्सरी का विचार आया. शुरुआत में परिवार और आसपास के लोगों ने इसे जोखिम भरा कदम बताया, लेकिन शिवम ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने स्थानीय कृषि अधिकारियों, यूट्यूब और कृषि मेलों से जानकारी जुटाई और छोटे स्तर पर नर्सरी की शुरुआत की.

शुरुआत में शिवम ने फलदार और सजावटी पौधों पर ध्यान दिया. आम, लीची, अमरूद, पपीता के साथ-साथ गुलाब, गेंदा और अन्य फूलों के पौधे तैयार किए. धीरे-धीरे उनकी नर्सरी की पहचान आसपास के गांवों और प्रखंड तक फैलने लगी. किसानों के साथ-साथ घरों में बागवानी करने वाले लोग भी उनसे पौधे खरीदने आने लगे. आज शिवम् की नर्सरी में हजारों की संख्या में पौधे तैयार होते हैं.

पौधों की गुणवत्ता पर दिया विशेष ध्यान

आधुनिक तरीकों जैसे पॉलीबैग, ड्रिप सिंचाई और जैविक खाद का उपयोग कर वे पौधों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हैं. यही वजह है कि उनके पौधों की मांग लगातार बढ़ रही है. शिवम बताते हैं कि एक सीजन में ही उन्हें कई लाख रुपये की बिक्री हो जाती है, जबकि लागत अपेक्षाकृत कम रहती है. शिवम सिर्फ खुद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे गांव के अन्य युवाओं को भी इस व्यवसाय से जोड़ रहे हैं. उनकी नर्सरी में कई स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है.

डिग्री नहीं सोच और मेहतन मायने

वे युवाओं को संदेश देते हैं कि अगर सही योजना और मेहनत हो तो कम पढ़ाई के बावजूद भी बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है. शिवम की सफलता यह साबित करती है कि डिग्री से ज्यादा जरूरी सोच, मेहनत और सीखने की लगन है. उनकी कहानी ग्रामीण युवाओं के लिए एक मिसाल है कि खेती और उससे जुड़े व्यवसाय आज भी आत्मनिर्भर बनने का मजबूत जरिया बन सकते हैं.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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