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Jharkhand Air Ambulance Crash: रांची से दिल्ली जा रही एक प्राइवेट चार्टर एयर एंबुलेंस झारखंड के चतरा जिले में क्रैश हो गई. इस प्लेन की खासियत क्या है और भारत में ये प्लेन क्यों ज्यादा पॉपुलर है? इसकी टाइम टेबल क्या है?
रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस क्रैश कर गई. (फाइल फोटो)
Jharkhand Air Ambulance Crash: रांची से दिल्ली जा रही है एक प्राइवेट चार्टर एयर एंबुलेंस रास्ते में लापता होने के बाद क्रैश हो गई. शाम 7 बजे दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी. मौसम खराब होने की वजह से विमान का संपर्क टूट गया और रात 8:30 बजे तक दिल्ली पहुंचने वाली इस फ्लाइट का कोई सुराग नहीं मिला. बाद में खबर आई कि विमान झारखंड के चतरा जिले में सिमरिया के कथीयातु इलाके में क्रैश हो गया है. प्लेन में कुल 5 लोग सवार थे एक गंभीर मरीज, डॉक्टर, पैरामेडिक, पायलट और एक क्रू मेंबर. अभी तक क्रैश साइट पर रेस्क्यू टीम पहुंच चुकी है, लेकिन मौसम और इलाके की चुनौतीपूर्ण भौगोलिक स्थिति के कारण बचाव दल को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है.
हादसे की शिकार एयर एंबुलेंस Beechcraft King Air C90 मॉडल का विमान था. ये भारत में एयर एंबुलेंस सेवाओं के लिए सबसे लोकप्रिय छोटे ट्विन-इंजन प्लेन में से एक है. यह प्लेन तेज गति से उड़ान भर सकता है. छोटे एयरस्ट्रिप्स पर भी लैंड/टेकऑफ कर सकता है.
हादसे से पहले की तस्वीर.
क्या होता है चार्टर एयर एंबुलेंस?
चार्टर एयर एंबुलेंस एक ऐसा निजी विमान होता है जिसे विशेष रूप से गंभीर मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए ‘उड़ते हुए आईसीयू’ (Flying ICU) के रूप में तैयार किया जाता है. यह एक स्पेशल किराए पर ली गई हवाई सेवा है, जहां कोई भी व्यक्ति या कंपनी एक छोटे विमान को बुक करती है और उसे पूरी तरह मेडिकल इक्विपमेंट से लैस करके फ्लाइंग ICU बनाया जाता है. सामान्य कमर्शियल फ्लाइट्स से अलग, यह 24×7 उपलब्ध होती है, बिना किसी फिक्स्ड शेड्यूल के – बस इमरजेंसी कॉल पर तुरंत उड़ान भरती है.
हादसे के बाद टूटा प्लेन का हिस्सा जमीन पर बिखरा पड़ा है.
Beechcraft King Air C90: क्यों है यह खास?
इस हादसे में शामिल विमान Beechcraft King Air C90 एक ट्विन-टर्बोप्रॉप (दो इंजन वाला) विमान है. मेडिकल इवैक्युएशन (Medevac) के लिए इसे दुनिया भर में काफी पसंद किया जाता है. इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:-
- शॉर्ट रनवे क्षमता: यह छोटे रनवे वाले हवाई अड्डों से भी आसानी से उड़ान भर सकता है और लैंड कर सकता है.
- भरोसेमंद इंजन: इसके इंजन काफी विश्वसनीय माने जाते हैं, जो इसे लंबी दूरी की मेडिकल उड़ानों के लिए उपयुक्त बनाते हैं.
- पर्याप्त केबिन स्पेस: इसमें मरीज के स्ट्रेचर के साथ-साथ चिकित्सा उपकरणों और डॉक्टर/नर्स के बैठने के लिए पर्याप्त जगह होती है.
एयर एंबुलेंस की प्रमुख खासियतें-
- एडवांस मेडिकल सेटअप (Advance ICU Setup): यह विमान वेंटिलेटर, डीफिब्रिलेटर, ईसीजी मशीन, मॉनिटर और ऑक्सीजन सिलेंडर जैसे जीवन रक्षक उपकरणों से लैस होता है.
- विशेषज्ञ मेडिकल टीम: विमान में मरीज के साथ कम से कम एक अनुभवी डॉक्टर और एक पैरामेडिकल स्टाफ (नर्स) मौजूद रहता है जो उड़ान के दौरान मरीज की स्थिति पर नजर रखता है.
- बेड-टू-बेड ट्रांसफर: चार्टर सेवाएं अक्सर अस्पताल के बिस्तर से लेकर दूसरे शहर के अस्पताल के बिस्तर तक की जिम्मेदारी लेती हैं, जिसमें ग्राउंड एंबुलेंस भी शामिल होती है.
- एटीसी प्राथमिकता (ATC Priority): चूंकि यह एक इमरजेंसी सेवा है, इसलिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) इन विमानों को लैंडिंग और टेक-ऑफ के लिए प्राथमिकता देता है.
खराब मौसम का कहर?
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, शाम 7 बजे उड़ान भरने के बाद विमान को रात 8:30 बजे दिल्ली पहुँचना था. हालांकि, लातेहार और पलामू के बीच मौसम अचानक बिगड़ गया, जिसके कारण पायलट का संपर्क कंट्रोल रूम से टूट गया. घने जंगलों और पहाड़ी इलाका होने के कारण चतरा के सिमरिया में यह क्रैश हो गया.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें


