Saint community deeply concerned over FIR Against Swami Avimukteshwaranand Under POCSO Act controversy | स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर संत समाज बेहद चिंतित, सनातन धर्म पर संकट की जताई आशंका

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तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर कहा कि इसे जल्द खत्म करने के लिए दोनों पक्षों के बीच संवाद होना चाहिए. उन्होंने सभी से शांति और समझदारी से काम लेने की अपील की. उन्होंने कहा कि देखिए, साधु-संतों और ब्राह्मणों में आपसी विवाद नहीं, प्रेम होना चाहिए. ये लोग समाज के लिए मार्गदर्शन का स्रोत होते हैं, जिनसे पूरा समाज उम्मीद रखता है, लेकिन आज दुर्भाग्य से ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा कि ईसाई धर्म ने कई साल पहले कई देशों को एकजुट कर लिया. इसी तरह 1500 साल पहले पैगंबर मुहम्मद के नाम पर 58 देश इस्लाम में शामिल हो गए, लेकिन सनातन धर्म, जो अरबों साल पुराना है, वह आज धीरे-धीरे खत्म हो रहा है.

क्या कहा परमहंस आचार्य ने?
परमहंस आचार्य ने दुख जताते हुए कहा कि पूरी दुनिया में एक भी ऐसा देश नहीं बचा, जहां पर हिंदू या सनातन बहुसंख्यक हों. उन्होंने कहा कि हमारे भारत में हालात चिंताजनक हैं. समाज इतना भटक गया है कि अब गाय, ब्राह्मण और संतों को खत्म करने की कोशिश हो रही है. उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और आस्था ब्रह्मचारी एक-दूसरे से मिलें और इस मामले को खत्म करें. मुझे इससे बहुत दुख हुआ है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरकार विरोधी पार्टियों की कठपुतली बनकर रह गए हैं.

परमहंस आचार्य ने जताया दुख
परमहंस आचार्य ने गहरा दुख जताते हुए कहा कि अगर कोई गाय हत्या चाहता है, तो अखिलेश यादव जैसे नेता का साथ दे रहे हैं, लेकिन अखिलेश यादव ये नहीं कह सकते हैं कि वे गाय मारने के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि इससे उनका वोट खत्म होने लगेगा. उन्होंने कहा कि अगर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आज अखिलेश यादव और कांग्रेस के साथ हैं, तो उनसे कहें कि वे स्पष्ट रूप से गाय हत्या के खिलाफ हैं. अगर वे ऐसा कह दें, तो भाजपा सरकार गाय संरक्षण के लिए मजबूत कानून ला सकती है, लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि मैं जगतगुरु परमहंस आचार्य हूं. मेरा दुख इस बात का नहीं है कि अविमुक्तेश्वरानंद जेल जा सकते हैं. मेरा दुख इस बात का है कि आज हर संत को शक की नजर से देखा जाएगा. आपका आपसी झगड़ा और घमंड पूरे सनातन समाज को भारी नुकसान पहुंचाएगा.

क्या कहा महंत सीताराम दास ने?
महंत सीताराम दास ने कहा कि निश्चित रूप से प्रयागराज कोर्ट द्वारा पास्को एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत करने का आदेश दिया गया है. हम लोग न्यायालय को मानने वाले हैं. उसका फैसला हमारे लिए सर्वमान्य है, लेकिन जिस तरह से किसी धर्माचार्य पर इस तरह के इल्जाम लगाया जा रहा है, यह अत्यंत निंदनीय है. ऐसी गिरी हुई मानसिकता के लोगों द्वारा सनातन संस्कृति पर कुठाराघात किया जा रहा है. सनातन को मिटाने की बात की जा रही है और सनातनी इस प्रकार एक दूसरे पर आरोप लगाएं, तो अच्छी बात नहीं है. मैं सरकार से मांग करूंगा कि उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए. रिटायर जजों की नियुक्ति होनी चाहिए और अगर इसमें कोई दोषी है, तो उन पर कार्रवाई हो और निर्दोष हैं तो इस प्रकार आक्षेप लगाने वाले पर कार्रवाई हो.

क्या कहा महामंडलेश्वर कुलदीप दास ने?
महामंडलेश्वर कुलदीप दास ने कहा कि हम सभी लोग कोर्ट और संविधान को मानने वालों में से हैं. कोर्ट का जो भी फैसला आया है, वह सर्वमान्य है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर अगर केस सही है, तो इसकी जांच होनी चाहिए. अगर यह सही नहीं है, तो इसे खारिज करके फिर से जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने केस किया है, वे खुद हिस्ट्रीशीटर हैं. उन पर तो गाय की हत्या का भी केस दर्ज है. ऐसे लोग समाज को गंदा करते हैं और उसे बर्बाद करते हैं.

क्या कहा नरसिंह दास जी महाराज ने?
नरसिंह दास जी महाराज ने कहा कि देखिए, सनातनी हिंदू धर्म में साधु समाज के चरित्र का बहुत बड़ा महत्व है. इतिहास की वजह से ही साधु समाज इतिहास पर विश्वास करता है. उन्होंने कहा कि देखिए, साधु-संतों और ब्राह्मणों में आपसी विवाद नहीं, प्रेम होना चाहिए. ये लोग समाज के लिए मार्गदर्शन का स्रोत होते हैं, जिनसे पूरा समाज उम्मीद रखता है, लेकिन आज दुर्भाग्य से ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा कि ईसाई धर्म ने कई साल पहले कई देशों को एकजुट कर लिया. इसी तरह 1500 साल पहले पैगंबर मुहम्मद के नाम पर 58 देश इस्लाम में शामिल हो गए, लेकिन सनातन धर्म, जो अरबों साल पुराना है, वह आज धीरे-धीरे खत्म हो रहा है.



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