Sri Kalaram Temple Why idol of Lord Ram black temple Connection with Dalit movement Know History | यहां पर रावण ने किया था माता सीता का अपहरण, आखिर काली क्यों है रामजी की मूर्ति

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यहां पर रावण ने किया था माता सीता का अपहरण, आखिर काली क्यों है रामजी की मूर्ति

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Shree Kala Ram Mandir: आपने भगवान राम के मंदिरों के दर्शन किए होंगे लेकिन नासिक के पंचवटी क्षेत्र में प्रभु श्रीराम माता सीता और भाई लक्ष्मण का एक ऐसा मंदिर है, जिसकी मूर्तियां काली हैं और इन मूर्तियों को गोदावरी नदी से प्राप्त हुई थीं. आइए जानते हैं आखिल यहां पर भगवान राम का कालाराम क्यों कहते हैं, जानिए इस मंदिर के इतिहास के बारे में…

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Shree Kala Ram Mandir: भारत की पवित्र भूमि पर हजारों प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर मौजूद हैं, जो अपनी अद्भुत वास्तुकला, अनूठी परंपराओं और रहस्यमयी विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध हैं. उन्हीं में से एक महाराष्ट्र के नासिक के पंचवटी क्षेत्र में स्थित श्री कालाराम मंदिर है, जो प्रभु श्री राम को समर्पित है. श्री कालाराम एक प्राचीन हिंदू मंदिर है, जो काले पत्थरों से बना है. मंदिर की मूर्तियां अनूठे काले पत्थरों से बनी हैं. इसलिए इसे कालाराम कहा जाता है. मंदिर में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की काली प्रतिमाएं विराजमान हैं, जो गोदावरी नदी से प्राप्त हुई थीं. आइए जानते हैं भगवान राम के इस मंदिर के बारे में…

भगवान राम ने यहीं बिताया था वनवास का समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर का यह स्थान भगवान श्री राम के 14 वर्ष के वनवास काल से जुड़ा हुआ है. माना जाता है कि यह पंचवटी क्षेत्र में स्थित है, जहां भगवान राम ने पत्नी सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ अपने वनवास का समय बिताया था. पंचवटी नाम का अर्थ है पांच बरगद के पेड़ों की भूमि. माना जाता है कि यहीं पर भगवान राम ने अपनी कुटिया बनाई थी क्योंकि 5 बरगद के पेड़ होने की वजह से यह क्षेत्र बेहद शुभ था.

सपने में दिखी थीं मूर्तियां
श्री कालाराम मंदिर 1782 ईस्वी का बताया जाता है, जो 74 मीटर लंबा और 32 मीटर चौड़ा है. मंदिर के चारों दिशाओं में 4 दरवाजे हैं और महाद्वार से प्रवेश करने पर भव्य सभामंडप नजर आते हैं, जिसकी ऊंचाई 12 फीट है. बताया जाता है कि सरदार रंगारू ओढेकर नाम के शख्स के सपने में एक बार भगवान राम आए थे. सपने में उन्होंने काले रंग की मूर्तियों को तैरते देखा था. सुबह जब वह वहां पहुंचे तो सच में भगवान की मूर्तियां तैर रही थी. इसके बाद भगवान की मूर्तियों को मंदिर में रखा गया था.

मुख्य मंदिर में 14 सीढ़ियां
मुख्य मंदिर में 14 सीढ़ियां हैं, जो राम के 14 वर्ष के वनवास काल को दर्शाती हैं. मंदिर के चारों ओर 84 स्तंभ हैं, जो 84 लाख प्रजातियों के चक्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. यहां हनुमान जी की भी एक काली मूर्ति है, जो प्रभु श्री राम के चरणों की ओर देखती नजर आती है. मंदिर की खासियत है कि यहां रामनवमी, दशहरा और चैत्र पड़वा बहुत ही धूमधाम के साथ मनाए जाते हैं. इस समय देश-दुनिया से हजारों श्रद्धालु प्रभु के दर्शन और उत्सव का हिस्सा बनने के लिए आते हैं.

यहीं से शुरू हुए थे कई आंदोलन
श्री कालाराम मंदिर सिर्फ एक प्राचीन धार्मिक विरासत ही नहीं, इसका इतिहास और सामाजिक विद्रोह से भी जुड़ा है. यह 1930 में डॉ. भीम राव अंबेडकर के मंदिर प्रवेश आंदोलन का केंद्र रहा है. यहीं से डॉ. बीआर अंबेडकर ने दलितों के मंदिर में प्रवेश के लिए एक प्रमुख आंदोलन का नेतृत्व किया था, जिसके बाद दलितों को मंदिर में प्रवेश की इजाजत मिली.

About the Author

Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें





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