Bloating and Gas Causes: आजकल गैस की समस्या लोगों को काफी परेशान कर रही है. खाने के बाद अधिकतर लोगों को डकार आने लगती है और पेट फूलने लगता है. कई बार पेट में भारीपन, बेचैनी और सिर दर्द का सामना भी करना पड़ता है. कुछ लोगों को गैस बहुत ज्यादा बनती है और उन्हें बार-बार डॉक्टर के पास भागना पड़ता है. डॉक्टर्स की मानें तो पेट में गैस बनना एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है. औसतन हर व्यक्ति दिन में 10 से 20 बार गैस पास करता है और लगभग 0.5 से 1.5 लीटर गैस शरीर से बाहर निकलती है. असली समस्या तब शुरू होती है, जब गैस जरूरत से ज्यादा बनने लगे, आंतों में फंस जाए या आसानी से बाहर न निकल पाए. ऐसी स्थिति में पेट फूलना, भारीपन, ऐंठन, बेचैनी और सिरदर्द जैसी दिक्कतें होने लगती हैं.
नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के गैस्ट्रो डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. अनिल अरोड़ा ने News18 को बताया कि पेट और आंतों में गैस मुख्य रूप से दो कारणों से बनती है. पहला कारण निगली हुई हवा है. जब हम जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं, खाते समय बात करते हैं, च्यूइंग गम चबाते हैं या धूम्रपान करते हैं, तो हवा पेट में चली जाती है. यह हवा अक्सर डकार के रूप में बाहर निकलती है. दूसरा कारण आंतों में फर्मेंटेशन है. बड़ी आंत में मौजूद बैक्टीरिया कुछ कार्बोहाइड्रेट्स और फाइबर को पूरी तरह पचा नहीं पाते. ये पदार्थ फर्मेंट होकर हाइड्रोजन, मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें बनाते हैं. यही गैस फार्टिंग के रूप में बाहर निकलती है. जब आंतों की गति धीमी हो या कब्ज हो, तो गैस फंसने लगती है.
डॉक्टर ने बताया कि गैस अपने आपमें कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह पाचन तंत्र के असंतुलन का संकेत हो सकती है. कई बार यह इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) या छोटी आंत में बैक्टीरियल ओवरग्रोथ (SIBO) जैसी परेशानियों का शुरुआती लक्षण भी बन सकती है. इसलिए बार-बार होने वाली गैस को हल्के में नहीं लेना चाहिए. जब गैस हमारे शरीर से बाहर नहीं निकल पाती, तो वह आंतों की दीवारों पर दबाव डालती है. इससे पेट में सूजन और गुब्बारे जैसा फुलाव महसूस होता है. कई बार दर्द एक जगह से दूसरी जगह घूमता रहता है, जिसे कोलिकी पेन कहा जाता है. कुछ लोगों को मतली, उल्टी जैसा अहसास, छाती में जकड़न या सिरदर्द भी हो सकता है. लंबे समय तक गैस फंसी रहने से आंतों के बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ सकता है. इससे IBS, फंक्शनल डिस्पेप्सिया या क्रॉनिक कब्ज जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.
एक्सपर्ट के मुताबिक गैस बनने के पीछे गलत खान-पान और बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल सबसे ज्यादा जिम्मेदार है. ज्यादा मसालेदार, तला-भुना खाना, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, बीन्स, गोभी, ब्रोकोली और कुछ डेयरी प्रोडक्ट गैस बढ़ा सकते हैं. खासकर लैक्टोज इनटॉलरेंस हो, तो डेयरी प्रोडक्ट से यह समस्या बढ़ सकती है. स्ट्रेस, नींद की कमी, कम शारीरिक गतिविधि और लंबे समय तक खाली पेट रहना भी पाचन को प्रभावित करते हैं. कुछ मेडिकल कंडीशन जैसे कब्ज, हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण, सीलिएक डिजीज या SIBO भी गैस की समस्या को बढ़ा सकती हैं.
अगर गैस के साथ लगातार पेट दर्द, वजन कम होना, खून वाली मल, बार-बार उल्टी या निगलने में दिक्कत हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए. ये लक्षण किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं. समस्या बार-बार हो रही हो तो गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट से जांच कराएं. जरूरत पड़ने पर एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी या ब्रेथ टेस्ट जैसे टेस्ट किए जा सकते हैं. एक्सपर्ट ने बताया कि गैस से बचने के लिए खाना धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाएं. एक साथ बहुत ज्यादा खाने से बचें. फाइबर का सेवन धीरे-धीरे बढ़ाएं और पर्याप्त पानी पिएं. नियमित व्यायाम और योगासन पाचन सुधारने में मदद कर सकते हैं. घरेलू उपायों में अजवाइन, सौंफ, अदरक की चाय या गुनगुना पानी फायदेमंद हो सकता है. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से दवाएं ले सकते हैं.


