Success Story: लोन ने दिया नया जीवन, पहले ₹1 भी नहीं था…अब ये अनोखी साड़ी बनाकर लाखों कमाती हैं रांची की सुनीता

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Ranchi Success Story: झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली सुनीता लकड़ा 25 महिलाओं के साथ मार्शल प्राथमिक बुनकर सहयोग समिति समूह से जुड़ी हैं. वहां जुड़कर सुनीता कजरी कॉटन साड़ी बनाती हैं. इसके साथ ही रांची ही नहीं, देशभर में स्टॉल लगाती हैं. आज वह इससे तगड़ी कमाई कर रही हैं.

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली सुनीता लकड़ा बताती हैं कि एक समय था, जब घर की चार दिवारी में कैद थी और आर्थिक स्थिति भी बहुत ही ज्यादा खराब थी, लेकिन इसके बाद हम लोग एक स्वयं सहायता समूह से जुड़े. वहां से हमें लोन मिला और इसके बाद आज हम समूह में 25 महिलाएं हैं. पहले दूसरे महिलाओं को ऑफिस जाते देखकर मन में लगता था कि वही हाथ पर हमारे पास है तो हम क्यों नहीं कर सकते हैं. आज वह साड़ी बनाकर तगड़ी कमाई कर रही हैं. आइये जानते हैं कि वह कैसे साड़ियां बनाती हैं.

सुनीता ने बताया कि इसके बाद हमने साड़ी बनाने का काम शुरू किया. खास तौर पर कजरी कॉटन का साड़ी बनाना शुरू किया. क्योंकि इस साड़ी की गर्मी के दिनों में जबरदस्त डिमांड होती है. इसका वजन बहुत ज्यादा तो 50 ग्राम होता है. इस साड़ी की कीमत 2000 से शुरू होकर 20000 तक के रेट में बिक जाती है. इन शादियों में झारखंड का लोकल कलाकारी पूरी तरह हाथ से किया जाता है. जहां इस साड़ी में मशीन का कोई काम नहीं होता है.

वरदान से कम नहीं समूह

उन्होंने बताया कि हमारे समूह का नाम ‘मार्शल प्राथमिक बुनकर सहयोग समिति’ है. इसके तहत फिलहाल 25 महिलाएं हैं. हमें सरकार से लोन मिल जाते हैं. हमारे पास ₹1 भी पूंजी नहीं थी. यहां तो बिजनेस करना तो दूर की बात है. इसके बारे में सोचना भी गुनाह था, लेकिन समूह की वजह से लोन भी मिला और अब जब जरूरत पड़ने पर हम बीच में भी लोन उठा सकते हैं.

अब आलम यह है कि आराम से अच्छी खासी कमाई हो जाती है. पहले ₹1 तक पास में नहीं था. अब पूरा घर का राशन लाते हैं, बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हैं. कोई पर्व त्यौहार आ जाए तो टेंशन नहीं बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है. पहले तो पर्व के नाम से सर में दर्द हो जाती थी कि कैसे सब कुछ मैनेज होगा, लेकिन अब खुशी और उत्साह होती है.

देश के कोने कोने में लगाती हैं स्टॉल

सुनीता बताती हैं कि वह देश के कोने-कोने में अब स्टॉल लगाती हैं. सिर्फ रांची ही नहीं, धनबाद, हजारीबाग, दिल्ली, केरला, जयपुर, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ लगभग हर एक राज्य में मेले का आयोजन होता है, जिसमें सरकार के जरिए हमें स्टॉल मुफ्त में मिल जाता है. ऐसे में घूमना भी हो रहा है, काम भी और पैसे की कमाई भी हो रही है. आज उनके हाथ में अच्छा खासा हुनर भी आ गया है.



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