Success Story: ₹1000000 के लोन से बदल ली जिंदगी, नौकरी छोड़कर मणि ने शुरू किया ये बिजनेस, आज हैं सहरसा के सफल उद्यमी – Bihar News

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Saharsa Success Story: सहरसा के मणि कुमार ने मुख्यमंत्री अति पिछड़ा वर्ग उद्यमी योजना से 10 लाख रुपये लोन लेकर गेट-ग्रिल निर्माण यूनिट शुरू की. आज वह कई युवाओं को रोजगार भी दिए हुए हैं. इसके साथ ही सहरसा के एक सफल उद्यमी भी बन गए हैं.

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सहरसा: बिहार में सहरसा जिले के कहरा प्रखंड के निवासी मणि कुमार की कहानी संघर्ष, साहस और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी है. कभी रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में मजदूरी करने वाले मणि कुमार आज अपने जिले में सफल उद्यमी के रूप में पहचाने जाते हैं. उन्होंने न केवल खुद की आर्थिक स्थिति सुधारी, बल्कि कई स्थानीय युवाओं को भी रोजगार देकर गांव की अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा भर दी है.

पहले फैक्ट्री में थे मजदूर

मणि कुमार बताते हैं कि कुछ साल पहले तक वह दूसरे राज्य में एक गेट-ग्रिल निर्माण फैक्ट्री में मजदूर के रूप में काम करते थे. वहां दिन-भर मेहनत के बावजूद आय सीमित थी और परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो जाता था. यहां घर की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी. ऐसे में उन्होंने तय किया कि मजदूरी के बजाय खुद का काम शुरू करना चाहिए. ताकि स्थायी आय का स्रोत बन सके. इसी दौरान उन्हें बिहार सरकार के उद्योग विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री अति पिछड़ा वर्ग उद्यमी योजना की जानकारी मिली.

10 लाख लोन से शुरू किया था बिजनेस

यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता देती है. मणि कुमार ने तुरंत सहरसा लौटने का निर्णय लिया और जिला उद्योग केंद्र से संपर्क किया. उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर गेट-ग्रिल निर्माण यूनिट स्थापित करने की योजना विभाग के सामने रखी. उनकी योजना को स्वीकृति मिली और उन्हें लगभग 10 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया .लोन मिलने के बाद मणि कुमार ने सहरसा में गेट-ग्रिल निर्माण का छोटा कारखाना शुरू किया. शुरुआत में संसाधन सीमित थे, लेकिन उनके पास वर्षों का व्यावहारिक अनुभव और काम के प्रति ईमानदारी थी. उन्होंने गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया और ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए समय पर काम पूरा करना अपना नियम बनाया. धीरे-धीरे उनका काम बढ़ने लगा और ऑर्डर की संख्या भी बढ़ती गई. आज उनकी यूनिट सहरसा के साथ-साथ आसपास के कई जिलों में गेट और ग्रिल निर्माण की सेवाएं दे रही है.

मणि कुमार के उद्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार भी सृजित हुआ है. वर्तमान में उनके साथ 4 से 5 युवा नियमित रूप से काम कर रहे हैं. वे न केवल उन्हें काम सिखा रहे हैं. बल्कि स्थायी आय का अवसर भी दे रहे हैं. मणि कुमार बताते हैं कि आज वे स्वयं प्रतिमाह लगभग 35 से 40 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर लेते हैं. जो पहले की मजदूरी से कई गुना अधिक है. इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है. अब उनके बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ रहे हैं और घर की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं.

मणि कुमार सरकार की योजना और समय पर मिली सहायता को अपनी सफलता का मुख्य आधार मानते हैं. वे कहते हैं कि यदि सही जानकारी और अवसर मिले तो गांव के युवा भी उद्योग स्थापित कर सकते हैं और बाहर पलायन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उनकी कहानी यह संदेश देती है कि कौशल,आत्मविश्वास और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करके कोई भी व्यक्ति मजदूर से उद्यमी बन सकता है.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में लगभग 4 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटेंट राइटर…और पढ़ें



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