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Success Story Of Muzaffarpur Shobha Devi: मुजफ्फरपुर की शोभा देवी ने रसायनों को छोड़ जैविक खेती के जरिए आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखी है. महज 2000 रुपये से वर्मी कंपोस्ट का काम शुरू कर उन्होंने न सिर्फ अपनी माली हालत सुधारी, बल्कि आज 400 किसानों को जैविक खाद उपलब्ध कराकर मिट्टी और स्वास्थ्य दोनों की रक्षा कर रही हैं.
मुजफ्फरपुरः जहां आज रसायनों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से खेती की मिट्टी बंजर होती जा रही है. वहीं मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर प्रखंड अंतर्गत ठिकहा गांव की शोभा देवी एक नई उम्मीद बनकर उभरी हैं. जैविक खेती और वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) के क्षेत्र में शोभा देवी ने न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है, बल्कि वह सैकड़ों किसानों के लिए आय और स्वास्थ्य का आधार भी बन गई हैं.
कोरोना काल की चुनौतियों से निकला सफलता का रास्ता
शोभा देवी की यह यात्रा आसान नहीं थी. कोरोना काल के दौरान जब पूरे देश में आर्थिक संकट मंडरा रहा था और उनके परिवार की स्थिति भी कमजोर होने लगी. तब उन्होंने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भरता का रास्ता चुना. उन्होंने जीविका के एई प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षण लिया और आधुनिक खेती के गुर सीखे. शुरुआत में मशरूम उत्पादन के साथ प्रयोग करने के बाद, उनका मुख्य फोकस वर्मी कंपोस्ट यानी जैविक खाद के निर्माण पर टिक गया.
मात्र 2000 रुपये से की शुरुआत
शोभा देवी ने महज 2000 रुपये की लागत से जैविक खाद बनाने का काम शुरू किया था. उन्होंने गोबर, कृषि अपशिष्ट और केंचुओं की मदद से अपने घर पर ही वर्मी कंपोस्ट तैयार करना प्रारंभ किया. बीते तीन वर्षों में उनकी मेहनत रंग लाई है. आज उनका घर जैविक खाद निर्माण का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है. उनके द्वारा तैयार की गई खाद आज आसपास के कई गांवों के खेतों तक पहुंच रही है.
400 किसानों का भरोसा और मिट्टी की सुरक्षा
वर्तमान में शोभा देवी के साथ 400 से अधिक किसान सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं. ये किसान नियमित रूप से उनसे जैविक खाद खरीदते हैं. अनाज, सब्जी व बागवानी में इसका उपयोग कर रहे हैं. शोभा देवी बताती हैं कि जैविक खाद मिट्टी की नमी और जीवांश को लंबे समय तक बनाए रखती है. किसानों का अनुभव है कि रासायनिक खाद की तुलना में जैविक खाद के प्रयोग से खेती की लागत कम हुई है. फसलों की गुणवत्ता में सुधार आया है. रसायनों से मुक्त फसलें उगाने से उपभोक्ताओं और किसानों, दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह रहा है.
ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा
शोभा देवी की इस पहल ने ग्रामीण क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाया है. आज उनके गांव और आसपास की कई महिलाएं भी जैविक खाद निर्माण की ओर आकर्षित हो रही हैं. शोभा देवी न केवल उन्हें प्रेरित कर रही हैं, बल्कि प्रशिक्षण देकर उन्हें भी आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रही हैं. उनका मानना है कि जैविक खेती ही टिकाऊ खेती का भविष्य है. वह इसे गांव-गांव तक पहुंचाने के मिशन पर हैं.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें


