The threat of aphids increases as wheat ears emerge. Spray this medicine on time to ensure production is not reduced.

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wheat farming-tips : लखीमपुर खीरी में गेहूं की फसल पर फरवरी के महीने में माहू और तेला जैसे कीटों का प्रकोप बढ़ रहा है. समय पर देखभाल न करने पर 30 से 40 प्रतिशत तक उत्पादन घट सकता है. कृषि विशेषज्ञों और किसानों की सलाह है कि हल्की सिंचाई और उचित कीटनाशक छिड़काव से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है.

लखीमपुर खीरी : उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान बड़े पैमाने पर गेहूं की खेती कर रहे हैं. यह फसल कम लागत में अच्छा मुनाफा देती है, लेकिन फरवरी के महीने में विशेष देखभाल की जरूरत होती है. इस समय माहू और तेला जैसे कीट फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे उत्पादन घटने का खतरा बढ़ जाता है. फरवरी का महीना गेहूं की फसल के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है. इस समय फसल में बाली निकलने की प्रक्रिया शुरू होती है. तापमान में उतार-चढ़ाव और नमी के कारण माहू और तेला जैसे रस चूसक कीट तेजी से फैलते हैं. ये कीट पत्तियों का रस चूसकर पौधों को कमजोर कर देते हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है.

30 से 40 प्रतिशत तक हो सकता है नुकसान
किसान राजेंद्र सिंह बताते हैं कि वे कई वर्षों से गेहूं की खेती कर रहे हैं और वर्तमान में 14 एकड़ में फसल खड़ी है. उनका कहना है कि सही देखभाल से एक एकड़ में 20 से 25 कुंतल तक उत्पादन आसानी से लिया जा सकता है. लेकिन माहू और तेला का प्रकोप होने पर 30 से 40 प्रतिशत तक नुकसान संभव है. ऐसे में समय रहते कीटनाशकों का छिड़काव जरूरी हो जाता है.

इन दवाओं का करें उपयोग
किसानों को सलाह दी गई है कि Thiamethoxam 30% FS या AZOXYSTROBIN 11% + TEBUCONAZOLE 18.3% SC जैसी दवाओं का उपयोग किया जा सकता है. एक एकड़ खेत के लिए लगभग 200 लीटर पानी में दवा मिलाकर छिड़काव करना चाहिए. इससे कीटों और रोगों का प्रकोप कम होता है और फसल स्वस्थ बनी रहती है.

सिंचाई में भी रखें सावधानी
कृषि वैज्ञानिक डॉ सुहेल के अनुसार फरवरी में सिंचाई हल्की मात्रा में करनी चाहिए. अधिक पानी देने से फसल को नुकसान हो सकता है और कीटों का प्रकोप भी बढ़ सकता है. मौसम के अनुसार संतुलित सिंचाई और समय पर दवा का प्रयोग उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है.

मौसम में बदलाव का असर
इस वर्ष मौसम में पहले से परिवर्तन देखने को मिला है. तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण कीटों की संख्या बढ़ी है. ऐसे में किसानों को नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करना चाहिए. पत्तियों पर कीट दिखते ही तुरंत नियंत्रण के उपाय अपनाने चाहिए, ताकि फसल सुरक्षित रह सके.

जागरूकता से बढ़ेगा उत्पादन
जानकारी के अभाव में कई बार किसान समय पर उचित कदम नहीं उठा पाते हैं, जिससे उत्पादन घट जाता है. यदि फरवरी में सही देखभाल, हल्की सिंचाई और कीटनाशक का संतुलित प्रयोग किया जाए तो गेहूं की फसल से अच्छा मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है. जागरूकता और सतर्कता ही बेहतर पैदावार की कुंजी है.



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