जूतों के डिब्बे लेकर स्टेशन पर सोने वाला लड़का बना अरबपति, नाइकी-एडिडास तक के माथे पर आया पसीना

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साल 2021 में जब टोक्यो ओलंपिक का मंच सजा था और पूरी दुनिया की नजरें खिलाड़ियों और मेडल्स की टैली पर टिकी थीं, उसी समय खेल के मैदान से दूर, कॉर्पोरेट जगत के बंद कमरों में एक ऐसी हलचल मची थी जिसने खेल के सामान बेचने वाली सदियों पुरानी कंपनियों की नींद उड़ा दी. उस साल चीन की एक कंपनी ‘अंटा स्पोर्ट्स’ (Anta Sports) के वित्तीय आंकड़े सामने आए, तो एडिडास जैसी दिग्गज कंपनी के माथे पर पसीना आ गया. अंटा स्पोर्ट्स की मार्केट वैल्यू 60 अरब डॉलर के पार निकल गई थी, जिसने इसे दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी स्पोर्ट्स कंपनी बना दिया. लोग हैरान थे कि जिस नाइकी और एडिडास का दशकों से एकछत्र राज था, उसे चुनौती देने वाला यह नया खिलाड़ी आखिर आया कहां से, वो है कौन? इस कंपनी के पीछे एक ऐसा लड़का था, जिसने गरीबी से निकलकर पूरी दुनिया के खेल बाजार पर कब्जा करने का सपना देखा और उसे सच कर दिखाया.

इस साम्राज्य की जड़ें चीन के फुजिआन प्रांत के एक छोटे से शहर जिन्जियांग की तंग गलियों में छिपी हैं. वहां एक लड़का रहता था- डिंग शिज़ोंग (Ding Shizhong). उसी लड़ने के अरबों डॉलर की कंपनी खड़ी की है. Ding Shizhong की नेटवर्थ की बात करें तो ब्लूमबर्ग की बिलेनियर लिस्ट के मुताबिक, डिंग फिलहाल दुनिया के 447वें अमीर व्यक्ति हैं. उनकी नेटवर्थ करीब 8.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर है. रुपयों में 7,63,90,52,40,000 (76 हजार करोड़ से ज्यादा) है. फिलहाल वे 56 साल के हैं. उन्होंने ये कारनामा कैसे किया, यह जानना बहुत दिलचस्प है.

बीच में छोड़ दी पढ़ाई, बन गए सेल्समैन

डिंग शिज़ोंग का परिवार इतना गरीब था कि दो वक्त का खाना जुटाना भी किसी चुनौती से कम नहीं था. घर के हालात देखते हुए डिंग ने स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी. 17 साल की वह उम्र, जब बच्चे कॉलेज और करियर के सपने देखते हैं, डिंग ने अपने पिता से कुछ पैसे उधार लिए और जूतों के कारोबार में उतरने का फैसला किया.

1980 के दशक में जिन्जियांग को ‘जूतों की राजधानी’ कहा जाता था, क्योंकि वहां सैकड़ों छोटी-छोटी फैक्ट्रियां थीं जो विदेशी ब्रांड्स के लिए जूते बनाने का मजदूरी वाला काम करती थीं. डिंग ने एक सेल्समैन के तौर पर अपना सफर शुरू किया. वह जूतों के भारी डिब्बे कंधे पर लादकर बीजिंग की सड़कों के चक्कर काटता था, ताकि कोई दुकानदार उसके जूतों को अपनी दुकान में जगह दे दे. कई रातें उन्होंने रेलवे स्टेशन के ठंडे फर्श पर गुजारीं और दिन भर जूतों के सैंपल लेकर भटकते रहे.

अपना ब्रांड बनाने की कहानी

उस वक्त डिंग के पास न तो कोई आलीशान ऑफिस था और न ही कोई बड़ी टीम. उन्होंने गौर किया कि चीन की ज्यादातर कंपनियां सिर्फ विदेशी ब्रांड्स के लिए ‘लेबर’ का काम कर रही हैं. वे मेहनत से जूते बनाती थीं, उन पर विदेशी ठप्पा लगता था और वे महंगे दामों पर बिकते थे. डिंग को समझ आ गया कि अगर वाकई बड़ा बनना है, तो अपनी पहचान यानी अपना ‘ब्रांड’ बनाना होगा. इसी सोच के साथ 1991 में उन्होंने अपने परिवार के साथ मिलकर ‘अंटा’ की नींव रखी. ‘अंटा’ का मतलब था- सुरक्षित कदम बढ़ाना. शुरुआत बहुत कठिन थी, क्योंकि बाजार में पहले से ही जमे-जमाए दिग्गजों का शोर था और अंटा को कोई पहचानने वाला नहीं था.

खेला ऐसा दांव, जिसने बना दिया काम

डिंग ने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा जुआ 1999 में खेला. उस समय अंटा के पास बहुत ज्यादा बजट नहीं था, लेकिन डिंग ने कंपनी के मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा मशहूर टेबल टेनिस खिलाड़ी कोंग लिंगहुई को ब्रांड एंबेसडर बनाने और टीवी विज्ञापनों पर लुटा दिया. इस काम के लिए उन्हें काफी आलोचना झेलनी पड़ी, लेकिन वहीं दांव मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ. देखते ही देखते अंटा का नाम चीन के हर घर की जुबान पर चढ़ गया.

अंटा की असली ताकत तब दुनिया के सामने आई जब 2008 के बीजिंग ओलंपिक ने उन्हें वैश्विक मंच दिया. लेकिन डिंग का विजन चीन की दीवारों तक सीमित नहीं था. उन्होंने एक ऐसी रणनीति अपनाई जिसने प्यूमा (Puma) जैसे स्थापित ब्रांड्स को भी पीछे छोड़ना शुरू कर दिया.

फिला के चीनी ऑपरेशंस को खरीद मचाया तहलका

साल 2009 में डिंग ने इटली के मशहूर लेकिन उस वक्त घाटे में चल रहे ब्रांड फिला (FILA) के चीनी ऑपरेशंस को खरीद लिया. उन्होंने फिला को एक साधारण स्पोर्ट्स ब्रांड के बजाय ‘फैशन और स्पोर्ट्स’ का एक प्रीमियम मेल बना दिया. जूतों की कीमतें बढ़ाई गईं और उन्हें आलीशान मॉल्स में बेचा जाने लगा. यह आइडिया इतना कामयाब रहा कि फिला अंटा के लिए मुनाफे की मशीन बन गया. इसके बाद डिंग ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 2019 में उन्होंने फिनलैंड की कंपनी ‘आमेर स्पोर्ट्स’ को करीब 5 अरब डॉलर में खरीदकर दुनिया को चौंका दिया. इस एक सौदे ने विल्सन, सालोमन और आर्कटेरिक्स जैसे हाई-एंड ब्रांड्स अंटा की झोली में डाल दिए. डिंग की रणनीति साफ थी- आम लोगों के लिए सस्ता अंटा और अमीरों के लिए फिला और विल्सन.

डिंग शिज़ोंग की कहानी में विवादों ने भी दस्तक दी. कपास (Cotton) के मुद्दे और चीन-पश्चिम के तनाव के बीच अंटा को बहिष्कार का सामना करना पड़ा. लेकिन डिंग विचलित होने वालों में से नहीं थे. उन्होंने अपना पूरा ध्यान सप्लाई चेन और तकनीक पर लगा दिया. उन्होंने रिसर्च और डिजाइन पर इतना पैसा खर्च किया कि उनके उत्पाद नाइकी और एडिडास को टक्कर देने लगे. आज अंटा के पास हजारों स्टोर्स का नेटवर्क है. डिंग, जो कभी जूतों के डिब्बे लेकर स्टेशन पर सोते थे, आज चीन के सबसे अमीर इंसानों में से एक हैं.

प्यूमा में भी सबसे बड़ा हिस्सेदार

अंटा की सफलता का सबसे बड़ा राज यह रहा कि उन्होंने खुद को कभी एक साधारण फैक्ट्री मालिक नहीं समझा. उन्होंने ‘ब्रांड वैल्यू’ की ताकत को पहचाना. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. जनवरी 2026 में डिंग ने वह कर दिखाया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी. अंटा स्पोर्ट्स ने जर्मनी के दिग्गज ब्रांड प्यूमा (Puma) में करीब 29% हिस्सेदारी खरीदकर सबको हैरान कर दिया. 1.5 अरब यूरो के इस सौदे के साथ अंटा अब प्यूमा का सबसे बड़ा शेयरहोल्डर बन गया है. जिस प्यूमा को कभी अंटा का प्रतिद्वंदी माना जाता था, अब उसकी कमान डिंग शिज़ोंग के हाथों के करीब है. आज अंटा सिर्फ एक चीनी कंपनी नहीं, बल्कि एक ऐसा ग्लोबल पावरहाउस है जो पश्चिमी कंपनियों के दशकों पुराने एकाधिकार को सीधे चुनौती दे रहा है.



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