आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा को ताजमहल की वजह से अलग ही पहचान मिलती है. ताजमहल की खूबसूरती को देख हर कोई उसका कायल हो जाता है. ताजमहल को देखने के लिए हजारों लोग आगरा आते हैं. ताजमहल का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की याद में साल 1632-1653 के बीच आगरा में यमुना किनारे करवाया था.
मुमताज के साल 1631 में निधन के बाद उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए, 20,000 से अधिक कारीगरों ने 22 वर्षों में इस सफेद संगमरमर के मकबरे को बनाया, जो अब विश्व के सात अजूबों में शामिल है. ताजमहल निर्माण के दौरान उस समय कारीगरों ने हर एक बारीकियों का विशेष ध्यान रखा था. उस समय बिजली नहीं होती थी और गर्मी के दिनों में ताजमहल को ठंडा कैसे रखा जाए, इसके लिए भी योजना बनाई गई थी.
कारीगरों के पास कुशलता
आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार ने बताया कि ताजमहल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि उसके अंदर चारों तरफ से प्राकतिक ठंडी हवाएं आए. उन्होंने कहा कि ताजमहल में ऐसे रोशनदान बने हुए हैं, जो दिन में उजाला और हर वक्त हवा अंदर लाने का कार्य करते हैं. इतिहासकार ने कहा कि उस जमाने में कारीगरों के पास वह कुशलता थी, जो आज शायद ही किसी कारीगर के पास हो.
रोशनदान हवा और उजाले का करते हैं कार्य
आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार अनुराग पालीवाल ने बताया कि ताजमहल को बनाने के लिए हर बारीकियों का ख्याल रखा गया था. उन्होंने कहा कि ताजमहल में बने रोशनदान एक साथ दो काम करते हैं. उन्होंने कहा कि रोशनदान रोशनी का तो कार्य करते ही हैं, साथ में वह स्वच्छ और ठंडी हवाओं को अंदर भेजने का कार्य भी करते हैं.
उन्होंने कहा कि ज़ब ताजमहल का निर्माण हुआ था, तब बिजली नहीं थी. इसलिए कारीगरों ने ऐसे रोशनदान बनाए, जो दिन में बिजली का कार्य करे, जो अद्धभुत है. उन्होंने कहा कि जितनी भी पुरानी मुगलकालीन इमारत है, उन सब में इसी तरह से कारीगरी की गई है कि हवा सीधे अंदर आए. उन्होंने कहा कि ये उस समय की इंजीनियरिंग है, ज़ब इंसना पढ़ा-लिखा नहीं हुआ करता था, जो आज सबको चौंकाने पर मजबूर करता है.
बेहद विशाल और मजबूत बनाया गया ताजमहल
आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार प्रोफेसर अनुराग पालीवाल ने बताया कि ताजमहल को बेहद मजबूत और विशाल जगह पर बनाया गया है. उन्होंने कहा कि इसे बनाने में 22 साल लग गए, तो इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से इसका निर्माण किया गया होगा. इतिहासकार ने कहा कि ताजमहल लगभग 17 हेक्टेयर (42 एकड़) के क्षेत्र में फैला हुआ है. यह भव्य परिसर यमुना नदी के किनारे स्थित है और इसमें सफेद संगमरमर का मुख्य मकबरा, मस्जिद, अतिथि गृह और औपचारिक उद्यान शामिल हैं.
28 प्रकार के कीमती और अर्ध-कीमती रत्न
उन्होंने कहा कि ताजमहल में बने उद्यान शुद्ध वातावरण और स्वछ हवाओं को प्रदान करते हैं. इतिहासकार ने बताया कि ताजमहल निर्माण के लिए बादशाह ने मुख्य रूप से राजस्थान के मकराना की खदानों से मंगाया गया, सफेद संगमरमर इस्तेमाल कराया था. इस शानदार इमारत में दुनियाभर से लाए गए 28 प्रकार के कीमती और अर्ध-कीमती रत्नों की पच्चीकारी (Pietra Dura) की गई है. इतिहासकार ने कहा कि आधार के लिए फतेहपुर सीकरी का लाल बलुआ पत्थर भी ताजमहल निर्माण में उपयोग किया गया था.


