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लंदन में कानपुर की रितु जाला ने महाशिवरात्रि के बाद 250 से अधिक कश्मीरी पंडितों को एकत्रित कर पारंपरिक महाप्रसाद का आयोजन किया. इस समारोह में भारत की संस्कृति, स्वाद और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिला, जिससे विदेश में बसे परिवारों को अपने घर और कश्मीर की यादें ताजा हुई.
महाशिवरात्रि के बाद लंदन में बसे कश्मीरी पंडितों के बीच आस्था और अपनापन का एक अनोखा संगम देखने को मिला है. कानपुर के काकादेव की रहने वाली रितु जाला पिछले 10 वर्षों से खास परंपरा को निभा रही है. इस बार उन्होंने करीब ढाई सौ कश्मीरी पंडित एक जगह इकट्ठा किया और महाशिवरात्रि के बाद जो महाप्रसाद का खास आयोजन होता है, उसको आयोजित किया. जिसमें भारत की अनोखी परंपरा और संस्कृति देखने को मिली.
आपको बता दें कानपुर की रहने वाली रितु अपने पति इंजीनियर निवेश के साथ पिछले 10 सालों से लंदन में रह रही है. लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी परंपराओं से दूरी नहीं बनाई हर साल महाशिवरात्रि के बाद वह वहां रह रहे कश्मीरी परिवारों को एकजुट करती है और सामूहिक भोज का आयोजन करती है. उनका मानना है कि यह त्यौहार सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं होते. बल्कि यह एक दूसरे से मिलने और रिश्तों को मजबूत करने का भी अवसर देते हैं.
कश्मीरी पंडितों के लिए महाशिवरात्रि एक महापर्व के तरीके से मनाया जाता है, कश्मीर में इस दिन शिव मंदिरों को खास तौर पर सजाया जाता है और घर-घर में पूजा होती है. एक दिन पहले जल में स्थापना कर उसमें अखरोट भिगोए जाते हैं शिवरात्रि के दिन उसी जल को घर में छिड़कर अखरोट प्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं. लंदन में हुए इस आयोजन में भी इन सभी परंपराओं को पूरी श्रद्धा के साथ निभाया गया. लोगों को ऐसा लगा कि वह अपने घर में है अपने देश में है और अपनी कश्मीर की गलियों में लौट आए हैं. कानपुर की बेटी ने यह दिखाया है कि अपनी संस्कृति को हम कहीं पर भी रहे जिंदा रख सकते हैं.
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