ब्रेस्ट कैंसर होने पर पूरा स्तन ही काटकर अलग निकाल दिया जाना मरीजों के लिए काफी दुखदायी होता था, हालांकि अब ऐसी-ऐसी तकनीकें आ गई हैं, जिनके बलबूते न केवल कैंसर को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है, बल्कि अब पूरे ब्रेस्ट को हटाने की जरूरत भी नहीं पड़ती है. दिल्ली के सीके बिरला अस्पताल ने हाल ही में ऐसी 50 ब्रेस्ट कैंसर मरीजों की सफल सर्जरी की है, जिनके पूरे ब्रेस्ट नहीं काटने पड़े, बल्कि सिर्फ कैंसर को ही काटकर उनके ब्रेस्ट से अलग निकाला गया.
अस्पताल ने ये सभी सर्जरी रोबोट की मदद से 50 सफल स्तन कैंसर सर्जरी पूरी की हैं और अब यह उत्तर भारत का ऐसा पहला प्रमुख अस्पताल बन गया है, जहां यह खास और एडवांस तकनीक उपलब्ध है.
इस बारे में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा ने बताया कि रोबोटिक तकनीक से की गई सर्जरी अस्पताल की इस सोच को दिखाती है कि इलाज सिर्फ बीमारी का नहीं, बल्कि मरीज के पूरे अनुभव का होना चाहिए. ताकि इलाज के बाद उसका मनोबल भी मजबूत रहे.
कैसे होती है रोबोटिक सर्जरी?
डॉ. सिंह कहते हैं कि रोबोट से की जाने वाली यह सर्जरी आज के समय में स्तन कैंसर के इलाज की सबसे आधुनिक तकनीकों में से एक है. इसमें बहुत छोटे और छिपे हुए चीरे लगाए जाते हैं, जिससे कैंसर को सुरक्षित तरीके से निकाला जाता है और साथ ही स्तन की बनावट भी काफी हद तक सुरक्षित रहती है. इससे मरीज जल्दी ठीक होती हैं और मानसिक रूप से भी ज्यादा मजबूत महसूस करती हैं.
हाल के समय में, 30 साल से लेकर 70 साल की उम्र तक की कई महिलाओं ने इस तकनीक का फायदा उठाया है. कई मरीज सामान्य सर्जरी के मुकाबले कम दर्द और कम तनाव के साथ जल्दी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में वापस लौट पाई हैं.
उन्होंने आगे कहा, ’50 रोबोट-सहायता प्राप्त सर्जरी पूरी करना हमारे लिए बहुत अहम कदम है। हमारा मकसद सिर्फ कैंसर हटाना नहीं है, बल्कि महिलाओं का आत्मविश्वास और उनकी गरिमा भी बनाए रखना है . रोबोटिक सर्जरी से हम बहुत सटीक तरीके से कैंसर निकाल पाते हैं, वो भी कम और छिपे हुए चीरे के साथ. जब हम मरीजों को स्वस्थ होकर फिर से आत्मविश्वास के साथ जीवन जीते देखते हैं, तो हमें और बेहतर काम करने की प्रेरणा मिलती है.’
उन्होंने यह भी बताया कि यह तकनीक खासतौर पर उन मरीजों के लिए फायदेमंद है जिन्हें निप्पल-स्पैरिंग या स्किन-स्पैरिंग सर्जरी की जरूरत होती है. रोबोट की मदद से सर्जरी ज्यादा सटीक होती है और शरीर की प्राकृतिक बनावट को भी काफी हद तक बचाया जा सकता है.
वहीं अस्पताल के वाइस-प्रेसिडेंट अमित शर्मा ने कहा, ‘हमारा प्रयास है कि बेहतरीन इलाज के साथ संवेदनशील देखभाल भी दी जाए. अब अस्पताल का लक्ष्य है कि वह इस क्षेत्र में एक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बने और देशभर के डॉक्टरों को इस तकनीक का प्रशिक्षण भी दे, ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को इसका लाभ मिल सके.’


