हल्दी या सोना! बेहद खास है ये प्रजाति, 8 महीने में 30 लाख से ज्यादा मुनाफा, बंपर पैदावारfits in just 8 months, boasting bumper production, and many specialties… – Himachal Pradesh News

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बलिया: आप एक किसान हैं और कम लागत और ज्यादा मुनाफे का रास्ता ढूंढ रहे हैं, तो हल्दी की खेती आपको मालामाल बना सकती हैं. जरा रूकिए साहब! प्रजाति का का अंतर है, कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खासकर नरेंद्र 01 प्रजाति को बलिया की मिट्टी के लिए बेहद उपयुक्त माना जा रहा है. हालांकि, यह सेहत के लिए भी लाभकारी मसाला है, लेकिन बाजार में हमेशा मिलावट का डर होता हैं, तो आप इसे बड़े आसानी से खेत के अलावा, गमले और गार्डन में भी उगा सकते हैं. इसकी सबसे बड़ी पहचान इसकी तेज और ताजी खुशबू है, जो खेत के आसपास का माहौल भी सुगंधित बना देती है. इस प्रजाति के हल्दी की खेती भी बड़े आसानी के साथ संपन्न किया जा सकता है.

एक एकड़ में 300 कुंतल का होगा उत्पादन

श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के HOD प्रो. अशोक कुमार सिंह के अनुसार, इस तरह सही देखभाल के साथ हल्दी का एक एकड़ में 250 से 300 क्विंटल तक उत्पादन पाया जा सकता है. अगर बाजार में न्यूनतम कीमत ₹150 प्रति किलो मानी जाए, तो एक एकड़ में लगभग 33 लाख 75 हजार रुपए तक का शानदार मुनाफा कमाया जा सकता है. हल्दी की खेती न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाती हैं, बल्कि आम जनता को शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण मसाला भी उपलब्ध कराती हैं.

इस प्रजाति से होती ही बंपर पैदावार

आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय फैजाबाद में हुए शोध में नरेंद्र 01 प्रजाति सामने आया है, जो बंपर पैदावार देने में बहुत सक्षम है. इसकी खूब मोटी गांठे बनती हैं. हालांकि , अच्छी हल्दी के लिए उपजाऊ मिट्टी, सही बीज, पर्याप्त पोषक तत्व और समय-समय पर देखभाल करने की जरूरत पड़ती है. हल्दी न केवल एक मसाला है, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर खेती है. इसकी डिमांड हर घर और बाजार में सालों साल रहती है.

एक बिस्वा खेत में लगभग 25 से 30 किलो बीज पर्याप्त होता है. बुवाई करते समय बीजों के बीच 1 फुट और पंक्तियों के बीच करीब 20 सेंटीमीटर की दूरी रखें. हां 20 से 25 दिन बाद 1.5 किलो डीएपी को 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने और हल्की गुड़ाई करने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है. खरपतवार नियंत्रण और नमी पर जरूर ध्यान देना चाहिए.

सात महीने में तैयार होगी फसल

उन्होंने आगे कहा कि, अगर किसान अभी से खेत की तैयारी शुरू कर दें, तो अगले महीने से बुवाई आसानी से की जा सकती है. हल्दी की फसल लगभग 7 से 8 महीने में ही तैयार हो जाती है. इसके बीज के लिए किसान बलिया के चर्चित टीडी कॉलेज के कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं. बुवाई के समय कंद को छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में गोबर या जैविक खाद मिलाना चाहिए. खाद की कमी हो, तो पेड़-पौधों की पत्तियां मिट्टी में मिलाकर छोड़ दें, यह खुद सड़कर खाद बन जाएगी.



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