बलिया: आप एक किसान हैं और कम लागत और ज्यादा मुनाफे का रास्ता ढूंढ रहे हैं, तो हल्दी की खेती आपको मालामाल बना सकती हैं. जरा रूकिए साहब! प्रजाति का का अंतर है, कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खासकर नरेंद्र 01 प्रजाति को बलिया की मिट्टी के लिए बेहद उपयुक्त माना जा रहा है. हालांकि, यह सेहत के लिए भी लाभकारी मसाला है, लेकिन बाजार में हमेशा मिलावट का डर होता हैं, तो आप इसे बड़े आसानी से खेत के अलावा, गमले और गार्डन में भी उगा सकते हैं. इसकी सबसे बड़ी पहचान इसकी तेज और ताजी खुशबू है, जो खेत के आसपास का माहौल भी सुगंधित बना देती है. इस प्रजाति के हल्दी की खेती भी बड़े आसानी के साथ संपन्न किया जा सकता है.
एक एकड़ में 300 कुंतल का होगा उत्पादन
इस प्रजाति से होती ही बंपर पैदावार
एक बिस्वा खेत में लगभग 25 से 30 किलो बीज पर्याप्त होता है. बुवाई करते समय बीजों के बीच 1 फुट और पंक्तियों के बीच करीब 20 सेंटीमीटर की दूरी रखें. हां 20 से 25 दिन बाद 1.5 किलो डीएपी को 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने और हल्की गुड़ाई करने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है. खरपतवार नियंत्रण और नमी पर जरूर ध्यान देना चाहिए.
सात महीने में तैयार होगी फसल
उन्होंने आगे कहा कि, अगर किसान अभी से खेत की तैयारी शुरू कर दें, तो अगले महीने से बुवाई आसानी से की जा सकती है. हल्दी की फसल लगभग 7 से 8 महीने में ही तैयार हो जाती है. इसके बीज के लिए किसान बलिया के चर्चित टीडी कॉलेज के कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं. बुवाई के समय कंद को छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में गोबर या जैविक खाद मिलाना चाहिए. खाद की कमी हो, तो पेड़-पौधों की पत्तियां मिट्टी में मिलाकर छोड़ दें, यह खुद सड़कर खाद बन जाएगी.


