Last Updated:
How to make Khasta Mawa Gujiya at Home: जोधपुर में होली के अवसर पर घर-घर मावा गुजिया बनाने का दौर शुरू हो गया है. खस्ता गुजिया के लिए घी का मोयन और धीमी आंच पर भुना मावा मुख्य टिप्स हैं. पारंपरिक रूप से बनाई जाने वाली यह मिठाई न केवल स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि परिवार को एक सूत्र में बांधने का माध्यम भी बन रही है.
जोधपुर. होली का त्योहार नजदीक आते ही सूर्यनगरी जोधपुर में घर-घर रसोई की रौनक बढ़ गई है. बाजारों में मावा, सूखे मेवे और घी की खरीदारी तेज हो गई है, तो वहीं महिलाएं पारंपरिक मिठाइयों की तैयारी में जुट गई हैं. खासकर मावा वाली गुजिया को लेकर लोगों में अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है. बच्चे हों या बड़े, सभी की पहली पसंद यही पारंपरिक मिठाई है, जो होली के त्योहार की मिठास को और बढ़ा देती है. मारवाड़ क्षेत्र में होली पर गुजिया बनाने की परंपरा वर्षों पुरानी मानी जाती है. त्योहार से एक-दो सप्ताह पहले ही घरों में महिलाएं एक साथ बैठकर गुजिया बनाती हैं, जिससे परिवार में उत्साह और अपनापन भी बढ़ता है.
स्वादिष्ट और कुरकुरी मावा गुजिया तैयार करने के लिए कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी है. सबसे पहले मैदा में घी का पर्याप्त ‘मोयन’ मिलाएं, ताकि गुजिया की बाहरी परत खस्ता बने. मावा यानी खोया को हमेशा धीमी आंच पर हल्का सुनहरा होने तक भूनें और इसे पूरी तरह ठंडा होने के बाद ही इसमें पिसी चीनी, इलायची पाउडर और बारीक कटे मेवे मिलाएं. गुजिया के सांचे में भरावन भरते समय किनारों पर हल्का पानी लगाकर उन्हें अच्छी तरह बंद करें, ताकि तलते वक्त वे तेल में खुलें नहीं. तलने के लिए घी या तेल मध्यम गर्म होना चाहिए, जिससे गुजिया अंदर तक अच्छी तरह पककर सुनहरी हो सके.
परंपरा और शुद्धता का संगम
जोधपुर में इस साल बाजार की रेडिमेड मिठाई के बजाय घर की बनी मावा गुजिया का क्रेज काफी बढ़ा है. ज्यादातर परिवार शुद्धता के कारण घर पर ही गुजिया बना रहे हैं, जिससे परंपरा भी जीवंत है और स्वाद भी बना हुआ है. कई परिवारों में यह मिठाई सबसे पहले भगवान को भोग स्वरूप अर्पित की जाती है और उसके बाद ही मेहमानों को परोसी जाती है. मावा को धीमी आंच पर भूनकर और मेवों के साथ तैयार किया गया यह खास भरावन त्योहार की खुशी को दोगुना कर देता है.
साथ मिलकर मनाने का त्योहार
होली केवल रंगों का ही नहीं, बल्कि आपसी मिलन का भी त्योहार है. गुजिया बनाने की प्रक्रिया में परिवार के सभी सदस्य हाथ बंटाते हैं, जिससे रिश्तों में मिठास बढ़ती है. इन आसान टिप्स और पारंपरिक विधि के साथ इस होली पर घर में बनी गुजिया का स्वाद हर किसी का दिल जीत लेगा. जोधपुर की गलियों में उठ रही मावा और इलायची की खुशबू ने पूरे शहर को त्योहार के रंग में सराबोर कर दिया है.
About the Author
Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें


