11 मार्च का दिन क्यों है स्पेशल, गुरु मार्गी, शीतला अष्टमी समेत बन रहे हैं 5 शुभ संयोग, जानें शुभ और अशुभ मुहूर्त

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11 मार्च का दिन क्यों है स्पेशल, शीतला अष्टमी समेत बन रहे हैं 5 शुभ संयोग

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11 मार्च का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है. इस दिन कई महत्वपूर्ण व्रत और ज्योतिषीय संयोग एक साथ बन रहे हैं. बुधवार को गुरु ग्रह के मार्गी होने के साथ-साथ मासिक कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, बुधवार व्रत और शीतला अष्टमी का भी विशेष संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे दुर्लभ योग में पूजा-पाठ और व्रत करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं इस दिन का महत्व…

11 March Astrology Special: 11 मार्च बुधवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है. इस दिन एक या दो नहीं बल्कि पांच-पांच शुभ संयोग बन रहे हैं, जो ज्योतिष लिहाज से भी बेहद खास है. बुधवार व्रत के साथ इस दिन शीतला अष्टमी (बासोड़ा), गुरु मार्गी, कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व और व्रत किया जाएगा. ये दिन भक्तों के लिए पूजा, व्रत और आध्यात्मिक साधना का विशेष अवसर लेकर आ रहा है. एक ही तिथि पर अलग-अलग देवी-देवताओं की आराधना करने से परिवार में सुख-शांति, स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है. साथ ही ग्रह-नक्षत्रों का शुभ प्रभाव भी प्राप्त होता है. आइए जानते हैं आखिर 11 दिन ज्योतिष लिहाज से क्यों है स्पेशल…

शीतला अष्टमी या बासोड़ा पूजा होली के बाद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है. इस दिन माता शीतला की पूजा की जाती है, जो संक्रामक रोगों और चर्म रोगों से रक्षा करने वाली देवी मानी जाती हैं. पूजा में बासी (ठंडा या पुराना) भोजन चढ़ाने का विधान है, इसलिए इसे बासोड़ा भी कहते हैं. भक्त इस दिन देवी से परिवार के स्वास्थ्य की कामना करते हैं.

हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कालाष्टमी मनाई जाती है. यह दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की पूजा के लिए समर्पित होता है. भक्त इस दिन व्रत रखकर काल भैरव की पूजा करते हैं और उनसे भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की प्रार्थना करते हैं. माना जाता है कि कालाष्टमी के दिन श्रद्धा से पूजा-अर्चना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. भगवान कालभैरव समय के स्वामी, न्याय के रक्षक और भय-शत्रु के नाशक माने जाते हैं.

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बुधवार को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत भी किया जा रहा है. यह प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है. यह भाद्रपद मास की वार्षिक जन्माष्टमी से अलग है. इस व्रत का मुख्य उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण का निरंतर स्मरण, उनकी लीलाओं का चिंतन और सेवा में लीन रहना है. भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और मंदिरों में दर्शन करते हैं.

बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है. इस दिन कई श्रद्धालु व्रत रखकर विघ्नहर्ता गणपति की पूजा कर व्रत रखते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार बुधवार का व्रत करने से बुद्धि, व्यापार और कार्यों में सफलता मिलती है तथा जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं. साथ ही कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है, जिससे नौकरी व कारोबार में लाभ मिलता है.

ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह को ज्ञान, धर्म, शिक्षा और समृद्धि का कारक माना जाता है. गुरु 11 मार्च को मिथुन राशि में मार्गी यानी सीधी चाल चलने वाले हैं और 13 दिसंबर तक इसी अवस्था में रहने वाले भी हैं. नवग्रहों में गुरु को शुभ ग्रह का दर्जा प्राप्त है, ऐसे में गुरु की जब स्थिति बदलती है तब इसका देश-दुनिया पर भी पड़ता है. इस दिन गुरु ग्रह की पूजा और भगवान विष्णु की आराधना करना शुभ माना जाता है.

चैत्र माह, कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 11 मार्च को है. इस दिन सूर्योदय 6 बजकर 36 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 27 मिनट पर होगा. शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 58 मिनट से 5 बजकर 47 मिनट तक अमृत काल दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से 1 बजकर 55 मिनट तक है. विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 17 मिनट तक है. वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 25 मिनट से 6 बजकर 49 मिनट तक है.

अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से 2 बजे तक है. यमगंड सुबह 8 बजकर 5 मिनट से 9 बजकर 33 मिनट तक है. गुलिक काल सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक और दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक है.

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