भारत तालिबान इजरायल गठजोड़: जयशंकर का ये वीडियो अपने भी देखा क्‍या? PIB ने बताया पूरी तरह फर्जी

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नई दिल्ली. क्या आपने भी सोशल मीडिया पर वह वीडियो देखा है जिसमें भारत, तालिबान और इजरायल के बीच एक हैरान करने वाले गठबंधन का दावा किया जा रहा है? विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के चेहरे और आवाज का इस्तेमाल कर बनाए गए इस वीडियो ने इंटरनेट पर खलबली मचा दी है. लेकिन ठहरिए! इससे पहले कि आप इस पर यकीन करें, पीआईबी (PIB) फैक्ट चेक की इस चेतावनी को जरूर पढ़ लें. जांच में सामने आया है कि यह कोई आधिकारिक बयान नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए तैयार किया गया एक खतरनाक ‘डीपफेक’ है. पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा तंत्र द्वारा फैलाया गया यह सफेद झूठ न केवल भारत की विदेश नीति को निशाना बना रहा है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुमराह करने की एक सोची-समझी साजिश है.

झूठ फैलाने में ISPR का हाथ
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और भारतीय सेना प्रमुख को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर खतरनाक ‘डीपफेक’ वीडियो फैलाए जा रहे हैं. पीआईबी (PIB) फैक्ट चेक ने इन वीडियो को पूरी तरह फर्जी और एआई-जनरेटेड करार देते हुए जनता को आगाह किया है. जांच में सामने आया है कि इन भ्रामक वीडियो के पीछे पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी ISI के दुष्प्रचार तंत्र ISPR का हाथ है जिसका मकसद भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुँचाना है.

विदेश मंत्री के नाम पर फैलाया गया सफेद झूठ
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एआई (AI) तकनीक के जरिए विदेश मंत्री जयशंकर की आवाज और चेहरे से छेड़छाड़ की गई है. इस वीडियो में उन्हें यह कहते हुए दिखाया गया कि “भारत मुस्लिम देशों द्वारा इजरायल को परेशान करना बर्दाश्त नहीं करेगा” और “भारत के कहने पर इजरायल ने तालिबान को 3 बिलियन डॉलर दिए हैं.”

पीआईबी ने स्पष्ट किया है कि मूल वीडियो में विदेश मंत्री इराक की यात्रा न करने की सलाह दे रहे थे और वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षा पर चर्चा कर रहे थे. डीपफेक वीडियो में इस्तेमाल किए गए शब्द पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और इनका उद्देश्य भारत के अरब देशों के साथ संबंधों में खटास पैदा करना है.

सेना प्रमुख और युद्धपोत की लोकेशन का फर्जी दावा
एक अन्य फर्जी वीडियो में रायसीना वार्ता के दौरान दिए गए सेना प्रमुख के भाषण की फुटेज का इस्तेमाल किया गया है. इसमें दावा किया गया कि भारत ने ईरान के युद्धपोत ‘आईआरआईएस डेना’ (IRIS Dena) की सटीक लोकेशन इजरायल के साथ साझा की है. आधिकारिक सूत्रों ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे पाकिस्तान के ‘इंटर सर्विसेस पब्लिक रिलेशन’ (ISPR) की साजिश बताया है.

पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा के 5 बड़े झूठ
·         एआई का दुरुपयोग: पाकिस्तान से संचालित अकाउंट्स एआई का उपयोग कर भारतीय नेताओं और सैन्य अधिकारियों के वीडियो एडिट कर रहे हैं.

·         मुस्लिम देशों को भड़काने की कोशिश: वीडियो में जयशंकर के नाम पर मुस्लिम विरोधी बयान दर्ज किए गए हैं, ताकि मिडिल ईस्ट में भारत की साख गिरे.

·         तालिबान और फंड का झूठा दावा: इजरायल द्वारा तालिबान को 3 बिलियन डॉलर देने की बात पूरी तरह निराधार है.

·         ईरान-भारत संबंधों पर वार: ईरानी युद्धपोत की लोकेशन लीक करने का फर्जी दावा कर भारत और ईरान के पुराने रिश्तों में दरार डालने की कोशिश की गई है.

·         सोशल मीडिया पर चेतावनी: पीआईबी ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे प्रोपेगेंडा अकाउंट्स से सावधान रहें और बिना जांचे कोई भी संवेदनशील वीडियो साझा न करें.

क्यों खतरनाक है यह डिजिटल हमला?
मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में, जहां ईरान और इजरायल के बीच युद्ध जैसे हालात हैं, ऐसे फर्जी वीडियो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलतफहमी पैदा कर सकते हैं. पाकिस्तान का यह डिजिटल इकोसिस्टम लगातार भारतीय नेतृत्व के बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है. विदेश मंत्रालय और पीआईबी की मुस्तैदी ने समय रहते इस बड़े झूठ का पर्दाफाश कर दिया है.

सवाल-जवाब

विदेश मंत्री जयशंकर के वायरल वीडियो की सच्चाई क्या है?

यह एक एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो है. मूल वीडियो में वह इराक यात्रा की एडवाइजरी पर बात कर रहे थे, न कि इजरायल-तालिबान सौदे पर.

इन फर्जी वीडियो के पीछे किसका हाथ बताया जा रहा है?

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन वीडियो को पाकिस्तान के ISPR (इंटर सर्विसेस पब्लिक रिलेशन) से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा फैलाया गया है.

ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस डेना’ को लेकर क्या दावा किया गया?

फर्जी वीडियो में दावा किया गया कि भारत ने इस जहाज की लोकेशन इजरायल को दी है, जिसे सरकार ने पूरी तरह निराधार और झूठ बताया है.

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