इजरायल-ईरान युद्ध से पटना में हाहाकार, गैस की किल्लत से छात्र बेहाल, जानिए कैसे हैं हालात

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LPG Gas Problem: पटना के छात्रों ने लोकल 18 से अपनी परेशानी साझा करते हुए कहा कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो परेशानी और बढ़ सकती है. कुछ छात्र पहले ही गांव लौट चुके हैं, जबकि कई अन्य भी आने वाले दिनों में घर वापस जाने की योजना बना रहे हैं.

पटना: इजरायल-ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब राजधानी पटना में भी देखने को मिल रहा है. घरेलू उपयोग वाले एलपीजी सिलेंडर के लिए नंबर लगाने में काफी परेशानी हो रही है. वहीं, कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति पूरी तरह से बंद हो गई है. इसका सबसे ज्यादा असर उन छात्रों पर पड़ रहा है, जो बिहार के अलग-अलग जिलों से आकर पटना में रहकर पढ़ाई करते हैं. इन छात्रों के पास आमतौर पर एक स्टोव का चूल्हा और तीन से चार लीटर की छोटी गैस टंकी होती है. वे खुदरा में गैस खरीदकर उसी से खाना बनाते हैं. लेकिन मौजूदा हालात में गैस की कीमत अचानक बढ़ गई है. पहले जो गैस लगभग 80 रुपये प्रति किलो मिलती थी, वह अब करीब 200 से 300 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है.

आने वाले दिनों में घर वापस जाने की योजना
इतना ही नहीं, दुकानदार एक बार में आधा किलो या उससे भी कम गैस ही दे रहे हैं. दूसरी ओर, जो छात्र हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें भी खाने-पीने की परेशानी झेलनी पड़ रही है. कई हॉस्टल संचालकों ने पहले की तरह चार टाइम की जगह अब सिर्फ दो टाइम ही भोजन दे रहे हैं. वहीं, छात्रों ने लोकल 18 से अपनी परेशानी साझा करते हुए कहा कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो परेशानी और बढ़ सकती है. कुछ छात्र पहले ही गांव लौट चुके हैं, जबकि कई अन्य भी आने वाले दिनों में घर वापस जाने की योजना बना रहे हैं.

खुदरा में मिल रहा है 300 रूपये किलो 
पटना में रहकर जनरल कॉम्पिटिशन की तैयारी कर रहे सतीश कुमार ने बताया कि आज सुबह जब मैं गैस लेने के लिए नहर पर गए तो कीमत सुनकर हैरान रह गया. खुदरा में एक किलो गैस की कीमत 300 रुपये बताई जा रही थी. उसमें भी दुकानदार सिर्फ आधा किलो गैस ही दे रहा था. उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में खुदरा गैस की कीमत करीब 80 से 90 रुपये प्रति किलो होती है. लेकिन अचानक बढ़ी कीमतों के कारण हमलोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई दोस्त तो हॉस्टल खाली कर अपने गांव की ओर लौट भी चुके हैं. सतीश कुमार ने कहा कि अब उन्हें भी यही डर सता रहा है कि अगर स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो एक-दो दिनों के भीतर उन्हें भी पढ़ाई छोड़कर गांव लौटना पड़ सकता है.

लॉकडाउन जैसी हो जाएगी स्थिति 
राजगीर के रहने वाले बबलू कुमार पटना में रूम लेकर रहते हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. उन्होंने कहा कि अभी मेरे पास दो से तीन दिनों का गैस बचा हुआ है लेकिन कई लोग यह बता रहे हैं की कीमत काफी बढ़ गई है. इतना महंगा गैस खरीदने का बजट नहीं है. कोचिंग और हॉस्टल का फीस भी जैसे तैसे दे पाता हूं. ऐसे में इतना महंगा गैस कहां से खरीद पाऊंगा. बिना खाना खाए भी रहना मुश्किल है. इसीलिए अब घर जाना ही बेहतर ऑप्शन लग रहा है. जिस तरह से लॉकडाउन में सभी लोग घर चले गए थे, अब लगता है कि एक बार फिर से वैसी स्थिति बन सकती है.

चार टाइम की जगह मात्र दो टाइम का मिल रहा खाना 
कुम्हरार और बाजार समिति में हरिओम बॉयज हॉस्टल के संचालक गोलू कुमार बताते हैं कि गैस की कीमत से काफी परेशानी हो रही है. मजबूरन हमलोग बच्चों के खाने में कटौती कर रहे हैं. पहले जहां हम लोग नाश्ता मिलाकर चार टाइम का भोजन बच्चों को देते थे लेकिन अब मात्र दो टाइम का ही खाना दे पा रहे हैं. स्थिति ऐसी है कि बाजार में गैस मिल नहीं रहा है. कई लोग ब्लैक में खरीद रहे हैं लेकिन कीमत काफी ज्यादा है. ऐसे में बच्चे अब गांव की ओर लौट रहे हैं. कोचिंग खुला हुआ है इसलिए जो बच्चे पढ़ना चाहते हैं वह हॉस्टल में हैं, तो खाना देना मजबूरी है. जब तक हम लोगों से बनेगा हम लोग बच्चों को खाना देंगे. लेकिन एक समय ऐसा आएगा कि खाना भी बंद करने की नौबत आ सकती है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें

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