pairo me khujli| pairo me dard| pairo me jhanjhanahat| poor blood circulation signs in feet| pairo me khoon ki kami ke sanket| पैरों में खून की कमी के संकेत क्‍या हैं

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Poor Blood Circulation signs in Feet: आप स्वस्थ हैं या नहीं, इसकी जानकारी चाहते हैं तो अपने पैरों को एक बार गौर से देखिए. आपके पैरों की सुंदरता आपको इसका जवाब दे देगी. अगर पैरों पर कुछ अलग संकेत दिखाई दे रहे हैं, तो समझ जाएं कि कुछ तो गड़बड़ है. ध्यान रखने वाली बात है कि ये लक्षण सिर्फ बीमारी तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि अगर परेशानी बढ़ी तो आपका पैर काटना तक पड़ सकता है. यह आपके शरीर में खराब ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ा मामला है, जिसमें पैरों की खून की कमी हो जाती है. आइए जानते हैं इसके बारे में..

डॉ. दिग्विजय शर्मा, एसोसिएट डायरेक्टर, वैस्कुलर सर्जरी एंड इंटरवेंशंस, सीके बिरला अस्पताल नई दिल्ली, बताते हैं कि खराब रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन) एक ऐसी समस्या है जो धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआत में अक्सर लोगों को समझ में ही नहीं आती. इसके लक्षण इतने हल्के होते हैं कि कभी-कभी ही दिखते हैं. अक्सर लोग उन्हें थकान, उम्र बढ़ने या ज्यादा देर खड़े रहने का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर आप इन छोटे-छोटे संकेतों को समझना शुरू कर दें तो बहुत बड़ी परेशानियों से बच सकते हैं.

यह स्थिति पेरिफेरल आर्टेरियल डिजीज (PAD) कहलाती है. इसमें पैरों की धमनियां संकरी हो जाती हैं, जिससे ऑक्सीजन वाला खून पर्याप्त मात्रा में मांसपेशियों तक नहीं पहुंच पाता.

कौन से 6 संकेत देते हैं चेतावनी

  1. . अगर कुछ दूर चलने के बाद पैरों में दर्द होने लगे और फिर आराम करने पर अपने आप ठीक हो जाए तो यह खराब ब्लड सर्कुलेशन का संकेत है. अक्सर लोग इसे सामान्य मांसपेशियों की थकान समझ लेते हैं, लेकिन यह पैरों में खून की कमी का संकेत हो सकता है.
  2. . पैरों या तलवों में बार-बार सुन्नपन या झनझनाहट होना भी एक संकेत है. कभी-कभार सुन्नपन सामान्य है लेकिन बार-बार होना बताता है कि नसों और ऊतकों को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पा रहा.
  3. . पैरों, टखनों या तलवों में सूजन आना और ठीक भी हो जाना एक और बड़ा संकेत है.जब नसें ठीक से काम नहीं करतीं, तो खून पैरों में जमा होने लगता है और सूजन आ जाती है.
  4. . अगर आपको अक्सर पैरों में भारीपन लगने लगे तो समझ जाएं कि खून की पर्याप्त मात्रा पैरों तक नहीं पहुंच रही है.
  5. . पैरों की त्वचा का रंग बदलने लगे तो इसे पैरों में खून की कमी का स्पष्ट संकेत मान लें.
  6. . पैरों में खुजली या उभरी हुई नसें (वेरिकोज वेन्स) दिखाई दे सकती हैं. इलाज न होने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है, जैसे नसों में खून का थक्का (डीवीटी) या पैरों में न भरने वाले घाव पैदा हो जाना.

    डॉ. शर्मा कहते हैं कि इन लक्षणों को लोग इसलिए भी नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि ये शुरुआत में लगातार नहीं होते. दर्द हर दिन नहीं होता, सूजन रात में कम हो जाती है, और सुन्नपन कभी-कभी ही होता है. यही कारण है कि लोग डॉक्टर से सलाह लेने में देर कर देते हैं.

अनदेखा करने का नतीजा है खराब
वे बताते हैं कि इन्हें अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है. धमनियों में गंभीर रुकावट होने पर घाव भरना बंद हो सकता है, संक्रमण हो सकता है और बहुत गंभीर मामलों में पैर काटने तक की नौबत आ सकती है. वहीं, नसों में बना खून का थक्का फेफड़ों तक पहुंच जाए तो जानलेवा स्थिति (पल्मोनरी एम्बोलिज्म) बन सकती है.

क‍िन लोगों को होता है ज्यादा रिस्क? 
कुछ लोगों में यह जोखिम ज्यादा होता है, जैसे मधुमेह (डायबिटीज), हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, धूम्रपान करने वाले, कम शारीरिक गतिविधि करने वाले और बढ़ती उम्र के लोगों में यह परेशानी ज्यादा देखने को मिलती है.

कौन सी जांचें कराएं लोग
इसलिए जरूरी है कि समय रहते जांच कराई जाए. कुछ साधारण जांचें जैसे वैस्कुलर चेक-अप, डॉपलर टेस्ट या एंकल-ब्रैकियल इंडेक्स से शुरुआती अवस्था में ही खराब ब्लड सर्कुलेशन का पता लगाया जा सकता है. शुरुआत में इलाज दवाइयों, जीवनशैली में बदलाव या छोटे-मोटे प्रक्रियाओं से किया जा सकता है, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है.

इसलिए अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें. चलने पर पैरों में दर्द, बार-बार सुन्नपन, बिना वजह सूजन, त्वचा में बदलाव या घाव का देर से भरना, ये छोटी बातें नहीं हैं. ये किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकते हैं.



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