सफेद नहीं हरे पाउडर का कमाल देखिए, महिलाएं हुई आत्मनिर्भर, खड़ा किया लाखों का कारोबार

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Moringa Powder Business: खंडवा जिले के खेड़ी गांव की महिलाओं ने सहजन से मोरिंगा पाउडर बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी 25 से ज्यादा महिलाएं मिलकर शुद्ध और केमिकल फ्री पाउडर तैयार कर रही हैं. उनकी सप्लाई भोपाल, इंदौर, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों तक पहुंच रही है. इस काम से महिलाओं को हर महीने 8 से 15 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय हो रही है. जानिए कैसे गांव की महिलाओं ने ‘स्वर्ग के पेड़’ से अपना आर्थिक भविष्य मजबूत किया.

खंडवा मोरिंगा पाउडर बिजनेस. जिले के खेड़ी गांव की महिलाओं ने दिखा दिया कि अगर इरादा मजबूत हो तो गांव की मिट्टी से भी सोना उगाया जा सकता है. जिस सहजन (सुरजना) के पेड़ को लोग पहले सामान्य समझते थे, आज वही पेड़ इन महिलाओं की कमाई का बड़ा जरिया बन गया है. महिलाएं सहजन की पत्तियों और फलियों से मोरिंगा पाउडर तैयार कर रही हैं, जिसकी मांग देश के बड़े शहरों तक पहुंच गई है.

कैसे शुरू हुआ सफर?
खेड़ी गांव की महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी हैं. समूह की सदस्य अंतिम बाला पटेल बताती हैं कि सहजन को “स्वर्ग का पेड़” कहा जाता है. इसकी पत्तियां, फूल और बीज सभी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. जब उन्हें पता चला कि सहजन की पत्तियों से बना मोरिंगा पाउडर बाजार में अच्छी कीमत पर बिकता है, तो उन्होंने खुद इसे तैयार करने का फैसला किया.

25 से ज्यादा महिलाएं जुड़ीं
शुरुआत में कुछ ही महिलाएं थीं, लेकिन आज 25 से 28 महिलाएं मिलकर यह काम कर रही हैं. वे खेतों से पत्तियां तोड़ती हैं, साफ पानी से धोकर धूप में सुखाती हैं और मशीन से पीसकर शुद्ध पाउडर बनाती हैं. इसमें किसी तरह का केमिकल नहीं मिलाया जाता. तैयार पाउडर भोपाल, इंदौर, उज्जैन, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता तक भेजा जा रहा है. अब ऑनलाइन ऑर्डर भी मिलने लगे हैं.

हर महीने 8 से 15 हजार की कमाई
इस काम से महिलाओं की आमदनी में बड़ा इजाफा हुआ है. अब उन्हें हर महीने 8 हजार से 15 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय हो रही है. इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है.

सेहत के लिए भी फायदेमंद
मोरिंगा पाउडर में विटामिन, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं. यह इम्यूनिटी बढ़ाने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने और शरीर को पोषण देने में मदद करता है. यही वजह है कि इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है. खेड़ी गांव की ये महिलाएं अब सिर्फ घर तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी मेहनत से नई पहचान बना रही हैं.

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shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



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