हड्डियों के दर्द का काल है ये पत्ता! सीने में दर्द हो या सूखी खांसी, खाज-खुजली, त्वचा रोग में भी कारगर – Uttar Pradesh News

Date:


Last Updated:

सफेद चंपा एक ऐसा पेड़ है, जो धरती पर आसानी से पाया जाने वाला अद्भुत औषधीय गुणों से भरपूर है. इसके न केवल पत्ते, बल्कि सभी अंग संजीवनी के समान माने जाते हैं. यह पेड़ अल्सर, कुष्ठ रोग, सूजन, गठिया, अस्थमा, बुखार, और कब्ज़ जैसी कई बीमारियों में बेहद लाभकारी साबित होता है. इसके फूलों का उपयोग नारियल के तेल को सुगंधित करने के लिए भी किया जाता है, और इसकी पत्तियां पुराने घावों को भरने में सक्षम मानी जाती हैं.

सफेद चंपा की छाल को पीसकर लेप बनाने की परंपरा पुरानी है. इससे पुराने घाव, खुजली और कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है. इसके प्राकृतिक तत्व त्वचा को शांत करने और संक्रमण के जोखिम को कम करने में मददगार होते हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग इसे घरेलू उपचार के रूप में अपनाते हैं, लेकिन संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को सावधान से प्रयोग करना चाहिए.

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, चंपा की छाल का लेप प्रभावित हिस्से पर लगाने से सूजन में कमी और आराम मिल सकता है. यह रक्त संचार को बेहतर करने में सहायक होता है. हालांकि, गंभीर गठिया या अन्य रोगों में चिकित्सकीय जांच आवश्यक है.

चंपा की जड़ का उपयोग पेट संबंधी समस्याओं में भी किया जाता रहा है. इसे पेट के अल्सर के लिए लाभकारी माना गया है. जड़ से तैयार काढ़ा पाचन तंत्र को संतुलित करने में सहायक बताया जाता है. हालांकि, अल्सर जैसी गंभीर स्थिति में स्वयं उपचार के बजाय डॉक्टर की सलाह जरूरी है, ताकि स्थिति खराब न हो सके.

Add News18 as
Preferred Source on Google

पारंपरिक उपचार पद्धतियों में चंपा की जड़ का काढ़ा बहुत ही उपयोगी माना गया है. यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद कर सकता है. हालांकि, बहुत तेज बुखार या लंबे समय तक रहने वाले बुखार में चिकित्सकीय जांच अनिवार्य है. प्राकृतिक उपाय केवल सहायक रूप में ही अपनाना उचित होता है.

सफेद चंपा के फूलों की सुगंध मन को शांति देने के लिए जानी जाती है. इसकी खुशबू सिरदर्द में राहत पहुंचा सकती है और तनाव कम करने में सहायक मानी जाती है. फूलों से बने तेल का उपयोग आरामदायक नींद के लिए किया जाता है. अरोमाथेरेपी में भी इसकी सुगंध को सकारात्मक प्रभाव वाला माना गया है.

चंपा के फूलों का लेप छाती के दर्द और पुरानी खांसी में राहत देने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसके लाभकारी तत्व सूजन कम करने और श्वसन मार्ग को आराम देने में सहायक हो सकते हैं. लेकिन हमेशा ध्यान रखें कि, दमा या गंभीर फेफड़ों की बीमारी में यह केवल पूरक उपाय है, मुख्य उपचार का विकल्प नहीं है.

चंपा का रस पथरी और मूत्र संबंधी समस्याओं में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. इसे मूत्र मार्ग को साफ रखने और जलन कम करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है. पथरी जैसी स्थिति में आयुर्वेद एक्सपर्ट की राय बेहद जरूरी है. प्राकृतिक उपचारों को अपनाने से पहले आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श करना हमेशा सुरक्षित और समझदारी भरा कदम साबित होता रहा है.



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related