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गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में प्रशासनिक कामकाज को पारदर्शी और जनता के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए जिलाधिकारी (DM) रविन्द्र कुमार मांदड़ ने एक बड़ी पहल शुरू की है. अब जनता की फरियाद सुनने के लिए अधिकारियों को न केवल कार्यालय में मौजूद रहना होगा, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक ‘Zoom App’ के जरिए ऑनलाइन भी जुड़ना होगा. इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए कचहरी के चक्कर न काटने पड़ें.

सुबह 10 से 12 बजे का समय ‘जनता के नाम’
डीएम विन्द्र कुमार ने कलेक्ट्रेट में आयोजित ‘जनता दर्शन’ के दौरान सभी बड़े अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं. अब जिले के सभी राजपत्रित अधिकारी रोजाना सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक अनिवार्य रूप से अपने कार्यालयों में उपस्थित रहकर जनसुनवाई करेंगे. इस दौरान अधिकारी Zoom ऐप के माध्यम से लाइव जुड़े रहेंगे.

इस डिजिटल पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि स्वयं जिलाधिकारी कहीं से भी किसी भी अधिकारी की जनसुनवाई की मॉनिटरिंग कर सकेंगे. इससे अधिकारियों की कार्यशैली में पारदर्शिता आएगी और शिकायतों के निस्तारण में होने वाली हीला-हवाली पर लगाम लगेगी.

अवैध कब्जे और लापरवाही पर होगा ‘एक्शन’
डीएम ने भू-माफियाओं और अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि राजस्व विभाग, नगर निगम, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) और विद्युत निगम से जुड़ी पुरानी शिकायतों को जल्द से जल्द निपटाया जाए.

जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि यदि विभागीय अधिकारियों की ओर से शिकायतों के निस्तारण में देरी हुई, तो उनकी सीधी जवाबदेही तय की जाएगी. फैमिली आईडी, पीएम सूर्य घर योजना और दिव्यांगजन कल्याण जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी.

जब DM ने फोन कर तुरंत दिलाया इलाज
जनता दर्शन के दौरान मानवीय संवेदनाओं का एक बड़ा उदाहरण भी देखने को मिला. लालकुआं की निवासी दीपा, जो कि गठिया और पैरों में पानी भरने की गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं, अपनी फरियाद लेकर पहुंचीं. उनके पास इलाज के लिए संसाधन नहीं थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए DM ने तुरंत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को फोन लगाया और महिला को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए. इतना ही नहीं, उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी के साथ महिला को अस्पताल भिजवाया.

20 साल पुराने कब्जे से मिली मुक्ति
एक अन्य मामले में लोनी के प्रदीप ने बताया कि उनकी जमीन पर पिछले 20 साल से दबंगों ने कब्जा कर रखा था. प्रदीप पुलिस और तहसील के चक्कर काटकर हार चुके थे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी. जिलाधिकारी ने इस मामले को गंभीरता से लिया और उनके एक निर्देश पर मौके पर ही समस्या का समाधान सुनिश्चित किया गया.



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