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ब्रोकली की खेती यूपी के किसानों की किस्मत बदल रही है. आम बोलचाल में लोग कई बार इसे हरी गोभी भी कह देते हैं. इसकी मांग पूरे साल रहती है और कीमत कभी कम नहीं होती. इन दिनों लखीमपुर खीरी के किसान भी इसे उगाने लगे हैं. नेपाल सीमा से सटा इलाका होने से यहां इसकी मांग और ज्यादा रहती है. ब्रोकली में फाइबर, विटामिन और एंटी आक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाया जाता है. लखीमपुर के ब्रोकली किसान विक्रमेद्र प्रसाद भल्ला लोकल 18 से बताते हैं कि ब्रोकली की पौध रोपाई के 45 से 60 दिन के अंदर काटने लायक हो जाती है.
लखीमपुर खीरी. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान अब सब्जी की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. भारत-नेपाल सीमा के सटे हुए इलाकों में किसान इसमें ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं. इसका कारण ये इलाका नेपाल सीमा के नजदीक है जिसकी वजह से सब्जी की डिमांड अधिक रहती है. कुछ किसान अब खीरी जिले में ब्रोकली की खेती करने लगे हैं. ब्रोकली को हरी गोभी के नाम से भी जाना जाता है. यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद है. ब्रोकली में फाइबर, विटामिन और एंटी आक्सीडेंट्स पाया जाता है.
ब्रोकली पौध की रोपाई के करने के 45 से 60 दिन के अंदर हार्वेस्टिंग शुरू हो जाती है. ब्रोकली न केवल बाजारों में उच्च दामों पर बिकती है बल्कि इसकी मांग भी लगातार बनी रहती है. यही कारण है कि अब जिले के कई किसान फूलगोभी की जगह ब्रोकली की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. ब्रोकली एक ऐसी गोभी है, जो एक बार कटाई के बाद भी दोबारा उत्पादन दे सकती है.
खीरी जिले के कड़ियां गांव के रहने वाले प्रगतिशील किसान विक्रमेद्र प्रसाद भल्ला लोकल 18 बातचीत में कहते हैं कि ब्रोकली की खेती हम 3 साल से कर रहे हैं. बाजार में यह आसानी से 40 से 60 रुपये किलो के हिसाब से बिक जाती है. भारत-नेपाल सीमा से सटा हुआ गांव होने के कारण हमारे यहां की गोभी पड़ोसी देश नेपाल भी जाती है. ब्रोकली एक ऐसी गोभी है जिसे कम लागत में आसानी से तैयार किया जा सकता है. कीटों का भी प्रकोप कम रहता है.
किसान भल्ला बताते हैं कि इस समय हम करीब तीन बीघा में ब्रोकली की खेती कर रहे हैं. अगर बात की जाए तो एक बीघा में तो करीब 5 से 6 हजार रुपये का खर्च आता है. 70 से 80 हजार रुपये आसानी से कमाई की जा सकती है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें


