‘पत्नी को पीट सकते हैं’, तालिबान के ‘क्रूर’ कानून पर भड़के जावेद अख्तर ने मुफ्ती-मुल्लाओं से पूछा- अब चुप क्यों?

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तालिबान के क्रूर फरमान से महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर गहरा खतरा मंडराने लगा है. दरअसल, तालिबान ने घरेलू हिंसा को कानूनी मंजूरी दे दी है, जिससे जावेद अख्तर बौखला गए हैं. तालिबान के नए नियमों के अनुसार, पति अपनी पत्नी की पिटाई कर सकता है, बशर्ते उसकी हड्डी न टूटे. इतना ही नहीं, बिना इजाजत घर छोड़ने पर महिलाओं को जेल और उन्हें पनाह देने वाले रिश्तेदारों को भी सजा दी जाएगी. मशहूर लेखक जावेद अख्तर ने इसे शर्मनाक बताते हुए धर्मगुरुओं से इसकी निंदा करने की अपील की है. मानवाधिकार संगठनों ने इन कानूनों को महिलाओं की सुरक्षा और आजादी पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार बताया है.

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जावेद अख्तर अन्याय के खिलाफ हमेशा आवाज उठाते हैं.

नई दिल्ली: तालिबान ने महिलाओं के अधिकारों पर करारा प्रहार किया है. उन्होंने घरेलू हिंसा को कानूनी मंजूरी देकर पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है. तालिबान के नए कानून के तहत घरेलू हिंसा जायज है,बशर्ते पिटाई से हड्डी नहीं टूटनी चाहिए. पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PFI) ने इस कदम को बेहद खतरनाक और डरावना बताया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर महिलाओं के खिलाफ होने वाले दुर्व्यवहार को जायज ठहराने जैसा है. इस मुद्दे पर भारत के मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने भी अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि तालिबान ने पत्नी की पिटाई को कानूनन सही बना दिया है, जो कि इंसानियत के नाते बेहद शर्मनाक है.

जावेद अख्तर ने अपने पोस्ट में न केवल इस कानून की निंदा की, बल्कि भारत के मुफ्तियों और मौलवियों से भी एक खास अपील की है. उन्होंने कहा कि चूंकि ये सारे विवादित और क्रूर कानून धर्म के नाम पर लागू किए जा रहे हैं, इसलिए मुस्लिम धर्मगुरुओं को आगे आकर बिना किसी शर्त के इसकी कड़ी निंदा करनी चाहिए. वे पोस्ट में लिखते हैं, ‘तालिबान ने पत्नी को पीटने को लीगल बना दिया है, लेकिन हड्डी नहीं टूटनी चाहिए. अगर कोई पत्नी पति की अनुमति के अपने मायके जाती है, तो उसे तीन महीने की जेल होगी. मैं भारत के मुफ्तियों और मुल्लाओं से निवेदन करता हूं कि वे इसकी बिना शर्त निंदा करें, क्योंकि यह सब उनके धर्म के नाम पर किया जा रहा है.’

(फोटो साभार: X@Javedakhtarjadu)

पत्नी को डंडे से पीट सकता है पति
हिंदुस्तान टाइम्स ने द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्ला अखुंदजादा ने 90 पन्नों की एक नई दंड संहिता पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत, पति अपनी पत्नी को डंडे से पीट सकता है और सजा तब दी जाएगी, जब चोट बहुत गंभीर हो. ताज्जुब की बात यह है कि पिटाई का सबूत देने की जिम्मेदारी भी महिला की ही होगी और दोषी पाए जाने पर भी पति को ज्यादा से ज्यादा सिर्फ 15 दिन की जेल होगी.

महिलाओं को पनाह देने वाला भी अपराधी
तालिबान का नया कानून महिलाओं की आजादी को पूरी तरह कुचलने वाली है. इसमें यह भी प्रावधान है कि अगर कोई महिला अपने पति की मर्जी के बिना अपने मायके जाती है या घर छोड़ती है, तो उसे तीन महीने तक की जेल हो सकती है. हद तो यह है कि अगर कोई रिश्तेदार उस महिला को अपने घर में पनाह देता है, तो उसे भी अपराधी माना जाएगा और सजा दी जाएगी. कुल मिलाकर, ये कानून महिलाओं को उनके घरों में ही कैदी बना देने और उनके बुनियादी अधिकारों को खत्म करने जैसा है. इस खबर के सामने आने के बाद दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता अपनी चिंता जता रहे हैं, क्योंकि यह महिलाओं की सुरक्षा और कानूनी हकों पर सबसे बड़ा प्रहार है.

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Abhishek Nagar

अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें



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