तेहरान पर लटकी अमेरिकी हमले की तलवार, फिर भी दोस्त भारत ने बुलाया तो हिंद महासागर में डिस्ट्रॉयर ले आया ईरान

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दुनिया के नक्शे पर इस वक्त मिडिल-ईस्ट एक जलता हुआ ज्वालामुखी बना हुआ है. अमेरिका और इजरायल की सीधी धमकियों के बीच तेहरान पर हमले की तलवार लटक रही है, लेकिन कूटनीति के समंदर में ईरान ने एक ऐसी चाल चली है जिसने सबको चौंका दिया. जब पूरी दुनिया को लग रहा था कि ईरान अपनी सीमाओं की किलेबंदी करेगा, ठीक उसी वक्त ईरान का शक्तिशाली युद्धपोत ‘डेना’ (Dena Destroyer) हजारों मील दूर भारत के ‘मिलन 2026’ (MILAN 2026) युद्धाभ्यास में शामिल होने बंगाल की खाड़ी पहुंच गया. यह महज एक सैन्य अभ्यास नहीं बल्कि भारत और ईरान की अटूट दोस्ती का वो संदेश है जिसने वाशिंगटन से लेकर बीजिंग तक खलबली मचा दी है.

क्यों अहम है ईरान का यह कदम?
1. भारत के प्रति अटूट विश्वास: ईरान पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंध हैं. ऐसे में भारत द्वारा ईरान को आमंत्रित करना और ईरान का अपना सबसे आधुनिक डिस्ट्रॉयर भेजना दिखाता है कि दोनों देश एक-दूसरे को रणनीतिक रूप से कितना महत्व देते हैं. ईरान ने साबित कर दिया कि संकट के समय भी वह भारत की सागर (SAGAR) पहल का सम्मान करता है.

2. समुद्री कूटनीति (Marine Diplomacy): ईरानी नौसेना प्रमुख एडमिरल शाहराम ईरानी का विशाखापत्तनम पहुंचना एक बड़ी कूटनीतिक जीत है. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका के अपने समकक्षों से मुलाकात कर यह साफ कर दिया कि ईरान हिंद महासागर में अलग-थलग नहीं है. वह इस क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के लिए भारत के साथ नेटवर्क बनाने को तैयार है.

3. पश्चिमी देशों को कड़ा संदेश: जिस समय अमेरिका हिंद महासागर में अपना दबदबा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, उसी समय ईरान का यहां मौजूद होना यह संदेश देता है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र किसी की जागीर नहीं है. ईरान ने अपनी परिचालन क्षमता (Operational Capabilities) का प्रदर्शन कर यह दिखा दिया कि उसकी नौसेना खुले समुद्र में चुनौती देने में सक्षम है.

4. IONS की अध्यक्षता और भारत का कद: भारत ने थाईलैंड से ‘इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम’ (IONS) की कमान संभाल ली है. इस मंच पर ईरान एक सदस्य के तौर पर सक्रिय है. भारत की अध्यक्षता में ईरान की भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि हिंद महासागर का भविष्य समावेशी होगा, न कि किसी एक गुट के प्रभाव वाला.

5. तकनीकी और ट्रेनिंग साझाकरण: ईरान ने इस मंच का उपयोग अपनी तकनीकी और ट्रेनिंग क्षमताओं को साझा करने के लिए किया है. एडमिरल ईरानी ने साफ कहा कि शांति और सुरक्षा के लिए तकनीकी अनुभव साझा करना ही भविष्य का आधार है.

5 मुख्य प्‍वाइंट
· ‘डेना’ की एंट्री: ईरान का स्वदेशी डिस्ट्रॉयर ‘डेना’ विशाखापत्तनम पोर्ट पर पहुंच चुका है.

· मिलन 2026: भारत की मेजबानी में हो रहे इस युद्धाभ्यास में दुनिया के कई दिग्गज देश शामिल हैं.

· भारत बना अध्यक्ष: भारत ने आधिकारिक तौर पर IONS की अध्यक्षता संभाल ली है.

· साझा जिम्मेदारी: ईरान ने अवैध गतिविधियों और समुद्री आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई का संकल्प लिया.

· रणनीतिक मुलाक़ातें: ईरानी नौसेना प्रमुख ने दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका के साथ द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की.



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