ये हैं वो 7 विधायक जिनपर टिकी है सत्ता पक्ष और विपक्ष की नजर, रेस में ‘किंगमेकर’ ओवैसी!

Date:


पटना. बिहार में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर घमासान तेज हो गया है और विपक्ष अपने विधायकों के पलटने को लेकर टेंशन में दिख रहा है. चिंता सिर्फ विपक्ष की ही नहीं, सत्ता पक्ष की भी है क्योंकि असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen) यानी एआईएमआईएम (AIMIM) ने भी अपना उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है. वहीं NDA के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर जो पेच फंसा हुआ है, वह भी सियासी तनाव पैदा कर रहा है. ऐसे में AIMIM के पांच विधायक, एक भारतीय समावेशी पार्टी (IIP) के विधायक आई.पी. गुप्ता और बसपा के एक विधायक पर दोनों ही पक्षों की नजर टिकी हुई है. यदि महागठबंधन इन विधायकों का समर्थन हासिल कर ले तो पांचवीं सीट उसके खाते में जा सकती है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या ओवैसी की पार्टी और बसपा विपक्ष के साथ जाएंगे?

ओवैसी की एंट्री और किंगमेकर की भूमिका

दरअसल, यह सवाल तब और अहम हो जाता है कि जब विपक्ष महागठबंधन अपने विधायकों के पलटने की आशंका से परेशान है, जबकि सत्ता पक्ष एनडीए भी छोटे दलों के विधायकों पर नजर रखे हुए है. ऐसे में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने अपना उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर सियासी माहौल गर्मा दिया है. बता दें कि ओवैसी की AIMIM ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पांच सीटें जीतीं जो मुस्लिम बहुल इलाकों से आईं. अब पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला लिया है, जिससे वह किंगमेकर की भूमिका में आ गई है. विधानसभा में पार्टी के पांच विधायक हैं. संख्या भले कम हो, लेकिन पांचवीं सीट के गणित में यही विधायक निर्णायक साबित हो सकते हैं .

कौन हैं वे विधायक जिन पर सबकी नजर?

अगर AIMIM के पांच विधायक महागठबंधन का साथ देते हैं तो विपक्ष को पांचवीं सीट मिल सकती है. लेकिन ओवैसी का इतिहास देखें तो वे अक्सर विपक्षी एकता से अलग रहते हैं. हाल के राजनीतिक घटनाक्रम को परखें तो ओवैसी एनडीए से भी बातचीत कर सकते हैं, क्योंकि बिहार में मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश हो रही है. ऐसे में उनका यह फैसला चुनाव के नतीजों पर बड़ा असर डाल सकता है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर AIMIM विपक्ष के साथ जाती है तो महागठबंधन को मजबूती मिल सकती है. लेकिन अगर वह अलग रुख अपनाती है या तटस्थ रहती है तो एनडीए को फायदा हो सकता है.

इनपर भी रहेगी विशेष नजर

बता दें कि चुनाव में सिर्फ AIMIM के पांच विधायक ही नहीं, बल्कि एक भारतीय समावेशी पार्टी के विधायक आई.पी. गुप्ता और रामगढ़ से बसपा के एक विधायक सतीश कुमार सिंह यादव  उर्फ पिंटू यादव भी अहम माने जा रहे हैं. इन कुल सात विधायकों का रुख पांचवीं सीट का परिणाम तय कर सकता है. राज्यसभा चुनाव में हर वोट की कीमत होती है. अगर विपक्ष इन विधायकों का समर्थन जुटा लेता है तो वह पांचवीं सीट पर मजबूत दावेदारी कर सकता है. लेकिन सवाल यह है कि क्या AIMIM और बसपा खुलकर महागठबंधन के साथ जाएंगे या रणनीतिक दूरी बनाए रखेंगे?

सत्ता पक्ष की भी चिंता

एनडीए के भीतर पहले से ही सीट बंटवारे को लेकर खींचतान चल रही है. ऐसे में पांचवीं सीट पर किसी तरह का क्रॉस वोटिंग या रणनीतिक वोटिंग सत्ता पक्ष के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है. इसलिए सत्ता पक्ष भी इन छोटे दलों के संपर्क में है. राजनीति में अक्सर छोटे दल बड़े फैसलों का रुख बदल देते हैं. यही वजह है कि AIMIM की भूमिका को इस बार किंगमेकर के रूप में देखा जा रहा है.

महागठबंधन की रणनीति

महागठबंधन जानता है कि संख्या बल में वह पीछे है. इसलिए उसकी पूरी रणनीति अतिरिक्त समर्थन जुटाने पर टिकी है. अगर AIMIM, बसपा और अन्य छोटे दलों का साथ मिल जाए तो मुकाबला कड़ा हो सकता है. हालांकि राजनीतिक समीकरण सिर्फ अंकगणित से तय नहीं होते . इसमें रिश्ते, पुराने अनुभव और भविष्य की संभावनाएं भी अहम होती हैं. AIMIM का फैसला आने वाले समय में उसकी राज्य राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है .

5 मार्च से पहले सस्पेंस

नामांकन की आखिरी तारीख 5 मार्च है. उससे पहले दोनों पक्ष सक्रिय हो गए हैं. बंद कमरे की बैठकों का दौर चल रहा है. बयानबाजी भी तेज हो गई है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि AIMIM किसे समर्थन देती है या अपना उम्मीदवार अंत तक मैदान में रखती है. बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 की पांचवीं सीट ने पूरे सियासी परिदृश्य को दिलचस्प बना दिया है. आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि कौन बनेगा इस चुनाव का असली किंगमेकर.



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related