जयप्रकाश के नाम की मेहंदी रानी ने रचाई, पर ‘बेगैरत’ निकला दूल्हा बारात लेकर लौट गया, शादी का सपना और टूटे रिश्ते की दुखद कहानी

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आरा. भोजपुर जिले के छोटकी सनदिया गांव की 20 साल की रानी का विवाह पूरे उत्साह के साथ छह महीने पहले तय हुआ था. घर में तैयारी चल रही थी, मेहमान आ चुके थे, स्टेज सज चुका था. रानी खुश भी थी और भावुक भी, शायद नए जीवन की दहलीज पर खड़ी हर बेटी की तरह. लेकिन, जैसे ही जयमाला के लिए उसे स्टेज पर ले जाया जा रहा था, उसकी आंखों के आगे अंधेरा छा गया और वह गिर पड़ी. परिवार वाले घबराकर उसे अस्पताल ले गए. डॉक्टरों ने बताया कि कमजोरी के कारण वह बार बार बेहोश हो रही थी, बाकी सब सामान्य था. उधर अस्पताल में बेटी का इलाज चल रहा था, लेकिन इधर शादी का मंडप सूना हो गया. दूल्हा इंतजार किए बिना बारात लेकर लौट गया और अपने होने वाले पति के नाम से रानी के हाथों पर रचाई मेहंदी का रंग फीका पड़ गया. दूसरी ओर वह पिता उदासीन हो गया, जिसने अपनी छोटी सी कमाई से बेटी के लिए हर सपना सजाया था, अब टूटे मन से बैठा था.

पूरा मामला क्या है?

बताया जा रहा है कि, भोजपुर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के छोटकी सनदिया गांव की रहने वाली 20 साल की रानी कुमारी की शादी उदवंतनगर प्रखंड के छोटा सासाराम के रहने वाले जयप्रकाश शर्मा से होनी थी. जयमाला के ठीक पहले जयप्रकाश ने दुल्हन बनी रानी की ओर हाथ बढ़ाया, लेकिन थकावट के कारण रानी बेहोश होकर गिर गई. रानी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज में करीब 3 घंटे लग गए. उधर, दुल्हन का इंतजार करने के बजाय जयप्रकाश ने शादी से इनकार कर दिया और बारात के साथ लौट गया.
जयमाला से ठीक पहले दुल्हन रानी कुमारी अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी. परिवार वाले उसे अस्पताल ले गए, लेकिन इस बीच दूल्हा जयप्रकाश ने इंतजार करने के बजाय शादी से इनकार कर दिया और बारात लेकर लौट गया.

स्टेज पर गिरी दुल्हन और लौट गई बारात

रानी कुमारी छोटकी सनदिया गांव निवासी सुरेंद्र शर्मा की छोटी बेटी है. उसकी शादी जयप्रकाश शर्मा से तय हुई थी, जो बेंगलुरु में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं. दोनों परिवारों की करीब छह महीने पहले मुलाकात हुई थी. आपसी सहमति के बाद पहले ‘छेका’ (सगाई) की तारीख तय की गई और फिर शादी की तैयारी शुरू हुई. रानी के पिता सुरेंद्र शर्मा के मुताबिक, शादी से करीब छह महीने पहले से ही लड़का और लड़की आपस में बातचीत कर रहे थे. शादी के कुछ घंटे पहले तक दोनों की बात हुई थी. मेरी बेटी काफी खुश थी और उसका मन लग गया था. शायद इसी वजह से उसे ज्यादा तकलीफ हो रही है.

अस्पताल में दुल्हन, इंतजार बिना दूल्हे ने तोड़ी शादी

पेशे से हार्डवेयर कारोबारी सुरेंद्र शर्मा ने बताया, सभी वैवाहिक कार्यक्रम मेरे घर छोटकी सनदिया में हुए, जबकि शादी लड़के के परिवार की रजामंदी से छोटा सासाराम गांव के एक निजी रिसॉर्ट में होनी थी. उन्होंने कहा, मेरे दो बेटे हैं- सिंटू शर्मा और रितेश शर्मा, जबकि रानी मेरी इकलौती बेटी है. मैंने अपने छोटे से कारोबार से बेटी की शादी के लिए सारे सामान खरीदे. लड़के वालों की ओर से जो मांग की गई थी, उससे ज्यादा ही मैं अपनी बेटी को दे रहा था. लेकिन शादी से इनकार करने के बाद मेरे और मेरी बेटी के सारे सपने टूट गए हैं.

एक पल की बेहोशी ने छह महीने से सजाए गए सपनों को तोड़ दिया. अब गांव में इस घटना को लेकर चर्चा है और परिवार न्याय और सम्मान की उम्मीद में आगे की राह देख रहा है.

खुशियों के बीच युवती के गर पसरा मातम

दुल्हन के पिता ने बताया, मेरी बेटी को किसी तरह की कोई बीमारी नहीं है. वो लगातार होने वाले अपने पति से बात भी करती थी. कुछ ऐसा होता तो जरूर बताया होता, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है. शादी से ठीक पहले जयमाल के लिए स्टेज पर जाने से ठीक पहले रानी भावुक हो गई और अचानक रोने लगी. ये देख हम लोगों ने रानी को संभाला. वो स्टेज पर चढ़ नहीं पा रही थी. तभी दूल्हा जयप्रकाश ने हाथ बढ़ाया और स्टेज की ओर ले जाने लगा, तभी रानी बेहोश होकर गिर गई. रानी के बेहोश होने के बाद हमलोग उसे होटल के दूसरे कमरे में लेकर चले गए. शादी की रस्मों की तैयारी भी हो रही थी.

छह महीने का इंतजार, जयमाला से पहले बिखरे सपने

सदर अस्पताल में दुल्हन रानी का इलाज करने वाले डॉक्टर आरएन यादव ने बताया, देर रात लड़की को इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल लाया गया था. परिवार वालों की ओर से बताया गया कि वह बार-बार बेहोश हो रही है. हमने पहले ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन जांच कराई, सब कुछ नॉर्मल था. कमजोरी के कारण लड़की को चक्कर आ रहा था. लड़की का इमरजेंसी वार्ड में प्राथमिक उपचार किया और उसे वार्ड में भर्ती कर ऑब्जर्वेशन में रखा गया है. दरअसल, रानी के लिए यह सिर्फ एक शादी नहीं थी, यह भरोसे और भविष्य का सपना था. एक पल की बेहोशी ने उस सपने को अधूरा छोड़ दिया. अब सवाल सिर्फ शादी टूटने का नहीं, बल्कि उस संवेदना का है जो ऐसे वक्त में सबसे ज्यादा जरूरी होती है.



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