Last Updated:
Rehan Khan Wrestler: अगर जज़्बा मजबूत हो और मेहनत सच्ची हो, तो मिट्टी से निकलकर भी इंसान बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है. खंडवा से जुड़ी ऐसी ही एक कहानी है पहलवान रेहान खान की, जिन्होंने कुश्ती के अखाड़े में नाम कमाया और उसी दम पर खंडवा में सरकारी नौकरी भी हासिल की.
Rehan Khan Wrestler: अगर जज़्बा मजबूत हो और मेहनत सच्ची हो, तो मिट्टी से निकलकर भी इंसान बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है. खंडवा से जुड़ी ऐसी ही एक कहानी है पहलवान रेहान खान की, जिन्होंने कुश्ती के अखाड़े में नाम कमाया और उसी दम पर खंडवा में सरकारी नौकरी भी हासिल की। रेहान खान आज रेलवे में नौकरी करने के साथ-साथ पहलवानी में भी लगातार प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं. रेहान खान मूल रूप से इंदौर के रहने वाले हैं, लेकिन कुश्ती के सिलसिले में खंडवा और आसपास के इलाकों में उनका नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है. रेहान अब तक सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश केसरी का खिताब अपने नाम कर चुके हैं. उन्होंने प्रदेश में सैकड़ों कुश्तियां लड़ी हैं और जीत का रिकॉर्ड भी शानदार रहा है। खास बात यह है कि रेहान ऐसे पहलवान हैं, जिनके परिवार में तीन पीढ़ियों से कुश्ती की परंपरा चली आ रही है.
LOCAL 18 से बातचीत में रेहान खान बताते हैं कि उनका सफर आसान नहीं रहा. साल 2015 में उन्हें कुश्ती कोटे से रेलवे में नौकरी मिली. वे वर्तमान में रेलवे में कार्यरत हैं और अपनी ड्यूटी के साथ-साथ कुश्ती का अभ्यास भी जारी रखते हैं रेहान कहते हैं कि खंडवा में एक मुकाबले के दौरान सेमीफाइनल और फाइनल के बीच उन्हें गंभीर चोट भी लगी थी. सिर में गहरी चोट आई और चार से ज्यादा टांके लगे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा अखाड़े में लौटे. रेहान बताते हैं कि उन्होंने सिर्फ 5 साल की उम्र में पहलवानी शुरू कर दी थी. आज वे 22 बार के मध्य प्रदेश केसरी रह चुके हैं और प्रदेश स्तर का शायद ही कोई ऐसा खिताब हो, जो उनके नाम न हो. वे कहते हैं कि उनके स्टेशन मास्टर और रेलवे के अधिकारी उन्हें हमेशा सपोर्ट करते हैं, समय पर छुट्टी भी देते हैं, जिससे वे अभ्यास और प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकें. रेहान रोज रेलवे की ड्यूटी निभाने के बाद स्टेडियम पहुंचते हैं और अभ्यास करते हैं.
असली पहलवान बनना है तो तपस्या करों
रेहान खान युवाओं को साफ कहते हैं कि अगर असली पहलवान बनना है तो तपस्या करनी पड़ेगी. नशे से पूरी तरह दूरी बनानी होगी. वे कहते हैं कि आजकल युवाओं में बॉडी बनाने के लिए इंजेक्शन और गलत तरीकों का चलन बढ़ गया है, जो पूरी तरह गलत है. देसी खान-पान जैसे दूध, घी, बादाम और संतुलित डाइट ही लंबे समय तक पहलवानी करने का सही रास्ता है. बचपन में वे दिन-रात 10 से 11 घंटे तक मेहनत करते थे, लेकिन अब नौकरी की वजह से सुबह-शाम मिलाकर करीब 4 घंटे अभ्यास कर पाते है.
रेहान गर्व से कहते हैं कि पहलवानी उनके खून में है. वे तीसरी पीढ़ी के पहलवान हैं. उनके दादाजी चांद खां पहलवान, पिता मकसूद खान और बड़े भाई अली इमरान भी नामी पहलवान रहे हैं. परिवार का पूरा सहयोग उन्हें हमेशा मिलता रहा है. उनके गुरु रोहित पटेल पहलवान हैं, जो भारत केसरी और हिंदी केसरी रह चुके हैं और रेलवे में ही नौकरी करते हैं. हरदा जिले के रहने वाले रोहित पटेल को रेहान अपना मार्गदर्शक मानते हैं और कहते हैं कि गुरु के आशीर्वाद से ही वे इस मुकाम तक पहुंचे हैं. रेहान खान की यह कहानी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेल को सिर्फ शौक मानते हैं. रेहान ने साबित कर दिया कि अगर मेहनत और लगन हो, तो अखाड़े की मिट्टी भी सरकारी नौकरी और सम्मान दिला सकती है.
About the Author
Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें


