Business Idea : पढ़ाई छोड़ी, 4 हजार से शुरू किया काम, आज रोज 1000 से ज्यादा कमाई – Chhattisgarh News

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News Business Idea: छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए स्वरोजगार की दिशा में सुनील कुमार सागर आज एक प्रेरणादायक नाम बन चुके हैं. भंवरपुर के रहने वाले सुनील ने यह साबित कर दिया कि अगर इंसान के अंदर मेहनत करने का जज्बा और सही सोच हो, तो कम पूंजी से भी मजबूत व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है. उनकी कहानी खास तौर पर उन युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो पढ़ाई पूरी न कर पाने या नौकरी न मिलने के कारण खुद को असफल मान बैठते हैं.

पढ़ाई छोड़ी, लेकिन हार नहीं मानी
सुनील कुमार सागर बताते हैं कि पढ़ाई में उनका मन नहीं लगता था, इसलिए उन्होंने आगे पढ़ाई न करने का फैसला किया. लेकिन खाली बैठने या भटकने के बजाय उन्होंने खुद का कुछ करने की ठान ली. करीब 4 से 5 साल पहले, जब उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे, तब उन्होंने सिर्फ 4 हजार रुपये की छोटी-सी पूंजी लगाकर मछली बेचने का काम शुरू किया.

शुरुआत आसान नहीं थी. रोजाना महज 15 से 20 किलो मछली ही बिक पाती थी, जिससे आमदनी भी बहुत सीमित रहती थी. कई बार निराशा भी होती थी, लेकिन सुनील ने धैर्य नहीं छोड़ा.

मेहनत और भरोसे से बढ़ा कारोबार
धीरे-धीरे सुनील ने बाजार की जरूरत को समझा और ग्राहकों से सीधा जुड़ाव बनाया. साफ-सुथरी, ताज़ी और सही दाम पर मछली देना उनकी पहचान बन गई. लगातार मेहनत और ईमानदारी का नतीजा यह रहा कि आज सुनील रोजाना 50 किलो से ज्यादा मछली बेच रहे हैं. अब हालात यह हैं कि शादी-ब्याह और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए भी उन्हें बड़े ऑर्डर मिलने लगे हैं, जिससे उनकी आमदनी में लगातार इजाफा हो रहा है.

शुक्रवार बाजार में सबसे ज्यादा रहती है भीड़
भवरपुर में हर शुक्रवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार में सुनील की दुकान पर ग्राहकों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिलती है. वह पनकाज, रोहू, कतला, मृगल, पेटली और कॉमन कार्प जैसी कई प्रजातियों की मछलियां बेचते हैं. सुनील बताते हैं कि पनकाज मछली की सबसे ज्यादा मांग रहती है, क्योंकि इसकी कीमत कम होती है और यह 140 से 160 रुपये प्रति किलो में मिल जाती है.

पनकाज मछली क्यों है पहली पसंद?
पनकाज मछली में कांटे कम होते हैं और इसका स्वाद भी काफी अच्छा माना जाता है. यही वजह है कि बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सब इसे पसंद करते हैं. मांग सिर्फ भंवरपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में बनी रहती है.

रोज़ 1000 से ज्यादा का शुद्ध मुनाफा
बाजार में प्रतिस्पर्धा होने के बावजूद सुनील बताते हैं कि उन्हें रोजाना 1000 रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा हो जाता है. उनका मानना है कि अगर युवा छोटे स्तर से काम शुरू करें और लगातार मेहनत करते रहें, तो आत्मनिर्भर बनना मुश्किल नहीं है.

सरकारी नौकरी ही सब कुछ नहीं
सुनील कुमार सागर की सफलता यह साफ संदेश देती है कि रोजगार के लिए सिर्फ सरकारी नौकरी पर निर्भर रहना जरूरी नहीं. खुद का छोटा व्यवसाय भी आर्थिक मजबूती और सम्मान दिला सकता है. आज सुनील न सिर्फ खुद कमाई कर रहे हैं, बल्कि कई युवाओं को भी प्रेरित कर रहे हैं.



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