गाजीपुर के मछुआरे गंगा की गहराई में जान जोखिम में डालकर पकड़ते हैं बेलगागरा मछली, 500 रुपए किलो में है मांग!

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गाजीपुर के मछुआरे अपनी जान जोखिम में डालकर गंगा की गहराई में गोता लगाते हैं, ताकि बेलगागरा मछली पकड़ सकें, जिसकी बाजार में भारी मांग है. इस मछली में कम कांटे और मुलायम मांस होता है, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित है. जनवरी से मार्च के बीच मछुआरे इस सीजन में अच्छी मुनाफा कमा रहे हैं, और यह मछली अब सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं बल्कि एक्वाकल्चर प्रजाति के रूप में उभर रही है.

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गाजीपुर. यहां के स्थानीय मछुआरे अपनी जान हथेली पर रखकर गंगा की गहराई में गोता लगाते हैं. मकसद है बेलगागरा मछली, जिसकी मांग इन दिनों बाजार में सातवें आसमान पर है. बेलगागरा मछली अक्सर सामान्य मछली से ज्यादा दामों पे बिकती है और ये पूर्वी उत्तरप्रदेश के गंगा में सामान्य रूप से पाई जाती है.

खतरनाक है डुबकी-कांटा’ तकनीक
मछुआरे किसी आधुनिक मशीन का नहीं, बल्कि सदियों पुरानी डुबकी-कांटा (गोताखोर कांटा) तकनीक का इस्तेमाल करते हैं. मछुआरे पानी के अंदर लंबी सांस रोककर गोता लगाते हैं और पत्थरों के बीच मछली के छिपने वाले सुराखों में कांटा फंसाते हैं. खुद को लहरों के बीच स्थिर रखने के लिए वे भारी पत्थरों का सहारा लेते हैं.

सीजन चरम पर, मुनाफे की लहर
मछुआरों के मुताबिक, जनवरी से मार्च का समय बेलगागरा के लिए सबसे मुफीद होता है, एक रामजीवन नाम के  मछुआरे ने बताया, ठंडा पानी इस मछली को पसंद है. इस सीजन में हम एक दिन में 450 से 500 रुपए किलो तक मछली पकड़ लेते हैं. एक मछली का वजन औसतन 200 से 300 ग्राम होता है, इसे स्थानीय बाजारों में बेचकर मछुआरों को तगड़ा मुनाफा हो रहा है, जिससे उनकी आजीविका सुधर रही है. सिर्फ स्वाद ही नहीं, बेलगागरा सेहत के लिए भी सुपरफूड मानी जा रही है. शोध बताते हैं कि इसमें उच्च मात्रा में प्रोटीन और संतुलित फैटी एसिड प्रोफाइल पाया जाता है.

कम कांटे, ज्यादा स्वाद

इस मछली में कांटे कम और मांस मुलायम होता है, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित है. विशेषागों का मानना है कि इसमें प्रोटीन की मात्रा कामन मछली से 20 परसेंट ज्यादा है.  मसालों को बेहतर सोखने की क्षमता के कारण करी और रोस्टेड फॉर्म में यह बेहद लोकप्रिय है.

एक्वाकल्चर का भविष्य
मत्स्य विशेषज्ञों का मानना है कि बेलगागरा अब सिर्फ घाटों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी एक्वाकल्चर प्रजाति बन रही है. ददरीघाट की यह मछली गाजीपुर की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला चांदी साबित हो रही है.

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Monali Paul

Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें



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