‘भगवान! मेरी सास को उठा लो’, ये लिखकर मंदिर की दानपेटी में बहू ने डाली पर्ची, नजारा देख पुजारी सन्न
‘भगवान! मेरी सास को उठा लो’, ये लिखकर मंदिर की दानपेटी में बहू ने डाली पर्ची, नजारा देख पुजारी सन्न
“हे भगवान, मेरी सास को उठा लो.” आमतौर पर मंदिर की दानपेटी से श्रद्धा और सुख-समृद्धि की कामना वाले पत्र निकलते हैं लेकिन कर्नाटक के बेलगावी से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सबको हैरान कर दिया है. बेलगावी जिले के प्रसिद्ध हुलिकंटेश्वर मंदिर में जब पुजारी और प्रशासन ने दानपेटी खोली तो नोटों के बीच 100 रुपये का एक ऐसा नोट मिला जिस पर खून सुखाने वाली गुहार लिखी थी. किसी अज्ञात भक्त (संभवतः बहू) ने भगवान से अपनी ही सास की मौत की मन्नत मांग ली थी.
इस अजीबोगरीब पर्ची पर साफ लिखा था, “हे भगवान, मेरे दुख दूर करो और अगली जत्रा (धार्मिक यात्रा) से पहले मेरी सास की मृत्यु हो जाए.” मंदिर प्रशासन और वहां मौजूद भक्त इस असामान्य और खतरनाक मनोकामना को देखकर दंग रह गए. सोशल मीडिया पर अब इस नोट की जमकर चर्चा हो रही है. जहां लोग मंदिर में परिवार की लंबी उम्र और खुशहाली मांगते हैं, वहीं इस तरह की नफरत भरी प्रार्थना ने पारिवारिक रिश्तों के कड़वे सच को उजागर कर दिया है. नोट में लिखने वाले का नाम नहीं है इसलिए प्रशासन के लिए यह पता लगाना मुश्किल है कि आखिर किस दुखी आत्मा ने भगवान के घर में ऐसी अर्जी लगाई है.<br>”हे भगवान, मेरी सास को उठा लो.” आमतौर पर मंदिर की दानपेटी से श्रद्धा और सुख-समृद्धि की कामना वाले पत्र निकलते हैं लेकिन कर्नाटक के बेलगावी से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सबको हैरान कर दिया है. बेलगावी जिले के प्रसिद्ध हुलिकंटेश्वर मंदिर में जब पुजारी और प्रशासन ने दानपेटी खोली तो नोटों के बीच 100 रुपये का एक ऐसा नोट मिला जिस पर खून सुखाने वाली गुहार लिखी थी. किसी अज्ञात भक्त (संभवतः बहू) ने भगवान से अपनी ही सास की मौत की मन्नत मांग ली थी.
इस अजीबोगरीब पर्ची पर साफ लिखा था, “हे भगवान, मेरे दुख दूर करो और अगली जत्रा (धार्मिक यात्रा) से पहले मेरी सास की मृत्यु हो जाए.” मंदिर प्रशासन और वहां मौजूद भक्त इस असामान्य और खतरनाक मनोकामना को देखकर दंग रह गए. सोशल मीडिया पर अब इस नोट की जमकर चर्चा हो रही है. जहां लोग मंदिर में परिवार की लंबी उम्र और खुशहाली मांगते हैं, वहीं इस तरह की नफरत भरी प्रार्थना ने पारिवारिक रिश्तों के कड़वे सच को उजागर कर दिया है. नोट में लिखने वाले का नाम नहीं है इसलिए प्रशासन के लिए यह पता लगाना मुश्किल है कि आखिर किस दुखी आत्मा ने भगवान के घर में ऐसी अर्जी लगाई है.


