आजकल हेल्थ और डाइजेशन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. कब्ज, एसिडिटी, पेट में जलन और मानसिक बेचैनी जैसी परेशानियां आम हो चुकी हैं. ऐसे समय में एक पुराना भारतीय उपाय फिर से चर्चा में है – गुनगुने पानी के साथ घी का सेवन. इस विषय पर एक प्रभावशाली वक्तव्य में सद्गुरु बताते हैं कि सही तरीके से घी का उपयोग हमारे पाचन तंत्र, खासकर कोलन की सफाई और आंतों की सेहत के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है. भारतीय भोजन संस्कृति में हजारों वर्षों से घी को विशेष स्थान दिया गया है. परंपरा के अनुसार भोजन की पहली ग्रास में घी लेना सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी माना गया. सद्गुरु समझाते हैं कि घी आहार नली को चिकनाई देता है, जिससे भोजन आसानी से पचता है और आंतों में कुछ भी चिपकता नहीं. खासकर मसालेदार भोजन करने वाले क्षेत्रों में घी को पाचन सुरक्षा कवच की तरह देखा जाता रहा है.


