कोटा. कहते हैं किस्मत पल भर में बदल जाती है, लेकिन उस बदलाव की राह मेहनत, भरोसा और परिवार तय करता है. कोटा के सतीश पारेता की कहानी इसी बात की मिसाल है, जिन्होंने संघर्षों के बावजूद हार नहीं मानी और आज सहजल ड्रेस व प्राची ग्लैमज़ोन मेकअप स्टूडियो को एक मजबूत पहचान दिलाई. सतीश पारेता ने अपने करियर की शुरुआत टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर वर्कशॉप से की थी, लेकिन इस काम में उन्हें सफलता नहीं मिल सकी. उस समय उनकी पत्नी सुनीता पारेता (सोनिया पारेता) तलवंडी इलाके में एक छोटी-सी ज्वेलरी शॉप चलाती थीं.
आर्थिक परेशानियों के बीच परिवार में बेटी सहजल का जन्म हुआ, जिसे सतीश पारेता अपने जीवन में खुशियों और सौभाग्य की शुरुआत मानते हैं. सहजल के जन्म के बाद सतीश पारेता ने वर्कशॉप का काम छोड़कर पत्नी के ज्वेलरी व्यवसाय को संभाल लिया. मेहनत और ईमानदारी से काम करने के चलते ज्वेलरी की मांग बढ़ने लगी और बाजार में “पारेता पट्टी” नाम से इसकी पहचान बनी, जो आगे चलकर केवल सहजल ज्वेलरी पर ही उपलब्ध रही.
सतीश पारेता को व्यापार में ऐसे मिली सफलता
सफल फैमिली बिज़नेस मॉडल के रूप में बन चुकी है पहचान
प्राची की रुचि बचपन से ही मेकअप में थी. पिता सतीश पारेता ने उसकी प्रतिभा को पहचाना और उसे प्रोफेशनल मेकअप आर्टिस्ट का कोर्स करवाया. मेहनत और लगन से कोर्स पूरा करने के बाद आज प्राची प्राची ग्लैमज़ोन मेकअप स्टूडियो के जरिए एक सफल मेकअप आर्टिस्ट बन चुकी हैं. खास बात यह है कि जहां पिता दूल्हे को तैयार करते हैं, वहीं बेटी दुल्हन को सजाती है. फैमिली बिज़नेस बना पहचान. सहजल ड्रेस और प्राची ग्लैमज़ोन मेकअप स्टूडियो, जो ज्योति मंदिर के पास, तलवंडी, कोटा में स्थित है, आज यह व्यवसाय कोटा में एक सफल फैमिली बिज़नेस मॉडल के रूप में पहचान बना चुका है.
बेटियों के जन्म के बाद व्यापर को नई दिशा मिली
दिनभर दुकान की जिम्मेदारी सतीश पारेता संभालते हैं, उनकी पत्नी सुनीता पारेता ज्वेलरी और ग्राहकों से जुड़े काम देखती हैं. बेटी सहजल ड्रेस सेगमेंट संभालती हैं, जबकि प्राची दुल्हनों के मेकअप की जिम्मेदारी निभाती हैं. पूरे परिवार की मेहनत और आपसी तालमेल ही इस सफलता की सबसे बड़ी वजह है. सतीश पारेता सामाजिक जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं. वे 25वीं वैवाहिक वर्षगांठ मनाने वाले दंपतियों को विशेष छूट देते हैं, जबकि 50वीं वर्षगांठ मनाने वालों को और अधिक रियायत देते हैं, ताकि बच्चों पर आर्थिक बोझ न पड़े. सतीश पारेता कहते हैं, “मेरी बेटियों के जन्म के बाद ही मेरे जीवन और व्यापार को नई दिशा मिली. परिवार का साथ और लगातार मेहनत ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है.”


