Why Medicines Should Be Protected from Sunlight | दवाइयों को धूप से बचाना क्यों जरूरी है

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Can Sunlight Damage Medicines: सूरज की रोशनी में मौजूद अल्ट्रावॉयलेट किरणें दवाइयों में रासायनिक बदलाव पैदा कर सकती हैं. इससे दवाओं का असर कम हो सकता है या हानिकारक तत्व बन सकते हैं. कई दवाएं लाइट सेंसिटिव होती हैं, इसलिए उन्हें ठंडी, सूखी और अंधेरी जगह पर रखना जरूरी है. सही स्टोरेज दवा की क्वालिटी ठीक बनी रहती है.

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कई एंटीबायोटिक दवाएं धूप के संपर्क में आने से खराब हो सकती हैं.

Sunlight and Medicines Facts: जब भी आप दवाएं खरीदने जाते हैं, तब फार्मासिस्ट सलाह देते हैं कि दवाओं को धूप में न रखें और ठंडी जगह पर रखने की कोशिश करें. कई दवाओं के पैकेट पर साफ लिखा होता है कि दवा को धूप से बचाएं और अंधेरे में स्टोर करें. कई लोगों के मन में सवाल आता है कि दवाओं को धूप से बचाने और अंधेरे में स्टोर करने की जरूरत क्यों होती है? आखिर दवाओं में ऐसा क्या होता है, जिसे सूरज की रोशनी से नुकसान होता है? अगर आपके मन में भी इसी तरह के सवाल घूम रहे हैं, तो आपको इसकी असली वजह जाननी चाहिए.

यूएस के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की रिपोर्ट के मुताबिक सूरज की रोशनी में अल्ट्रा वॉयलेट (UV) किरणें और हीट होती है, जो दवाओं को नुकसान पहुंचा सकती है. इन किरणों के संपर्क में आने पर दवाओं में फोटोडिग्रेडेशन नामक केमिकल रिएक्शन शुरू हो जाता है, जिससे दवा के केमिकल कंपोजिशन टूटने लगते हैं या इनएक्टिव हो जाते हैं. इससे दवा की प्रभावशीलता कम हो सकती है और साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ सकता है.

सूरज की किरणें एनर्जी से भरपूर होती हैं. जब ये दवा के तत्वों पर पड़ती हैं, तो वे एनर्जी को सोखकर उत्तेजित हो जाते हैं. इसके बाद फोटोकैमिकल रिएक्शन शुरू होते हैं. फोटोऑक्सीडेशन, फोटोइसोमराइजेशन, फोटोडिहाइड्रोजनेशन और फोटोक्लीवेज जैसी प्रक्रियाओं के कारण दवा के सक्रिय इंग्रेडिएंट टूट सकते हैं या उसकी संरचना बदल सकती है. कभी-कभी नए यौगिक बनते हैं, जो कम प्रभावी या टॉक्सिक हो सकते हैं. धूप में रखी दवा की प्रभावशीलता कम हो सकती है.

US फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के अनुसार कई दवाएं लाइट सेंसिटिव होती हैं. इनमें कुछ एंटीबायोटिक दवाएं जैसे- टेट्रासाइक्लिन, डॉक्सीसाइक्लिन, सिप्रोफ्लॉक्सासिन, ओफ्लॉक्सासिन शामिल हैं. इंजेक्टेबल दवाएं जैसे- नाइट्रोप्रुसाइड, निफेडिपिन, कुछ कीमोथेरेपी दवाएं, विटामिन B2, नाइट्रोग्लिसरीन, कुछ आई ड्रॉप्स और सिरप भी लाइट सेंसिटिव होते हैं. यही वजह है कि कई अंतरराष्ट्रीय फार्माकोपिया में सैकड़ों दवाओं के लिए लाइट प्रोटेक्शन की सिफारिश की गई है.
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दवा का रंग बदलना, स्मैल आना या पारदर्शिता में बदलाव खराब होने के संकेत हो सकते हैं. विशेष रूप से इंजेक्शन या IV दवाओं में पोटेंसी कम होना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है. दवाओं को हमेशा उनकी मूल पैकेजिंग में रखें. दवाओं को खिड़की, बालकनी या सीधी धूप वाली जगह से दूर रखें. अधिकांश दवाएं 15 से 30°C के बीच ठंडी, सूखी और अंधेरी जगह में सुरक्षित रहती हैं. अगर दवाएं रखने वाला कंटेनर पारदर्शी हो, तो उसे एल्युमिनियम फॉयल या गहरे रंग के बैग में लपेटा जा सकता है. दवाओं की एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें और रंग या गंध में बदलाव दिखे, तो दवा का उपयोग न करें.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें



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