अब चित्रकूट में बिना देरी के गर्भवती महिलाओं को मिलेगी अल्ट्रासाउंड की सुविधा, जानिए क्या है ये नया प्रोसेस

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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भूपेश द्विवेदी ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि नई व्यवस्था के तहत गर्भावस्था के छह माह बाद आवश्यक जांच के लिए मैनुअल तरीके से वाउचर जारी किए जाएंगे. यह वाउचर तीन प्रतियों में होगा, एक प्रति संबंधित डॉक्टर अपने रिकॉर्ड के लिए सुरक्षित रखेंगे, जबकि दो प्रतियां गर्भवती महिला को दी जाएंगी.

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यूपी के चित्रकूट में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और अच्छा बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने एक अहम कदम उठाया है. अब जिले की गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए कोई परेशानी और लंबी प्रक्रिया से नहीं जूझना पड़ेगा. स्वास्थ्य विभाग ने ई-रूपी आधारित भुगतान व्यवस्था की जगह मैनुअल वाउचर प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे जरूरतमंद महिलाओं को समय पर और बिना अतिरिक्त खर्च के जांच सुविधा मिल सकेगी.

जानकारी के लिए बता दें कि अब तक जिले में अल्ट्रासाउंड सुविधा मुख्य रूप से स्कैनर मशीनों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही थी, लेकिन जिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मशीनें उपलब्ध नहीं थीं वहां गर्भवती महिलाओं को अधिक परेशानी उठानी पड़ती थी. कई बार तकनीकी कारणों से ई-वाउचर जनरेट नहीं हो पाता था या भुगतान प्रक्रिया में देरी हो जाती थी. इसका खामियाजा महिलाओं को निजी खर्च उठाकर जांच कराने के रूप में भुगतना पड़ता था जिसको देखते हुए अब यह सुविधा शुरू की जा रही है.

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने दी जानकारी 

वहीं इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भूपेश द्विवेदी ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि नई व्यवस्था के तहत गर्भावस्था के छह माह बाद आवश्यक जांच के लिए मैनुअल तरीके से वाउचर जारी किए जाएंगे. यह वाउचर तीन प्रतियों में होगा, एक प्रति संबंधित डॉक्टर अपने रिकॉर्ड के लिए सुरक्षित रखेंगे, जबकि दो प्रतियां गर्भवती महिला को दी जाएंगी. महिला इनमें से एक प्रति अधिकृत अल्ट्रासाउंड केंद्र पर जमा करेगी और दूसरी प्रति अपने पास रखेगी. इसी आधार पर संबंधित केंद्र को भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

425 रूपये का होगा भुगतान

उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि जिले में वर्तमान में छह निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से अधिकृत किया गया है.जिन सरकारी केंद्रों पर मशीनें उपलब्ध नहीं हैं, वहां की गर्भवती महिलाओं को इन्हीं अधिकृत निजी केंद्रों पर भेजा जा रहा है. प्रत्येक अल्ट्रासाउंड जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से 425 रुपये का भुगतान सीधे केंद्र को किया जाएगा, जिससे महिला पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा. ई-रूपी प्रणाली में तकनीकी दिक्कतों के कारण कई बार लाभार्थियों को समय पर सुविधा नहीं मिल पाती थी. मैनुअल वाउचर व्यवस्था लागू होने से गर्भवती महिलाएं आसानी से अल्ट्रासाउंड करवा सकेंगी.

About the Author

Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



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