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Success Story: सरकारी नौकरी की तैयारी के बाद जब नौकरी नहीं मिलती तब बहुत से लोगों को आगे का रास्ता नहीं सूझता कि अब क्या करें. सरकारी नौकरी न मिलने के बाद आमतौर पर लोगों के 2-3 ही विकल्प होते हैं. पहला विकल्प तो अपनी डिग्री और पढ़ाई के हिसाब से प्राइवेट जॉब कर सकते हैं. इसके अलावा अपनी पढ़ाई और डिग्री पर आधारित या उससे अलग कोई बिजनेस या खेती किसानी कर सकते हैं. ऐसा नहीं है कि नौकरी नहीं मिली तो लोग कुछ करते नही हैं या कर नहीं सकते हैं. जरूरत होती है तो सिर्फ खुद की क्षमता को समझने और पहचानने की. यदि आप भी युवा हैं और समझ नहीं पा रहे हैं कि लाइफ में आगे क्या करें तो यह सक्सेस स्टोरी आपको भी रास्ता दिखाने का जरिया बन सकती है.
सरकारी नौकरी की चाह में जहानाबाद के घोसी स्थित बैरामसराय के युवक ने पटना में कोचिंग और ट्यूशन पढ़ना शुरू किया था. इसी बीच देश में कोरोना महामारी आ गई. इसने देश को लगभग ठप्प कर दिया था. इस बीच पटना में रहने वाला 30 वर्षीय युवक बबलू कुमार भी अपने घर आ गया. जब तक सब कुछ सामान्य होता तब तक घर परिवार ने उनके ऊपर एक अलग जिम्मेदारी डाल दी. इससे वह दोबारा सरकारी नौकरी की तैयारी करने पटना नहीं जा पाए. अब उनके सामने संकट था कि गांव में रोजी रोजगार के लिए क्या करें. ऐसे में एक दोस्त ने उन्हें बांस के बिजनेस का आइडिया दिया.
बबलू कहते हैं कि इस बांस के बिजनेस से उनका नया सफर शुरू हुआ. इस सफर में बिहार सरकार की मदद मिली और लघु उद्यमी योजना से 2 लाख रुपए की राशि लेकर उन्होंने उद्योग शुरू कर दिया. आज वह इस उद्योग से अपना पेट भर रहे हैं. इसके साथ ही आस-पास के आधा दर्जन बेरोजगार लोगों को रोजगार भी प्रदान कर रहे हैं. हर युवा की तरह बबलू भी नौकरी की सोच लेकर पटना गए, लेकिन सफलता नहीं मिली तो व्यापार की ओर कदम बढ़ा दिया.
Local 18 से बबलू कुमार ने कहा, “हम बांस का व्यापार 2 साल से कर रहे हैं. सरकारी योजना का लाभ लेकर शुरुआत की. पढ़ाई के बाद कोरोना आ गया और घर आ गए. समय बीत रहा था ऐसे में कुछ समझ नहीं आ रहा था कि करें क्या? ऐसे में एक दोस्त ने हमें यह सलाह दी और बिहार सरकार की योजना की जानकारी दी. इसके बाद व्यापार की शुरुआत कर दी. आज हम खुद अच्छी कमाई कर रहे हैं. साथ ही आधा दर्जन बेरोजगार युवा को रोजगार भी प्रदान कर रहे हैं. औसतन 4 से 5 लाख रुपए तक सलाना कमाई हो जाती है.”
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उन्होंने आगे यह भी कहा कि इस मिशन को और आगे लेकर जाना है. हम बांस के और प्रोडक्ट्स तैयार करने वाले हैं. इसके लिए मशीनें भी मंगवाएंगे. इस पर भी काम कर रहे हैं. इसके अलावा अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान करने की तैयारी में हैं. आज वो बांस से अलग-अलग प्रोडक्ट तैयार करते हैं, जिसमें चाली, सीढ़ी, टेबल और फट्टी बनाते हैं. इस प्रोडक्ट को जिले के अलग अलग हिस्सों में मोदनगंज, हुलासगंज, काको, मखदुमपुर और सदर ब्लॉक में भेजते हैं. साथ ही मनरेगा के तहत लगने वाले पौधों को घेराव के लिए अलग अलग जगहों पर भेजते हैं.
जब रोजी रोजगार का कोई साधन और जरिया ना समझ में आए तब इंसान को खुद को समझना सबसे जरूरी हो जाता है. इसके लिए आपको खुद का इंट्रेस्ट पता करना होगा. यह काम आपको खुद ही करना होगा. इससे आप अपने लिए सही फील्ड का चुनाव कर पाएंगे कि आपको किस फील्ड से जुड़ा काम करना चाहिए या किस काम में आपका मन लगेगा. जिस काम में आपका मन लगेगा उसमें आपको सफल होने से कोई रोक भी नहीं सकता.


