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बिहार के छपरा जिले से महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक तस्वीर सामने आ रही है, जहां कम पूंजी और सही मार्गदर्शन के सहारे महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं. सरकारी योजनाओं और जीविका से जुड़कर मांझी प्रखंड के डुमरी अड्डा गांव की सविता देवी ने महज 10 हजार रुपये से अचार बनाने का व्यवसाय शुरू किया और आज अपने दम पर एक स्थानीय पहचान बना ली है. उनकी यह सफलता कहानी बताती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद इच्छाशक्ति और मेहनत से स्वरोजगार के जरिए बेहतर भविष्य गढ़ा जा सकता है. रिपोर्ट- विशाल कुमार
बिहार के छपरा जिले की महिलाएं अब कम लागत में अपना व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बन रही हैं. खास बात यह है कि नए और व्यावहारिक आइडिया के जरिए न केवल लागत कम रखी जा रही है, बल्कि तैयार उत्पाद की बिक्री में भी किसी तरह की परेशानी नहीं आ रही है.
सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर और जीविका से जुड़कर महिलाएं स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. इसी कड़ी में आज हम बात कर रहे हैं मांझी प्रखंड के डुमरी अड्डा गांव की रहने वाली सविता देवी की, जिन्होंने मात्र 10 हजार रुपये के ऋण से अपना छोटा उद्योग शुरू कर एक सफल स्थानीय ब्रांड की पहचान बना ली है.
सविता देवी पहले बेरोजगार थीं, लेकिन जीविका से जुड़ने के बाद उन्हें स्वयं सहायता समूह के माध्यम से 10 हजार रुपये का ऋण मिला. इसी पूंजी से उन्होंने अचार बनाने का व्यवसाय शुरू किया. सविता देवी द्वारा एक दर्जन से अधिक प्रकार के स्वादिष्ट अचार तैयार किए जाते हैं, जिनमें पारंपरिक स्वाद की झलक साफ दिखाई देती है.
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खास बात यह है कि वह अचार बनाने के लिए मसाले भी खुद ही तैयार करती हैं. घरेलू और शुद्ध मसालों के इस्तेमाल से उनके अचार का स्वाद अलग और खास बन गया है, जिसकी स्थानीय बाजार और आसपास के ग्रामीण इलाकों में खूब मांग है. लोकल 18 से बातचीत में सविता देवी ने बताया कि वह पिछले एक वर्ष से अचार बनाने और बेचने का काम कर रही हैं. उनका उत्पाद स्थानीय बाजार के साथ-साथ आसपास के गांवों में आसानी से बिक जाता है और बिक्री को लेकर उन्हें किसी तरह की खास परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता.
सविता देवी ने बताया कि यह उनका पहला व्यवसाय है और इससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है. सविता देवी ने कहा कि वह अपने इस कारोबार को आगे और विस्तार देना चाहती हैं. इसी उद्देश्य से वह अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा फिर से व्यवसाय में लगा रही हैं, ताकि उत्पादन और बिक्री दोनों बढ़ाई जा सके.
सविता देवी का कहना है कि इस व्यवसाय में मुनाफा भी अच्छा है और इसे बहुत ही कम लागत में शुरू किया जा सकता है. उन्होंने अन्य महिलाओं को भी प्रेरित करते हुए कहा कि यदि कोई महिला बेरोजगार है और इस तरह का व्यवसाय शुरू करना चाहती है, तो वह उन्हें निशुल्क प्रशिक्षण देने के लिए तैयार हैं. यह काम महिलाएं घर बैठे कर सकती हैं और इससे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकती हैं.
कुल मिलाकर सविता देवी की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद कुछ नया करने का सपना देखती हैं. जीविका जैसी योजनाओं से जुड़कर और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़कर महिलाएं न केवल खुद को आत्मनिर्भर बना रही हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वदेशी ब्रांड को भी बढ़ावा दे रही हैं.


