यूपी के इस मंदिर में झूठी कसम खाते ही चली गई आंखों की रोशनी!, मंदिर की मान्यता सुनकर रह जाएंगे हैरान

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इस मंदिर की मान्यता है कि यहां कोई झूठी कसम नहीं खाता है. यदि कोई झूठी कसम खा भी लिया तो उसके साथ अनहोनी होती है और उसे उसका खामियाजा उठाना पड़ता है. एक बार ऐसा हुआ कि एक व्यक्ति यहां आकर झूठी कसम खाया और कहा कि यदि मैं झूठ बोल रहा हूं तो मेरी आंखों की रोशनी चली जाए घर जाते-जाते उस व्यक्ति की रोशनी चली गई.

उत्तर प्रदेश धार्मिक स्थलों का गढ़ माना जाता है. यहां हर जनपद में हर मंदिरों का अलग महत्व होता है. मऊ जनपद में एक ऐसा मंदिर है जहां लोग झूठी कसम खाने से घबराते हैं. यदि कोई झूठी कसम खाता है, तो उसके साथ अनहोनी होती है. आईए जानते हैं कौन है वह मंदिर और क्या है इस मंदिर का विशेष महत्व..

झूठी कसम खाने से आंखों की चली गई थी रोशनी

लोकल 18 से बातचीत करते हुए नागेंद्र सिंह बताते हैं कि करहा स्थित यह बिरादरी मठ 300 वर्ष पुराना मंदिर है और इस मंदिर की मान्यता है कि यहां कोई झूठी कसम नहीं खाता है. यदि कोई झूठी कसम खा भी लिया तो उसके साथ अनहोनी होती है और उसे उसका खामियाजा उठाना पड़ता है. एक बार ऐसा हुआ कि एक व्यक्ति यहां आकर झूठी कसम खाया और कहा कि यदि मैं झूठ बोल रहा हूं तो मेरी आंखों की रोशनी चली जाए घर जाते-जाते उस व्यक्ति की रोशनी चली गई. यह मामला एक दो लोगों के साथ नहीं सैकड़ों लोगों के साथ हो चुका है यह अनहोनी देखकर अब यहां कोई झूठी कसम नहीं खाता है.

झूठी कसम खाने से हर कोई डरता

नागेंद्र सिंह बताते हैं कि यहां एक बहुत बड़ा आदमी आकर झूठी कसम खा लिया और उसी का खामियाजा भुगता की वह गरीब हो गया। तब से इस मंदिर पर कोई झूठी कसम नहीं खाता है हर कोई झूठी खाने से यहां डरता है। इस मंदिर की मान्यता है कि यहां बाबा घनश्याम दास जब यहां प्रकट हुए लोग उनके ऊपर विश्वास करना शुरू किया। उन्होंने सिद्धि प्राप्त करते हुए इस मंदिर पर समाधि ले लिया और समाधि लेते हुए उन्होंने कहा कि यहां कोई झूठी कसम खाएगी तो परेशान होगा तब से यहां लोग झूठी कसम नहीं खाते हैं.

गंगाजल जैसे सरोवर के पानी में भी नहीं पड़ते कीड़े

मंदिर के बाहर एक सरोवर है इस सरोवर का कभी पानी नहीं सूखता और खास बात यह है कि जैसे गंगा जल के पानी में कीड़े नहीं पड़ते वैसे ही इस सरोवर से निकले हुए पानी में कभी कीड़े नहीं पड़ते. मंदिर परिसर के बाहर बने हुए सरोवर में यदि कोई स्नान करके झूठी कसम खा लिया तो उसके साथ अनहोनी होना तय है यही वजह है कि इस सरोवर में स्नान करने के बाद कोई झूठी कसम नहीं खाता है, क्योंकि झूठी कसम खाने वालों को कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ा है.

लोगों की ज्योति कसम खाने से आंख की रोशनी तक चली गई. हालांकि, इस मंदिर पर साल में दो बार भव्य मेले का आयोजन होता है जहां लोग श्रद्धा सुमन के साथ पूजा पाठ करते हैं। तथा प्रतिदिन इस मंदिर पर सुबह से शाम तक भक्तों की भीड़ लगी रहती है यहां उनकी समाधि पर माथा टेकने से हर मन्नत भी पूरी होती है.

About the Author

Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



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